रूहानी सुकून और अकीदत का सैलाब; सूफी संत हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद का 399वां तीन दिवसीय उर्स कल से खानकाह-ए-आलिया शहबाजिया में होगा शुरू, हजरत अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह मोहम्मद करेंगे अध्यक्षता
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर की धरती एक बार फिर से आध्यात्मिकता, सूफीवाद, भाईचारे और रूहानी रोशनी से सराबोर होने जा रही है। शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में शुमार खानकाह-ए-आलिया शहबाजिया में महान सूफी संत हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद रहमतुल्लाह अलैह का 399वां सालाना उर्स मुबारक (399th Urs Mubarak) अत्यंत धूमधाम, अकीदत और शानो-शौकत के साथ आयोजित होने जा रहा है। यह तीन दिवसीय रूहानी अनुष्ठान कल यानी 31 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलेगा। इस पावन और ऐतिहासिक आयोजन की सदारत (अध्यक्षता) खानकाह के सज्जादानशीं, आध्यात्मिक मर्मज्ञ हजरत अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह मोहम्मद द्वारा की जाएगी। इस तीन दिवसीय आयोजन को लेकर देश-विदेश और राज्य के विभिन्न कोनों से अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) के भागलपुर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
क्या है इस उर्स का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व?
भागलपुर के मानिक सरकार स्थित खानकाह-ए-आलिया शहबाजिया का इतिहास सदियों पुराना है और यह सूफी परंपरा का एक प्रमुख केंद्र रहा है:
मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम: हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद साहिब एक महान संत थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में समाज के हर वर्ग के लोगों को प्रेम, भाईचारा, शांति और मानवता का संदेश दिया था। उनकी दरगाह पर आने वाले हर शख्स को मानसिक शांति और रूहानी सुकून का अहसास होता है।
399 साल की परंपरा: हर साल उनके विरसा-ए-पाक (उर्स) के मौके पर आयोजित होने वाला यह पर्व न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भागलपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द का सबसे बड़ा प्रतीक भी माना जाता है। इस वर्ष यह 399वां उर्स है, जो अपने आप में इस बात का गवाह है कि सदियों बाद भी संत की दी हुई शिक्षाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं।
तीन दिवसीय उर्स के दौरान होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान
31 जुलाई से शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय भव्य आयोजन के लिए खानकाह परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया है और आने वाले मेहमानों के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं:
प्रथम दिन (31 जुलाई): उर्स की शुरुआत कुरानखानी और विशेष दुआओं के साथ होगी। देश में अमन, चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थनाएं की जाएंगी। शाम के वक्त महफिल-ए-समां (कव्वाली और सूफियाना कलाम) का आयोजन होगा, जिसमें देश के नामचीन कव्वाल अपनी सुरीली आवाज़ में सूफी कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।
द्वितीय दिन (1 अगस्त): इस दिन सूफी संत के मजार-ए-मुबारक पर चादरपोशी और गुलपोशी का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो जाएगा। बिहार के कोने-कोने से आने वाले राजनीतिक, सामाजिक हस्तियों के साथ-साथ आम और खास लोग मजार पर चादर चढ़ाकर दुआ मांगेंगे। लंगर का भी विशेष आयोजन रहेगा, जिसमें हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे।
तृतीय दिन (2 अगस्त - कुल की रस्म): उर्स के अंतिम दिन यानी 2 अगस्त को 'कुल की रस्म' अदा की जाएगी। इस दौरान विशेष कुल शरीफ पढ़ा जाएगा और अंत में पूरी कायनात की सलामती के लिए देश के जाने-माने आलिम-ए-दीन और सज्जादानशीं दुआ मांगेंगे। इसी के साथ तीन दिवसीय इस रूहानी जश्न का समापन होगा।
अध्यक्षता संभाल रहे हजरत अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह मोहम्मद का संदेश
इस ऐतिहासिक आयोजन की अध्यक्षता कर रहे खानकाह के सज्जादानशीं हजरत अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह मोहम्मद ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा है कि "सूफी संतों की दरगाहें किसी खास मजहब की नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रूहानी सुकून का केंद्र होती हैं।" उन्होंने अपील की है कि लोग आपसी मतभेदों को भुलाकर इस उर्स में शामिल हों और हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद के बताए हुए रास्ते पर चलकर देश और समाज में शांति व सौहार्द कायम रखने का संकल्प लें।
प्रशासनिक तैयारियां और शहर में उमड़ी भीड़
उर्स के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और खानकाह प्रबंधन कमेटी द्वारा सुरक्षा और यातायात के कड़े इंतजाम किए गए हैं:
यातायात और सुरक्षा व्यवस्था: भीड़भाड़ वाले इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई है ताकि बाहर से आने वाले जायरीन (श्रद्धालुओं) को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
जायरीनों का स्वागत: भागलपुर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से लेकर खानकाह परिसर तक विशेष स्वागत शिविर लगाए गए हैं, जहां अकीदतमंदों की सहायता के लिए वालंटियर मुस्तैद हैं।
भागलपुर की सरज़मीन पर आयोजित होने जा रहा सूफी संत हजरत मौलाना शहबाज मोहम्मद का यह 399वां उर्स महज एक उर्स नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता, प्रेम और अध्यात्म का महाकुंभ है। हजरत अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह मोहम्मद की सदारत में होने वाला यह आयोजन एक बार फिर यह साबित कर देगा कि इंसानियत और मुहब्बत की ताकत से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। तीन दिनों तक चलने वाले इस रूहानी जश्न में भाग लेने के लिए पूरा शहर अब पूरी तरह तैयार है।