अकबरनगर में धूमधाम से मनाई गई राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली की 115वीं जयंती प्रधानाध्यापिका डॉ. ज्योति कुमारी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ भव्य साहित्यिक समारोह, छात्रों ने साझा किए विचार
अकबरनगर/भागलपुर: भारतीय साहित्य, गीत और पत्रकारिता जगत के अमर हस्ताक्षर, ओज और प्रखरता के प्रतीक राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली की 115वीं जयंती अकबरनगर क्षेत्र में पूरी भव्यता और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्थानीय शैक्षणिक संस्थान में एक विशेष साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता संस्था की प्राचार्या डॉ. ज्योति कुमारी ने की। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों ने भारी संख्या में शिरकत कर राष्ट्रकवि को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान पूरा परिसर 'नेपाली अमर रहें' और उनकी ओजस्वी कविताओं के नारों से गूंज उठा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रकवि के महान साहित्यिक योगदान और उनके देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों से रूबरू कराना था।
दीप प्रज्ज्वलन और मां भारती को नमन के साथ कार्यक्रम का आगाज
समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि और प्राचार्या डॉ. ज्योति कुमारी द्वारा राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
पुष्पांजलि अर्पित करने की होड़: शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने बारी-बारी से महान कवि को नमन किया।
वंदना और स्वागत गान: इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने राष्ट्रकवि की किसी लोकप्रिय रचना की प्रस्तुति के साथ स्वागत गान गाकर माहौल को पूरी तरह साहित्यिक और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।
प्राचार्या डॉ. ज्योति कुमारी का उद्बोधन: "नेपाली जी के गीत आज भी हैं प्रासंगिक"
समारोह की अध्यक्षता कर रही प्राचार्या डॉ. ज्योति कुमारी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली के जीवन और कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।
साहित्यिक धरोहर की चर्चा: उन्होंने कहा कि गोपाल सिंह नेपाली केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, ओज और राष्ट्रीय चेतना के एक ऐसा स्वर थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जन-जन में देशभक्ति की अलख जगाई।
संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा: डॉ. ज्योति कुमारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नेपाली जी का जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्होंने कभी अपनी कलम की धार को कमजोर नहीं होने दिया। उनके गीत आज की युवा पीढ़ी के लिए संघर्ष और सफलता का मार्गदर्शक हैं।
छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियां और कविताओं का पाठ
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक केंद्र छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए विचार और कविता पाठ रहे। विद्यालय के कई छात्र-छात्राओं ने मंच पर आकर राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली की प्रसिद्ध कविताओं का ओजस्वी पाठ किया:
"उठो, चलो, आगे बढ़ो...": विद्यार्थियों ने उनकी कविताओं के माध्यम से समाज में ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश दिया।
संस्मरण और भाषण: छात्र-नेताओं और प्रतिभागियों ने नेपाली जी के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों, उनकी पत्रकारिता यात्रा और हिंदी फिल्म जगत के लिए लिखे गए उनके अमर गीतों पर अपने विचार रखे। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
फिल्मी गीत और पत्रकारिता में नेपाली जी का योगदान
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों ने राष्ट्रकवि के बहुआयामी व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की:
हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग के गीतकार: शिक्षकों ने बताया कि गोपाल सिंह नेपाली ने न केवल मंचों पर बल्कि हिंदी सिनेमा (बॉलीवुड) को भी कई बेहतरीन और अमर गीत दिए। उनके लिखे गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
पत्रकारिता के पुरोधा: उन्होंने कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया और हमेशा निष्पक्ष व राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने वाली पत्रकारिता को बढ़ावा दिया।
समापन और संकल्प
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली के अधूरे सपनों को पूरा करने और उनके साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। प्राचार्या डॉ. ज्योति कुमारी ने सभी प्रतिभागियों और शिक्षकों को धन्यवाद ज्ञापित किया और राष्ट्रगान के साथ इस भव्य साहित्यिक समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ। अकबरनगर में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महान साहित्यकार कभी मरते नहीं, वे अपनी रचनाओं के जरिए हमेशा जीवित रहते हैं।