बिहार में निवेश बढ़ाने की तैयारी, विधानसभा में पेश होगा ‘बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल’; सिंगल विंडो सिस्टम से उद्योगों को मिलेगी बड़ी राहत

पटना: बिहार में निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से सम्राट चौधरी सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ‘बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल’ को विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राज्य में उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।

सरकार का मानना है कि इस बिल के लागू होने के बाद निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके बजाय सिंगल विंडो (एकल खिड़की) प्रणाली के माध्यम से उद्योगों से जुड़ी अधिकांश अनुमतियां, मंजूरियां और प्रशासनिक प्रक्रियाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे निवेशकों का समय और लागत दोनों की बचत होगी तथा बिहार को निवेश के लिए अधिक आकर्षक राज्य बनाने में मदद मिलेगी।

क्या है बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल?

प्रस्तावित बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल का मुख्य उद्देश्य राज्य में उद्योगों और व्यवसायों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।

वर्तमान में किसी नए उद्योग की स्थापना के लिए उद्यमियों को कई सरकारी विभागों से अलग-अलग अनुमतियां लेनी पड़ती हैं। इससे प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है। नया विधेयक इस व्यवस्था को सरल बनाकर अधिकांश सेवाओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।

सिंगल विंडो सिस्टम क्या है?

इस विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था सिंगल विंडो सिस्टम है।

इसके तहत उद्योग लगाने वाले निवेशकों को बिजली, जलापूर्ति, भूमि, प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, श्रम, नगर निकाय और अन्य विभागों से संबंधित आवश्यक स्वीकृतियों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।

एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म या निर्धारित प्रणाली के माध्यम से आवेदन, स्वीकृति, दस्तावेजों की जांच और आवेदन की स्थिति की निगरानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

निवेशकों को मिलेगा बड़ा लाभ

सरकार का मानना है कि नए कानून से निवेशकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे।

विभिन्न विभागों की मंजूरियां एक ही मंच से मिल सकेंगी।

आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध होगी।

अनावश्यक प्रशासनिक देरी में कमी आएगी।

उद्योग स्थापित करने की लागत और समय दोनों घटेंगे।

निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।

नए उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान होगी।

औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति

राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर कारोबारी माहौल तैयार होने से बिहार में घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार के निवेश बढ़ेंगे।

नए उद्योग स्थापित होने से विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी।

इससे राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

सरकार का कहना है कि यदि निवेश बढ़ता है तो राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार उपलब्ध होंगे। विशेष रूप से युवाओं को अपने राज्य में ही रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की संभावना है।

छोटे और मध्यम उद्योगों को भी होगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिल का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) भी सिंगल विंडो व्यवस्था के माध्यम से तेजी से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर सकेंगे। इससे छोटे उद्यमियों को भी कारोबार शुरू करने में सुविधा होगी।

डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

सरकार इस बिल के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।

ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, आवेदन की रियल-टाइम ट्रैकिंग और समय-सीमा के भीतर निर्णय जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा।

इससे भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी की संभावना कम होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विधेयक का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है तो बिहार की निवेश छवि में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

हालांकि उनका यह भी मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। विभागों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध सेवा, डिजिटल क्षमता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

विधानसभा में होगी विस्तृत चर्चा

विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने के बाद इस पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

सत्ता पक्ष इसे राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष विभिन्न प्रावधानों और उनके प्रभाव पर सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकता है।

बहस के दौरान संशोधन प्रस्ताव भी लाए जा सकते हैं।

निवेशकों का विश्वास बढ़ाने की पहल

हाल के वर्षों में कई राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए अपनी औद्योगिक नीतियों और कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बना रहे हैं।

बिहार सरकार का यह कदम भी इसी दिशा में माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य राज्य को उद्योगों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल बनाना है।

बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल राज्य में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं और अनुमतियों को एक मंच पर लाने का प्रयास निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान, पारदर्शी और समयबद्ध बना सकता है। यदि विधेयक प्रभावी रूप से लागू होता है, तो इससे बिहार में निवेश बढ़ने, नए उद्योग स्थापित होने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें विधानसभा में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा और इसके अंतिम स्वरूप पर टिकी हैं।