खरीफ विपणन मौसम में सीएमआर जमा करने में लापरवाही पर सहकारिता विभाग सख्त: बकायेदारों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई, पैक्सों की भौतिक जाँच के आदेश से मचा हड़कंप

बिहार में किसानों के धान की खरीद और उसके एवज में सरकार को चावल (कस्टम मिल्ड राइस - CMR) उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले पैक्सों (Primary Agriculture Credit Societies) पर सहकारिता विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खरीफ विपणन मौसम (Kharif Marketing Season) के तहत मिलर्स और पैक्सों द्वारा समय पर सीएमआर जमा नहीं किए जाने को लेकर विभाग ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।

सहकारिता विभाग के इस कड़े निर्देश के बाद राज्य के सभी जिलों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने सभी प्रखंड सहकारिता प्रसार अधिकारियों (BCO) को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बकायेदार पैक्सों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करें और चावल जमा न करने वाले पैक्स अध्यक्षों पर तत्काल कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

क्या है पूरा मामला? (सीएमआर जमा करने में देरी और विभागीय नाराजगी)

सरकार हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से धान की खरीद करती है और उसे मिलों में कुटवाकर चावल (सीएमआर) भारतीय खाद्य निगम (FCI) या राज्य खाद्य निगम (SFC) के गोदामों में जमा करवाती है।

समय सीमा का उल्लंघन: खरीफ विपणन मौसम के अंतर्गत पैक्सों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर धान के समतुल्य सीएमआर सरकार को वापस करना होता है। लेकिन, कई पैक्सों द्वारा धान उठाव और मिलिंग के बाद भी चावल समय पर गोदामों में जमा नहीं कराया जा रहा है।

विभाग की कड़ी चेतावनी: सहकारिता विभाग के उच्च अधिकारियों ने पाया है कि कुछ पैक्सों की लापरवाही के कारण सरकार का चावल वितरण और भंडारण लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। इसी के मद्देनजर विभाग ने अब नरमी बरतने से इनकार करते हुए आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

भौतिक जाँच के आदेश: सभी प्रखंड सहकारिता अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे मैदान में उतरकर बकायेदार पैक्सों के गोदामों की जाँच करें तथा यह पता लगाएं कि धान कहाँ और किस स्थिति में रखा हुआ है।

पैक्सों पर शिकंजा और प्रशासनिक कार्रवाई के आयाम

सहकारिता विभाग के इस कड़े कदम से पैक्स प्रबंधकों और अध्यक्षों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। विभाग द्वारा निम्नलिखित स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है:

लाइसेंस रद्दीकरण की चेतावनी: जो पैक्स जानबूझकर सीएमआर जमा करने में हीला-हवाली कर रहे हैं, उनके सहकारिता समितियों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, उनके खिलाफ नीलाम पत्र वाद (Certificate Case) दर्ज करने की भी तैयारी है।

आपराधिक मुकदमे का खतरा: सरकारीा राशि और धान के गबन या दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए दोषी पैक्स प्रबंधकों और अध्यक्षों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।

वित्तीय लेन-देन पर रोक: बकायेदार पैक्सों के आगामी वित्तीय लेन-देन, अनुदान और नए सत्र के धान खरीद के कोटे पर तब तक रोक लगा दी जाएगी जब तक वे पुराना सीएमआर शत-प्रतिशत जमा नहीं कर देते।

कृषि व्यवस्था और सहकारिता पर इसका प्रभाव

सरकार की यह सख्ती किसानों के हितों की रक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुचारू बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।

पारदर्शिता की बहाली: समय पर सीएमआर जमा होने से सरकार के पास खाद्यान्न का सही आकलन रहता है, जिससे गरीबों के बीच राशन वितरण व्यवस्था में कोई बाधा नहीं आती।

पैक्सों की जवाबदेही तय: इस कार्रवाई से पैक्स स्तर पर भ्रष्टाचार और सुस्ती पर अंकुश लगेगा, क्योंकि अब तक कई पैक्स धान खरीद में हेरफेर कर चावल जमा करने से बचते रहे हैं।

खरीफ विपणन मौसम के तहत सीएमआर जमा करने में लापरवाही बरतने वाले पैक्सों के खिलाफ सहकारिता विभाग का यह सख्त रुख समय की एक बड़ी माँग है। प्रखंड सहकारिता अधिकारियों द्वारा बकायेदार पैक्सों की भौतिक जाँच और ताबड़तोड़ कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकारी धन और अनाज के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कदम से जहाँ एक ओर व्यवस्था में सुधार आएगा, वहीं दूसरी ओर पैक्स संचालन में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।