प्लाटिंग के लिए बड़ी भूमि की रजिस्ट्री में बरतें विशेष सतर्कता, रेरा आयुक्त संजय कुमार ने अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश
रियल एस्टेट क्षेत्र में अनियमितताओं को रोकने और जमीन की खरीद-बिक्री में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने सख्त रुख अपनाया है। रेरा के आयुक्त संजय कुमार ने रजिस्ट्री एवं अंचल अधिकारियों को प्लाटिंग से संबंधित बड़ी भूमि के निबंधन के मामलों में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी बड़ी भूमि के निबंधन से पहले उससे संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेजों, स्वीकृतियों और कानूनी प्रावधानों की गहन जांच की जाए। सभी पहलुओं की जांच के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आयुक्त गुरुवार को समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में जिले में रियल एस्टेट से संबंधित संचालित एवं प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति तथा अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में रियल एस्टेट परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, उनके संचालन से जुड़े मामलों और प्रस्तावित नई परियोजनाओं के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली गई। इस दौरान भूमि के उपयोग, परियोजनाओं की स्वीकृति और संबंधित नियमों के अनुपालन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
बड़ी भूमि की रजिस्ट्री पर विशेष निगरानी
रेरा आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्लाटिंग के उद्देश्य से बड़ी मात्रा में भूमि के निबंधन के मामलों को सामान्य जमीन की खरीद-बिक्री की तरह नहीं देखा जाए। ऐसे मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निबंधन से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित जमीन और प्रस्तावित परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज सही और वैध हैं।
भूमि की प्रकृति, स्वामित्व, आवश्यक अनुमति और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही निबंधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए। यदि किसी मामले में दस्तावेजों या स्वीकृतियों को लेकर संदेह हो तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार उसका सत्यापन करना चाहिए।
रेरा के इस निर्देश का उद्देश्य जमीन की खरीद-बिक्री और प्लाटिंग से जुड़े मामलों में संभावित अनियमितताओं को रोकना है। बड़ी भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विकसित कर बेचने की प्रक्रिया में कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं जुड़ी होती हैं। ऐसे में शुरुआती स्तर पर ही दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दस्तावेजों और स्वीकृतियों की जांच जरूरी
बैठक में रेरा आयुक्त ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी परियोजना से संबंधित कार्रवाई करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाए। उन्होंने स्वीकृतियों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुपालन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
रियल एस्टेट परियोजनाओं में भूमि से जुड़े दस्तावेजों के अलावा परियोजना की प्रकृति और उससे संबंधित आवश्यक अनुमतियों का महत्व होता है। यदि किसी परियोजना को विकसित करने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई हो तो भविष्य में खरीदारों और परियोजना से जुड़े अन्य पक्षों के सामने समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसी कारण रेरा की ओर से अधिकारियों को निबंधन से पहले सभी पहलुओं की जांच करने का निर्देश दिया गया है। इससे संभावित विवादों को शुरुआती चरण में रोकने में मदद मिल सकती है।
रियल एस्टेट परियोजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा
बैठक के दौरान जिले में रेरा के तहत संचालित और प्रस्तावित नए रियल एस्टेट प्रोजेक्टों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों से परियोजनाओं की प्रगति, वर्तमान स्थिति और संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में जानकारी ली गई।
संचालित परियोजनाओं के साथ-साथ प्रस्तावित नई परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह जानने का प्रयास किया गया कि परियोजनाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप आगे बढ़ रही हैं या नहीं। रेरा के दायरे में आने वाली परियोजनाओं के संबंध में आवश्यक प्रक्रियाओं और अनुपालन की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में अधिकारियों को परियोजनाओं से जुड़े मामलों में समन्वय के साथ कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रशासनिक विभागों और नियामक संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया गया।
छह अगस्त 2025 के क्षेत्र सर्वेक्षण की रिपोर्ट पर चर्चा
बैठक में छह अगस्त 2025 को जिले में किए गए क्षेत्र सर्वेक्षण के दौरान गठित तीन टीमों द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन टीमों ने विभिन्न स्थानों पर जाकर संबंधित मामलों की स्थिति का निरीक्षण किया था।
स्थलीय निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में सामने आए विभिन्न बिंदुओं को बैठक में रखा गया। अधिकारियों ने रिपोर्ट में उल्लेखित मामलों और उनकी वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
