भाजपा का 'समरसता संकल्प अभियान': एक विस्तृत रिपोर्ट

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा देश के महान संत, दार्शनिक और समाज सुधारक संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक अभियान की शुरुआत की गई है। भाजपा द्वारा 29 जुलाई 2026 (गुरु पूर्णिमा) से लेकर 20 फरवरी 2027 (माघ पूर्णिमा) तक 'श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान' का आयोजन किया जा रहा है। यह देशव्यापी अभियान सामाजिक समरसता, आपसी समानता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।

अभियान की पृष्ठभूमि और मुख्य उद्देश्य

संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज ने सदियों पहले समाज से छुआछूत, ऊंच-नीच और भेदभाव को मिटाकर एक समतामूलक समाज की स्थापना का संदेश दिया था। उनका 'बेगमपुरा' का सपना एक ऐसे समाज की कल्पना करता है जहां किसी भी प्रकार का दुख, भय या सामाजिक भेदभाव न हो।

भाजपा के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है:

सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना: समाज के सभी वर्गों के बीच की दूरियों को मिटाकर आपसी सौहार्द स्थापित करना।

समानता का संदेश: गुरु रविदास के विचारों के माध्यम से समाज में मानवीय गरिमा और बराबरी के अधिकार को रेखांकित करना।

राष्ट्रीय एकता: देश को सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से एकजुट करना तथा 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मूल मंत्र को गति देना।

अभियान की समय-सीमा और चरणबद्ध रूपरेखा

यह महत्वाकांक्षी अभियान 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर शुरू होकर 20 फरवरी 2027 को संत रविदास जयंती (माघ पूर्णिमा) के दिन संपन्न होगा। इस पूरे समयावधि के दौरान देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में चरणों के हिसाब से विविध कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है:

प्रथम चरण (शुभारंभ और दीपोत्सव): अभियान की शुरुआत 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा की संध्या पर मंदिरों एवं प्रमुख स्थानों पर 'समरसता दीप महोत्सव' के आयोजन के साथ की गई। इस दौरान स्थानीय स्तर पर संत रविदास के चित्रों पर माल्यार्पण और उनके जीवन दर्शन पर चर्चाएं हुईं।

कलश बंधन अभियान: इस चरण के तहत उत्तर प्रदेश स्थित वाराणसी में संत रविदास की पवित्र जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर की पावन मिट्टी को कलशों में भरकर देश के विभिन्न गांवों और बूथ स्तर तक पहुंचाया जा रहा है।

श्री गुरु रविदास महाराज समरसता यात्रा: अभियान के अंतर्गत एक प्रमुख आकर्षण के रूप में 5 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक डेरा सचखंड बल्लां (जालंधर, पंजाब) से लेकर सीर गोवर्धनपुर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) तक एक भव्य 'समरसता यात्रा' निकाली जाएगी। यह यात्रा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से गुजरेगी और रास्ते में संत रविदास के संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार करेगी।

संगठन और जन-भागीदारी: भाजपा के संगठनात्मक जिलों (जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब सहित अन्य राज्यों) में पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा संगोष्ठियां, विचार गोष्ठियां और जन-सम्पर्क अभियान चलाए जा रहे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ

भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में इस अभियान को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दलित और शोषित वर्ग के बीच संत रविदास का अगाध आध्यात्मिक और सामाजिक प्रभाव है। भाजपा इस देशव्यापी आयोजन के जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक अपनी पहुंच को और अधिक मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि संत रविदास किसी एक जाति या वर्ग के तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे संपूर्ण मानवता के संत थे। उनके विचार आज के आधुनिक भारत और 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में प्रासंगिक हैं। यह अभियान केवल राजनीतिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक न्याय के समन्वय का एक बड़ा वैचारिक प्रयास है, जो देश के सामाजिक ताने-बाने को और अधिक प्रगाढ़ करने का कार्य करेगा।