सैदपुर दुर्गा मंदिर पर मंडरा रहे बाढ़ और कटाव के खतरे टालने की प्रशासनिक पहल; ग्रामीण कार्य विभाग ने शुरू किया सुरक्षात्मक कार्य, कार्यपालक अभियंता ई. रविंद्र शर्मा के निर्देश पर शुरू हुई बम्बू पाइलिंग
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में गंगा और अन्य सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच कटाव का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच, जिले के एक संवेदनशील इलाके से राहत भरी खबर सामने आई है। ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था के बड़े केंद्र सैदपुर दुर्गा मंदिर को आसन्न बाढ़ और भीषण नदी कटाव से सुरक्षित बचाने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग (Rural Works Department) ने त्वरित और ठोस कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग और चिंता को संज्ञान में लेते हुए विभाग के कार्यपालक अभियंता ई. रविंद्र शर्मा ने खुद व्यक्तिगत रूप से घटनास्थल का निरीक्षण किया और युद्ध स्तर पर बम्बू पाइलिंग (बांस की पाइलिंग) का कार्य शुरू करने के कड़े निर्देश दिए।
क्यों बना हुआ था सैदपुर दुर्गा मंदिर पर कटाव का खतरा?
भागलपुर के ग्रामीण अंचलों में नदी के किनारे बसे कई गांव हर साल मानसूनी बारिश और उफनती नदियों के कारण होने वाले भू-कटाव (Riverbank Erosion) की चपेट में आ जाते हैं:
आस्था के केंद्र पर मंडराता संकट: सैदपुर स्थित यह दुर्गा मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का स्थान है, बल्कि इस क्षेत्र के लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। मंदिर के ठीक नजदीक से गुजरने वाली जलधारा या नदी के रुख में आए बदलाव के कारण पिछले कुछ दिनों से मिट्टी का कटाव तेजी से हो रहा था।
ग्रामीणों में थी गहरी चिंता: स्थानीय लोगों और मंदिर समिति के सदस्यों ने आशंका जताई थी कि यदि समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी बाढ़ के दौरान मंदिर का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। लगातार कटती जमीन को देखकर ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई थी।
कार्यपालक अभियंता ई. रविंद्र शर्मा का स्थलीय निरीक्षण और तत्परता
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता ई. रविंद्र शर्मा ने बिना किसी विलंब के प्रशासनिक टीम के साथ सैदपुर दुर्गा मंदिर क्षेत्र का दौरा किया:
बारीकी से लिया स्थिति का जायजा: ई. रविंद्र शर्मा ने मौके पर पहुंचकर नदी के कटाव से प्रभावित क्षेत्र का चप्पा-चप्पा देखा और तकनीकी पहलुओं का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
तत्काल बम्बू पाइलिंग के निर्देश: स्थिति की नजाकत को भांपते हुए कार्यपालक अभियंता ने मौके पर मौजूद संवेदकों और इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से बम्बू पाइलिंग (Bamboo Piling) और तटबंध सुदृढीकरण का कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। उनके निर्देश मिलते ही मजदूरों और मशीनों को तुरंत काम पर लगा दिया गया।
क्या है बम्बू पाइलिंग और यह कैसे करती है बचाव?
बाढ़ और कटाव नियंत्रण की दिशा में बम्बू पाइलिंग एक पारंपरिक लेकिन बेहद प्रभावी और कम लागत वाली तकनीकी विधि मानी जाती है:
मिट्टी के कटाव को रोकना: नदी के तेज बहाव और लहरों से जब बैंक (तट) कटने लगते हैं, तो बांस के मजबूत खंभों को आपस में बांधकर और उनके बीच में बालू भरी बोरियां या झाड़ियां रखकर पानी के वेग को तोड़ा जाता है।
अस्थाई पर प्रभावी सुरक्षा: इससे पानी का सीधा प्रहार सीधे मिट्टी की सतह पर नहीं पड़ता और कटाव की गति थम जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्थिति में यह विधि काफी कारगर साबित होती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, प्रशासन की सराहना
ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा उठائے गए इस त्वरित कदम के बाद सैदपुर और आसपास के इलाकों के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है:
जनता का आभार: स्थानीय ग्रामीणों ने कार्यपालक अभियंता ई. रविंद्र शर्मा और विभाग की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप होने से एक बड़ा संकट टल गया है। लोगों का कहना है कि यदि यह कदम कुछ दिन और देर से उठाया जाता, तो मंदिर को बचाना मुश्किल हो जाता।
सतर्कता बरतने की अपील: ग्रामीणों और मंदिर कमेटियों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि मानसून के पूरे सीजन के दौरान इस क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
सैदपुर दुर्गा मंदिर को बाढ़ और कटाव से बचाने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई प्रशासनिक मुस्तैदी का एक बेहतरीन उदाहरण है। कार्यपालक अभियंता ई. रविंद्र शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुआ बम्बू पाइलिंग का यह कार्य न केवल मंदिर की रक्षा करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास को भी और अधिक मजबूत बनाएगा। प्रकृति के प्रकोप के आगे इंसानी प्रयास भले ही सीमित हों, लेकिन समय पर उठाया गया सही कदम बड़ी तबाही को रोकने में पूरी तरह सक्षम साबित होता है।