स्थल निरीक्षण किसी भी रियल एस्टेट परियोजना की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। कागजी दस्तावेजों के साथ जमीन पर परियोजना की स्थिति की जानकारी भी जरूरी होती है। इसी कारण रेरा की टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट को समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण माना गया।
तीन टीमों ने किया था स्थलीय निरीक्षण
जिले में क्षेत्र सर्वेक्षण के लिए तीन टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों ने संबंधित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर परियोजनाओं और जमीन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी जुटाई। इसके बाद टीमों ने अपने-अपने निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार किए।
बैठक में इन प्रतिवेदनों में सामने आए बिंदुओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थितियों और उनसे संबंधित आवश्यक कार्रवाई पर चर्चा की। इससे यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया कि जिन मामलों में सुधार या अतिरिक्त जांच की आवश्यकता है, उनमें किस प्रकार नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
खरीदारों के हितों की सुरक्षा पर जोर
रियल एस्टेट क्षेत्र में नियमन का एक प्रमुख उद्देश्य खरीदारों के हितों की रक्षा करना है। किसी भी जमीन या प्लाटिंग परियोजना में यदि जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता है तो भविष्य में खरीदारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए रेरा द्वारा परियोजनाओं की निगरानी और संबंधित दस्तावेजों की जांच पर जोर दिया जाता है। बड़ी भूमि की रजिस्ट्री के मामलों में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश भी इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निबंधन और परियोजना से संबंधित प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी हों। इससे जमीन से जुड़े विवादों और अनियमितताओं की संभावना को कम किया जा सकता है।
अनियोजित प्लाटिंग पर लगाम लगाने की कोशिश
बड़ी जमीन की प्लाटिंग कर उसे अलग-अलग भूखंडों के रूप में विकसित करने के मामलों में नियमन महत्वपूर्ण होता है। यदि ऐसी गतिविधियां आवश्यक स्वीकृतियों और नियमों के बिना की जाती हैं तो भविष्य में बुनियादी सुविधाओं, भूमि उपयोग और स्वामित्व से संबंधित कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
रेरा आयुक्त के निर्देश से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन बड़ी भूमि के निबंधन और प्लाटिंग से जुड़े मामलों में शुरुआती स्तर पर ही सावधानी बरतना चाहता है। दस्तावेजों की जांच और स्वीकृतियों के सत्यापन से अनियमित गतिविधियों पर रोक लगाने में सहायता मिल सकती है।
अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
समीक्षा बैठक में जिले के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें रेरा के सचिव अनिमेष पांडेय, डीएम श्रीकांत शास्त्री, डीडीसी आकाश चौधरी, नगर आयुक्त सोमेश बहादुर माथुर, सदर एसडीओ अश्विनी कुमार समेत अन्य अधिकारी शामिल थे।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी से रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में समन्वय की आवश्यकता भी स्पष्ट होती है। भूमि, निबंधन, नगर निकाय और नियामक व्यवस्था से संबंधित मामलों में अलग-अलग विभागों की भूमिका होती है। ऐसे में संयुक्त समीक्षा के माध्यम से समस्याओं की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है।
परियोजनाओं की नियमित समीक्षा जरूरी
रियल एस्टेट परियोजनाओं की केवल स्वीकृति के समय जांच पर्याप्त नहीं होती। परियोजनाओं की प्रगति और नियमों के अनुपालन की समय-समय पर समीक्षा भी जरूरी है। क्षेत्रीय निरीक्षण से यह जानकारी मिलती है कि जमीन पर परियोजना की वास्तविक स्थिति क्या है और कागजी रिकॉर्ड से उसका कितना मेल है।
इसी उद्देश्य से जिले में क्षेत्र सर्वेक्षण कराया गया और तीन टीमों की रिपोर्ट की समीक्षा की गई। भविष्य में भी जरूरत के अनुसार स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है।
रेरा आयुक्त संजय कुमार द्वारा बड़ी भूमि की प्लाटिंग से संबंधित रजिस्ट्री के मामलों में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और नियमों के पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निबंधन से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों, स्वीकृतियों और संबंधित प्रावधानों की गहन जांच करने को कहा है।
समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में हुई समीक्षा बैठक में जिले की संचालित और प्रस्तावित रियल एस्टेट परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। छह अगस्त 2025 के क्षेत्र सर्वेक्षण के दौरान गठित तीन टीमों द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण और उनकी रिपोर्ट में सामने आए बिंदुओं की भी समीक्षा की गई।
अब अधिकारियों के सामने चुनौती यह होगी कि बड़ी भूमि की रजिस्ट्री, प्लाटिंग और रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े मामलों में नियमों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए। दस्तावेजों की जांच, स्वीकृतियों का सत्यापन, नियमित निरीक्षण और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से अनियमितताओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है। साथ ही इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों और आम लोगों के हितों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।