बेगूसराय में एरी रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसान संगोष्ठी आयोजित, वैज्ञानिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों पर दिया गया विशेष जोर
बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले में केंद्रीय रेशम बोर्ड (Central Silk Board) की ओर से एरी रेशम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रेशम उत्पादक किसानों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को एरी रेशम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों, गुणवत्तायुक्त बीजों, वैज्ञानिक पालन-पोषण की विधियों तथा बाजार से जुड़ी नई संभावनाओं की जानकारी देना था।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि यदि वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं तो एरी रेशम उत्पादन को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। साथ ही, बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों, रोग प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
किसानों को आधुनिक तकनीकों की दी गई जानकारी
संगोष्ठी के दौरान केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों ने किसानों को एरी रेशम की खेती और कीट पालन की आधुनिक तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि समय पर बीजों का चयन, पौधों का उचित रखरखाव, स्वच्छ पालन-पोषण, तापमान और आर्द्रता का संतुलन तथा रोग नियंत्रण जैसे उपाय उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों ने किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित भाग लेने और नई तकनीकों को अपनाने की भी सलाह दी।
गुणवत्तापूर्ण बीजों के उपयोग पर विशेष जोर
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले बीज किसी भी सफल रेशम उत्पादन की पहली आवश्यकता हैं।
यदि प्रमाणित और रोगमुक्त बीजों का उपयोग किया जाए तो कीटों की मृत्यु दर कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और तैयार रेशम की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। किसानों को केवल अधिकृत संस्थानों से ही बीज खरीदने की सलाह दी गई।
तकनीकी मार्गदर्शन से बढ़ेगी किसानों की आय
विशेषज्ञों ने बताया कि केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
केंद्रीय रेशम बोर्ड समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराता है, ताकि वे आधुनिक उत्पादन प्रणाली को आसानी से अपना सकें।
एरी रेशम उत्पादन की संभावनाएं
कार्यक्रम में बताया गया कि एरी रेशम की देश और विदेश दोनों बाजारों में लगातार मांग बढ़ रही है।
इसकी विशेषता यह है कि इससे तैयार होने वाले वस्त्र पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और आरामदायक होते हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए एरी रेशम उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक अच्छा स्रोत बन सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार में जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां एरी रेशम उत्पादन के लिए अनुकूल हैं, इसलिए इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
किसानों की समस्याओं पर भी हुई चर्चा
संगोष्ठी के दौरान किसानों ने बीज उपलब्धता, तकनीकी सहायता, बाजार व्यवस्था, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से संबंधित कई सवाल उठाए।
अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा उनके समाधान के लिए विभागीय योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी।
उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी किसानों को आवश्यक तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
मूल्य संवर्धन और विपणन पर जोर
विशेषज्ञों ने किसानों को केवल रेशम उत्पादन तक सीमित न रहकर मूल्य संवर्धन (Value Addition) और बेहतर विपणन व्यवस्था पर भी ध्यान देने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि किसान स्वयं प्रसंस्करण, धागा निर्माण और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों की ओर कदम बढ़ाएं तो उन्हें अधिक लाभ मिल सकता है।
साथ ही, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और सहकारी समितियों के माध्यम से सामूहिक विपणन को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।
युवाओं और महिलाओं की भागीदारी पर बल
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि एरी रेशम उत्पादन में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
कम लागत और सीमित भूमि में शुरू होने वाला यह व्यवसाय स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सतत विकास का लिया गया संकल्प
संगोष्ठी के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने सतत रेशम विकास, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करते हुए उत्पादन बढ़ाना ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने की अपील की गई।
सरकार और केंद्रीय रेशम बोर्ड की पहल
केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को किसानों ने काफी उपयोगी बताया।
अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसान संगोष्ठियां और तकनीकी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक रेशम उत्पादन तकनीकों से जुड़ सकें।
विशेषज्ञों ने बताए सफलता के सूत्र
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को नियमित निरीक्षण, रोग नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण बीजों का उपयोग, समय पर तकनीकी सलाह और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि किसान इन सुझावों का पालन करें तो उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
बेगूसराय में केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा आयोजित किसान संगोष्ठी एरी रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीजों, रोग प्रबंधन, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। संगोष्ठी का समापन सतत रेशम विकास और किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं और विभागीय सहयोग का लाभ उठाते हैं, तो बिहार एरी रेशम उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकता है।