तीसरी सोमवारी पर बिहार में नदी स्नान के दौरान 18 लोग डूबे, सात की मौत; तीन अब भी लापता

पटना। सावन की तीसरी सोमवारी के मौके पर बिहार के अलग-अलग जिलों में नदी और गंगा घाटों पर स्नान के दौरान हादसों ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। राज्य में सोमवार को नदी स्नान के दौरान कुल 18 लोगों के डूबने की घटनाएं सामने आईं। इनमें सात लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों को लगाया गया है। वहीं, आठ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।

सबसे बड़ी घटना पटना जिले के बख्तियारपुर में रानीसराय गंगा घाट पर हुई, जहां स्नान के दौरान सात लड़कियां गंगा की तेज धार की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों की तत्परता से तीन लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन चार लड़कियां तेज बहाव में बह गईं। इनमें से तीन के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि एक लड़की की तलाश एसडीआरएफ की टीम नदी में कर रही है।

इसके अलावा कटिहार, मुजफ्फरपुर और मधुबनी में भी नदी में स्नान के दौरान डूबने की घटनाएं हुईं। अलग-अलग हादसों में कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं। इन घटनाओं ने एक बार फिर नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और स्नान के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।

बख्तियारपुर में सात लड़कियां डूबीं

पटना के बख्तियारपुर थाना क्षेत्र स्थित रानीसराय गंगा घाट पर सोमवार को स्नान करने के दौरान सात लड़कियां डूब गईं। बताया गया कि नदी में स्नान के दौरान अचानक लड़कियां तेज धार की चपेट में आ गईं और देखते ही देखते पानी में बहने लगीं।

घटना के बाद घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। लोगों की मदद से तीन लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि चार लड़कियां गंगा की तेज धारा में बह गईं।

घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। तलाशी अभियान के दौरान तीन लड़कियों के शव बरामद कर लिए गए। एक अन्य लड़की की तलाश जारी रही। तेज बहाव के कारण एसडीआरएफ के जवानों को भी तलाशी अभियान में चुनौती का सामना करना पड़ा।

घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया। परिजनों के पहुंचने के बाद वहां चीख-पुकार मच गई। एक धार्मिक अवसर पर स्नान के लिए पहुंचे परिवारों के लिए यह घटना बेहद दुखद साबित हुई।

कटिहार में पांच बच्चे बरंडी नदी में डूबे

कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र में भी सोमवार को बड़ा हादसा हुआ। मोरसंडा कमला घाट के पास बरंडी नदी में स्नान करने के दौरान पांच बच्चे डूब गए।

हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद लोगों ने बच्चों को बचाने की कोशिश शुरू की। स्थानीय लोगों के प्रयास से दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि तीन बच्चों की मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हुआ। हादसे के बाद मृत बच्चों के परिवारों में कोहराम मच गया। ग्रामीणों के अनुसार नदी में स्नान के दौरान बच्चों को पानी की गहराई और बहाव का अंदाजा नहीं हो सका, जिसके कारण हादसा हुआ।

इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के नदी और तालाब में अकेले या बिना पर्याप्त निगरानी के स्नान करने के खतरे को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को गहरे पानी से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक में दो किशोर लापता

मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में अंजनाकोट के पास बूढ़ी गंडक नदी घाट पर भी सोमवार को हादसा हुआ। यहां स्नान करने गए पांच किशोरों में से दो नदी में लापता हो गए।

घटना के दौरान तीन किशोरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लेकिन दो किशोरों का पता नहीं चल सका। इसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई।

स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से नदी में खोज अभियान चलाया गया। तेज बहाव और नदी की गहराई के कारण लापता किशोरों को तलाशने में परेशानी सामने आई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा और वे लगातार नदी किनारे अपने बच्चों के मिलने का इंतजार करते रहे।

लापता लोगों की तलाश में एसडीआरएफ और स्थानीय बचाव दल की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि नदी का तेज बहाव शव या व्यक्ति को घटनास्थल से काफी दूर तक बहा सकता है।

मधुबनी में कमला नदी में डूबने से एक की मौत

मधुबनी जिले के जयनगर में भी तीसरी सोमवारी के दौरान कमला नदी में स्नान करने के दौरान एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई।

कमला नदी में स्नान के दौरान हादसा होने की सूचना मिलते ही स्थानीय स्तर पर बचाव प्रयास शुरू किए गए। बाद में डूबे व्यक्ति को बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

इस घटना से भी इलाके में शोक का माहौल बन गया। धार्मिक अवसर पर नदी में स्नान करने पहुंचे लोगों को इस हादसे के बाद अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत महसूस हुई।

