शहर के विकास में नया अध्याय; पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित होंगी योजनाएं, परियोजना लागत की आधी राशि लगाएंगे निजी निवेशक
भागलपुर: शहर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने, यातायात व पार्किंग की गंभीर समस्याओं से निजात दिलाने तथा व्यावसायिक गतिविधियों को पंख देने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरी तरह रफ्तार देने के लिए इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP - Public Private Partnership) मॉडल के आधार पर विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इस वित्तीय मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कुल परियोजना लागत की आधी (50 प्रतिशत) राशि निजी निवेशकों द्वारा लगाई जाएगी, जिससे सरकारी राजकोष पर पड़ने वाला वित्तीय दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
क्या है पीपीपी मॉडल और कैसे होगा निवेश?
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर किसी दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे या जनहित की परियोजना को अमलीजामा पहनाते हैं। भागलपुर में तैयार की गई इस नई कार्ययोजना के तहत, कुल अनुमानित लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा निजी निवेशकों या डेवलपर्स द्वारा वित्तपोषित (Fund) किया जाएगा। इसके बदले में निवेशकों को व्यावसायिक परिसरों, पार्किंग स्थलों और अन्य निर्धारित वाणिज्यिक spazi (Spaces) का संचालन करने का अधिकार दिया जाएगा, जिससे वे तय नियमों के तहत अपनी आय अर्जित कर सकें।
इस व्यवस्था से एक ओर जहां सरकारी खजाने पर एकमुश्त भारी भरकम राशि का बोझ नहीं पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर निजी क्षेत्र की कार्यकुशलता, तकनीकी विशेषज्ञता और पारदर्शिता का सीधा लाभ शहर के विकास कार्यों को मिलेगा।
शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार और अर्बन पार्किंग का खाका
बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव को देखते हुए इस मॉडल के अंतर्गत शहर के विभिन्न हिस्सों में आधुनिक अर्बन पार्किंग और बिजनेस सेंटर नेटवर्क विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
याचिका और पार्किंग संकट का समाधान: शहर के मुख्य बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मल्टी-लेवल पार्किंग और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे, जिससे सड़क पर लगने वाले जाम से लोगों को स्थायी मुक्ति मिल सके।
व्यावसायिक केंद्रों का विकास: चिन्हित स्थलों पर आधुनिक बिजनेस सेंटर बनने से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
जोखिम और लागत का साझाकरण: आधी राशि निजी निवेशकों द्वारा लगाए जाने के कारण परियोजना के वित्तीय जोखिम भी दोनों पक्षों के बीच संतुलित हो जाएंगे।
इन्वेस्टर मीट और निवेशकों की बढ़ती रुचि
इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए हाल ही में स्मार्ट सिटी कार्यालय और प्रशासनिक स्तर पर 'इन्वेस्टर मीट' (Investors Meet) का आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक में देश और क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित निवेशकों, डेवलपर्स वत तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान निवेशकों के समक्ष परियोजना की रूपरेखा, लीज प्रक्रिया, नियमों और मिलने वाले व्यावसायिक लाभों का विस्तृत प्रेजेंटेशन रखा गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इस मॉडल के तहत निवेश करने वाले सहभागियों को हरसंभव प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि तय समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा हो सके।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित यह योजना भागलपुर के शहरी विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। परियोजना लागत में निजी क्षेत्र की आधी हिस्सेदारी सुनिश्चित होने से न केवल धन की कमी आड़े नहीं आएगी, बल्कि निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता और समयबद्धता भी बनी रहेगी। आने वाले दिनों में यह मॉडल शहर के स्वरूप को पूरी तरह बदलने का माद्दा रखता है।