खड़गपुर के मारवाड़ी टोला मैरिज हॉल में गूंजे महान गायक मोहम्मद रफी के सदाबहार गीत: 'याद-ए-रफ़ी' संगीतमय संध्या में बिहार और बंगाल के कलाकारों ने दी सुरीली श्रद्धांजलि, झूम उठे संगीतप्रेमी
भारतीय संगीत जगत के आसमान पर अमिट चमकने वाले अमर गायक मोहम्मद रफी की सुरीली यादों और उनकी अनमोल कला को समर्पित एक भव्य संगीतमय संध्या का आयोजन बिहार के मुंगेर जिले के खड़गपुर स्थित मारवाड़ी टोला मैरिज हॉल में किया गया। 'महान गायक मो. रफ़ी की याद' शीर्षक के तहत आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में बिहार और पश्चिम बंगाल के कई प्रसिद्ध और नामचीन कलाकारों ने शिरकत की। इन कलाकारों ने अपनी जादुई आवाज़ और सुरीले नग्मों के जरिए स्वर्गीय मोहम्मद रफी साहब को अनूठी और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सावन की सुहानी शाम और रफी साहब के रूहानी गीतों के संगम ने खड़गपुर के संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हर शख्स सुरों की इस महफिल में डूब नजर आया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कलाकारों ने एक के बाद एक रफी साहब के गाए हुए वे सदाबहार गीत पेश किए, जो आज भी करोड़ों दिलों की धड़कन बने हुए हैं।
क्या है पूरा मामला? (रफी साहब की याद में सजी सुरीली महफिल की रूपरेखा)
संगीत प्रेमियों और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस संध्या का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत के महान संगीत इतिहास से जोड़ना और रफी साहब के बेजोड़ योगदान को याद करना था।
बिहार और बंगाल के कलाकारों का महासंगम: इस संगीतमय शाम की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और बिहार के विभिन्न जिलों से आए प्रख्यात गायक-गायिकाओं ने हिस्सा लिया। सभी ने अपने सुरों के जादू से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
मारवाड़ी टोला मैरिज हॉल का भव्य आयोजन: खड़गपुर के मारवाड़ी टोला स्थित मैरिज हॉल को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। मंच पर मोहम्मद रफी की बड़ी सी तस्वीर पर दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया।
सदाबहार गानों की गूंज: कार्यक्रम की शुरुआत रफी साहब के रूहानी भजन और देशभक्ति गीतों से हुई, जिसके बाद रोमांटिक और दर्द भरे नगमों का दौर शुरू हुआ। "बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है", "चाहूंगा तुम्हें सांझ सवेरे", और "मधुबन में राधिका नाचे रे" जैसे गीतों पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
कलाकारों की प्रस्तुतियाँ और दर्शकों की दीवानगी
संगीतमय संध्या के दौरान मंच पर एक के बाद एक पेश की गई प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। उपस्थित श्रोताओं की प्रतिक्रिया यह साबित कर रही थी कि रफी साहब की आवाज़ आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही जिंदा है जितनी दशकों पहले थी।
सुरीली तान और भावुक क्षण: बंगाल से आए एक प्रसिद्ध गायक ने जब रफी साहब का मशहूर दर्द भरा गीत गाया, तो पूरा सभागार कुछ पलों के लिए शांत हो गया और लोग उनकी गायकी की गहराई में खो गए। इसके बाद जब तेज गति के तराने छेड़े गए, तो युवा श्रोता भी अपनी कुर्सियों पर थिरकने लगे।
संगीतप्रेमियों का भारी जमावड़ा: खड़गपुर और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों से बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी, बुद्धिजीवी और गणमान्य लोग इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने पहुँचे थे। हॉल खचाखच भरा हुआ था और लोगों में कार्यक्रम के अंत तक गजब का उत्साह देखा गया।
युवाओं में दिखा उत्साह: इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि इसमें नई पीढ़ी के युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने माना कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें भारत की समृद्ध संगीत विरासत को नजदीक से जानने का मौका मिलता है।
आयोजकों और अतिथियों के विचार
कार्यक्रम के अंत में आयोजक समिति की ओर से सभी आगंतुक कलाकारों और अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
संगीत से जोड़ने की पहल: आयोजकों ने अपने संबोधन में कहा कि मोहम्मद रफी सिर्फ एक गायक नहीं बल्कि एक संस्था थे, जिनकी आवाज में हर जज्बे को बयां करने की ताकत थी। आज के इस तनावपूर्ण दौर में इस तरह की संगीतमय संध्याएँ मानसिक शांति और सांस्कृतिक ऊर्जा प्रदान करती हैं।
स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा: स्थानीय अतिथियों ने ऐसे आयोजनों को खड़गपुर के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहना चाहिए, ताकि कला और कलाकारों को उचित मंच मिल सके।
खड़गपुर के मारवाड़ी टोला मैरिज हॉल में आयोजित 'महान गायक मो. रफ़ी की याद' संगीतमय संध्या ने यह साबित कर दिया कि संगीत की कोई सरहद या कालसीमा नहीं होती। बिहार और बंगाल के कलाकारों द्वारा दी गई यह सुरीली श्रद्धांजलि न केवल मोहम्मद रफी साहब के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक थी, बल्कि यह खड़गपुर के सांस्कृतिक इतिहास में एक स्वर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। सावन की इस बेला में सुरों और ताल की गूंज ने हर संगीतप्रेमी के दिल को तृप्त कर दिया।