एक ही दिन में कई हादसों से चिंता

तीसरी सोमवारी के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में एक ही दिन में कई लोगों के डूबने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में लोग गंगा और अन्य नदियों के घाटों पर स्नान करने पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों पर भीड़ बढ़ने के साथ हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है।

विशेषकर नदियों में जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव की स्थिति में सामान्य दिखाई देने वाला पानी भी खतरनाक हो सकता है। नदी की सतह शांत दिखने के बावजूद नीचे गहराई और तेज धारा मौजूद हो सकती है।

बच्चों और किशोरों के मामले में जोखिम और बढ़ जाता है। कई बार वे पानी की गहराई का अनुमान नहीं लगा पाते और कुछ ही सेकंड में तेज बहाव की चपेट में आ जाते हैं।

घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत

लगातार हो रही डूबने की घटनाओं के बीच नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रमुख घाटों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, प्रशिक्षित गोताखोर और बचाव दल की मौजूदगी हादसों को रोकने में मदद कर सकती है।

इसके अलावा घाटों पर लोगों को सुरक्षित क्षेत्र में ही स्नान करने के लिए जागरूक किया जाना जरूरी है। जहां नदी का बहाव तेज हो या पानी अधिक गहरा हो, वहां लोगों को जाने से रोकने के लिए प्रशासन को प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए।

धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और बचाव दल की तैनाती भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

तेज बहाव वाले पानी से बचना जरूरी

नदी में स्नान करते समय सबसे बड़ी सावधानी यह है कि लोग पानी के बहाव और गहराई को नजरअंदाज न करें। कई हादसे ऐसे होते हैं जिनमें लोग किनारे से थोड़ी दूर जाते ही गहरे पानी में पहुंच जाते हैं।

विशेषकर बारिश और मानसून के दौरान नदियों का स्वरूप तेजी से बदल सकता है। ऊपर से पानी सामान्य दिखने के बावजूद नदी के बीच तेज धारा हो सकती है। ऐसे में नदी के अंदर अधिक दूर तक जाना जोखिम भरा हो सकता है।

बच्चों को नदी में स्नान कराने वाले परिजनों को हर समय उनके साथ रहना चाहिए। किसी भी स्थिति में बच्चों को पानी के पास अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

प्रशासन और स्थानीय लोगों की भूमिका अहम

डूबने की घटनाओं में स्थानीय लोगों की तत्काल प्रतिक्रिया कई बार लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बख्तियारपुर में भी तीन लड़कियों को स्थानीय लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाला। इसी तरह कटिहार में भी दो बच्चों को बचाया गया।

हालांकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशिक्षित बचाव दल की मौजूदगी भी आवश्यक है। नदी में उतरकर किसी डूबते व्यक्ति को बचाने की कोशिश बिना प्रशिक्षण के करने पर बचावकर्ता की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

इसलिए प्रशासन को घाटों पर बचाव उपकरण, लाइफ जैकेट और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।

परिवारों में पसरा मातम

तीसरी सोमवारी के दौरान हुए इन हादसों ने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया। जिन परिवारों के सदस्य धार्मिक स्नान के लिए घर से निकले थे, उन्हें हादसे के बाद अपनों की मौत या लापता होने की खबर मिली।

बख्तियारपुर, कटिहार, मुजफ्फरपुर और मधुबनी की घटनाओं में स्थानीय स्तर पर शोक का माहौल रहा। मृतकों के परिजनों के लिए यह हादसा अचानक आई ऐसी त्रासदी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

वहीं, जिन लोगों के परिजन अभी लापता हैं, उनके परिवारों की उम्मीदें बचाव अभियान पर टिकी हैं।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

लगातार सामने आ रही डूबने की घटनाओं के बीच लोगों से अपील है कि धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें। नदी में स्नान करते समय निर्धारित और सुरक्षित स्थान का इस्तेमाल करना चाहिए। गहरे पानी, तेज धारा और बैरिकेडिंग वाले क्षेत्रों में जाने से बचना जरूरी है।

बच्चों और किशोरों को नदी में अकेले स्नान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अगर पानी का बहाव तेज हो तो स्नान का कार्यक्रम टाल देना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

तीसरी सोमवारी के दिन बिहार में सामने आई इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नदी में स्नान करते समय छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। एक ही दिन में 18 लोगों के डूबने, सात लोगों की मौत और तीन लोगों के लापता होने की घटनाएं बेहद गंभीर हैं। अब जरूरत है कि प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करे और लोग भी नदी घाटों पर अतिरिक्त सावधानी बरतें, ताकि धार्मिक आयोजनों के दौरान ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।