श्रावण मास की महाशिवरात्रि और कांवर यात्रा पर उमड़ा आस्था का सैलाब; सुलतानगंज से एक लाख से अधिक कांवरियों ने उत्तरवाहिनी गंगे में डुबकी लगाकर बाबाधाम के लिए भरी हुंकार
सुलतानगंज (भागलपुर), विशेष संवाददाता: देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम की पावन यात्रा के लिए प्रसिद्ध सुप्रसिद्ध नगरी सुलतानगंज इन दिनों शिवमय हो चुकी है। श्रावण मास के इस विशेष अवसर पर उत्तरवाहिनी गंगा तट से एक लाख से अधिक शिवभक्तों (कावंरियों) का जत्था गेरुआ वस्त्र धारण कर बोल बम के जयकारों के साथ देवघर के लिए रवाना हुआ। कांवरियों की इस असीम भीड़ से पूरा सुलतानगंज शहर और नमामि गंगे घाट गूंज उठा। हर-हर महादेव और ओम नमः शिवाय के मंत्रोच्चार के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई और संकल्प लेकर कठिन 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा की शुरुआत की।
उत्तरवाहिनी गंगा तट पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब
श्रावण मास के दौरान सुलतानगंज के अजगैबीनाथ धाम (उत्तरवाहिनी गंगा तट) का महत्व पौराणिक काल से ही अत्यंत विशेष रहा है:
गंगा जल भरकर यात्रा का आरंभ: देश के कोने-कोने से पहुंचे शिवभक्तों ने अहले सुबह से ही गंगा घाटों पर डेरा डाल दिया था। पारंपरिक विधि-विधान से मां गंगा का पूजन करने के बाद कांवरियों ने अपने कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरा और बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करने के लिए देवघर की ओर पदयात्रा शुरू की।
भगवामय हुआ पूरा इलाका: सुलतानगंज से लेकर कच्ची कांवरिया पथ तक चारों तरफ सिर्फ केसरिया वस्त्र पहने श्रद्धालु ही नजर आ रहे हैं। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों—सभी में इस यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
प्रशासनिक चौकस व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
एक लाख से अधिक कांवरियों के एक साथ रवाना होने की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया:
सुरक्षा के कड़े प्रबंध: भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है। गंगा घाटों से लेकर कांवरिया पथ तक सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है।
भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था: भारी भीड़ के मद्देनजर वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाते हुए रूट चार्ट में बदलाव किया गया है, ताकि कांवरियों को चलने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जगह-जगह ड्रॉप गेट बनाए गए हैं।
सेवा शिविरों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सराहनीय भूमिका
लाखों की संख्या में गुजर रहे कांवरियों की सेवा के लिए जगह-जगह सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों द्वारा सेवा शिविर (कांवरिया कैंप) लगाए गए हैं:
चिकित्सा और खान-पान की सुविधा: इन शिविरों में कांवरियों के विश्राम करने, उनके पैरों की मालिश करने, चाय-पानी, फल और निःशुल्क चिकित्सा (फर्स्ट एड) की बेहतरीन व्यवस्था की गई है।
अनोखा सेवा भाव: स्थानीय ग्रामीण और युवा स्वयंसेवक पूरी निष्ठा के साथ कांवरियों की सेवा में जुटे हुए हैं, जो भारतीय संस्कृति और अतिथि सत्कार की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।
भक्तों की अटूट आस्था और बोल बम का गूंजता नारा
यात्रा पर निकले शिवभक्तों से जब बात की गई, तो उनके चेहरे पर थकान के बजाय बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा और ऊर्जा साफ झलक रही थी:
कठिन मार्ग, अडिग विश्वास: सुल्तानगंज से देवघर के बीच की यह लगभग 105 किलोमीटर लंबी पदयात्रा काफी कठिन मानी जाती है, जिसमें सुल्तानगंज से देवघर तक का कच्चा रास्ता भी शामिल है। इसके बावजूद शिवभक्तों के कदम रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
हर जुबान पर एक ही नाम: रास्ते भर 'बोल बम', 'बम-बम भोले' और 'ॐ नमः शिवाय' के जयकारों से पूरा वातावरण गूंजायमान हो रहा है, जिससे पूरा झारखंड और बिहार सीमावर्ती क्षेत्र भक्तिमय हो गया है।
सुलतानगंज से एक लाख से अधिक कांवरियों का बाबाधाम के लिए रवाना होना इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है। प्रशासनिक सहयोग, स्वयंसेवकों की सेवा और शिवभक्तों के उत्साह ने इस श्रावणी मेले को एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और समर्पण का एक अनूठा संगम भी है।