रंग-बिरंगे फूलों से हुआ बाबा का अलौकिक महाशृंगार; पुजारी आशुतोष पाठक ने कराया पंचामृत स्नान और आरती, बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु
उत्तर बिहार के सबसे प्रसिद्ध और आस्था के प्रमुख केंद्र मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम (Baba Garibnath Dham) में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत धूमधाम, भक्तिभाव और भव्यता के साथ मनाया गया। गुरु पूर्णिमा के इस पवित्र अवसर पर बाबा गरीबनाथ के दरबार को बेहद मनमोहक तरीके से सजाया गया था। इस विशेष दिन पर रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से बाबा का भव्य महाशृंगार किया गया, जिसकी अलौकिक छटा देखते ही बन रही थी।
मंदिर के प्रधान पुजारी आशुतोष पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। उन्होंने सबसे पहले बाबा गरीबनाथ को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) से स्नान कराया, जिसके बाद षोपचार विधि से पूजा-अर्चना की गई और फिर संध्या आरती उतारी गई। इस धार्मिक अनुष्ठान और महाशृंगार के दर्शन के लिए मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों के साथ-साथ कई भाजपा (BJP) के नेता और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। आइए मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम में गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर हुए आयोजनों, अनुष्ठानों और भक्तों की आस्था का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर बाबा गरीबनाथ का अलौकिक शृंगार और सजावट
सनातन संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का पर्व केवल गुरुओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का दिन नहीं है, बल्कि इस दिन भगवान शिव को आदि गुरु मानकर उनकी विशेष आराधना भी की जाती है।
देश-विदेश के फूलों से सजा दरबार: बाबा गरीबनाथ का यह महाशृंगार शहरवासियों और दूर-दराज से आए भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। कोलकाता, बेंगलुरु और अन्य महानगरों से मंगवाए गए विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से पूरे गर्भ गृह और मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया था।
दिव्य रूप के दर्शन: फूलों की सजावट के बीच बाबा गरीबनाथ का यह दिव्य रूप अत्यंत मनमोहक लग रहा था। सुबह से ही मंदिर परिसर "हर हर महादेव" और "बम बम भोले" के जयकारों से गूंज उठा।
पुजारी आशुतोष पाठक द्वारा पंचामृत स्नान और पूजन अनुष्ठान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विशेष अवसरों पर भगवान शिव का अभिषेक और शृंगार करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पंचामृत स्नान की विधि: मंदिर के पुजारी आशुतोष पाठक ने प्रातकालिन वेला में अनुष्ठान की शुरुआत की। उन्होंने दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बने पंचामृत से बाबा गरीबनाथ का अभिषेक और स्नान कराया।
आरती और महाप्रसाद: पंचामृत स्नान के पश्चात बाबा को वस्त्र अर्पित किए गए और फिर भव्य महाशृंगार किया गया। इसके बाद विधि-विधान से आरती संपन्न हुई, जिसमें शामिल होने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर के गर्भगृह के आसपास मौजूद रहे। आरती के पश्चात भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की उपस्थिति: भाजपा नेताओं की सहभागिता
इस पावन अवसर पर मुजफ्फरपुर के कई प्रतिष्ठित सामाजिक और राजनीतिक चेहरे बाबा गरीबनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने पहुँचे।
भाजपा नेताओं की उपस्थिति: इस भव्य आयोजन में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई प्रमुख स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी सम्मिलित हुए। उन्होंने बाबा गरीबनाथ का आशीर्वाद लिया और देश तथा समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
आपसी सौहार्द और भक्ति: इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों में विभिन्न दलों और वर्गों के लोगों का एक मंच पर आना मुजफ्फरपुर की सांस्कृतिक और सामाजिक एकजुटता का परिचायक बनता है। राजनेताओं ने भी आम श्रद्धालुओं की तरह पंक्ति में लगकर बाबा के दर्शन किए।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और मंदिर प्रशासन की व्यवस्था
गुरु पूर्णिमा और सावन के शुरुआती दौर के चलते बाबा गरीबनाथ धाम में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली।
लंबी कतारें: अहले सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सभी में बाबा के दर्शन की होड़ लगी हुई थी।
सुरक्षा और अनुशासन: उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि सभी श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के शांतिपूर्ण तरीके से जलार्पण और दर्शन कर सकें।
मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह भव्य महाशृंगार, पुजारी आशुतोष पाठक द्वारा कराया गया पंचामृत स्नान और आरती का कार्यक्रम पूरी तरह से आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। रंग-बिरंगे फूलों से सजे बाबा के दरबार ने हर देखने वाले का मन मोह लिया। इस आयोजन में विभिन्न भाजपा नेताओं और बड़ी संख्या में आम जनता की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि मुजफ्फरपुर की संस्कृति में धर्म, आस्था और सामाजिक समरसता का कितना गहरा और अटूट बंधन है। यह पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला साबित हुआ।