टीएनबी कॉलेज में एबीवीपी का हंगामा छात्र संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन के बाद प्राचार्य ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

भागलपुर: भागलपुर के प्रतिष्ठित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के अंतर्गत आने वाले टीएनबी कॉलेज (TNB College) परिसर में उस समय भारी गहमागहमी देखने को मिली, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार हंगामा किया। कॉलेज परिसर में छात्रों के गुस्से और प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कॉलेज के प्राचार्य (Principal) ने तत्काल हस्तक्षेप किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के कड़े आदेश जारी किए हैं।

प्रदर्शन के मुख्य कारण और छात्रों की मांगें

एबीवीपी कार्यकर्ताओं और छात्रों द्वारा किए गए इस हंगामे के पीछे कई अहम शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दे जुड़े हुए थे:

शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार: प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि कॉलेज में पठन-पाठन की नियमितता और कक्षाओं के संचालन में लापरवाही बरती जा रही है, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

बुनियादी सुविधाएं और छात्र कल्याण: कॉलेज परिसर में पेयजल, स्वच्छता, पुस्तकालय और छात्र-छात्राओं के बैठने की व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्रों में भारी रोष देखा गया।

कार्यालयीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता: छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने कॉलेज के प्रशासनिक कार्यालय में मनमानी और छात्रों के लंबित कार्यों के निष्पादन में देरी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।

प्राचार्य का त्वरित हस्तक्षेप और जांच कमेटी का गठन

हंगामे की सूचना मिलते ही कॉलेज के प्राचार्य मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की:

वार्ता और आश्वासन: प्राचार्य ने छात्रों की सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

जांच के आदेश: कॉलेज में उत्पन्न हुई इस स्थिति और उठाई गई अनियमितताओं की शिकायतों की तह तक जाने के लिए प्राचार्य ने एक विशेष जांच समिति (Enquiry Committee) के गठन की घोषणा की है। यह समिति तय समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषी पाए जाने वाले कर्मियों या व्यवस्थाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

टीएनबी कॉलेज में एबीवीपी के हंगामे और उसके बाद प्राचार्य द्वारा दिए गए जांच के आदेशों से यह स्पष्ट है कि शिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता और छात्र हितों की अनदेखी अब छात्र संगठन बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन भी अब अपनी कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए सक्रिय नजर आ रहा है।