सुल्तानगंज में भक्तिमय हुआ गंगा तट नई सीढ़ी घाट और नमामि गंगे घाट पर भव्य महाआरती का आयोजन, पंडित संजीव झा के मंत्रोच्चार से गूंजा कांवरिया क्षेत्र
भागलपुर: मोक्षदायिनी और पावन मां गंगा की आराधना की प्राचीन और अलौकिक संस्कृति को जीवंत रखते हुए बिहार के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक शहर सुल्तानगंज में बुधवार को एक भव्य और दिव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। गंगा तट स्थित नई सीढ़ी घाट और नमामि गंगे घाट पर संध्या बेला में मां गंगा की महाआरती का आयोजन किया गया। गोधूली बेला के इस मनोरम और आध्यात्मिक क्षण में शहर के तमाम प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं, स्थानीय दुकानदारों और दूर-दराज से पहुंचे शिव भक्तों व कांवरियों ने भारी संख्या में शिरकत की। पंडित संजीव झा के आचार्यत्व और कुशल संचालन में हुए इस वैदिक मंत्रोच्चार व आरती के दौरान पूरा उत्तर वाहिनी गंगा तट भक्ति रस में सराबोर नजर आया।
गोधूली बेला का मनोरम दृश्य और उमड़ा जनसैलाब
शाम ढलते ही सुल्तानगंज के गंगा घाटों का नजारा पूरी तरह से बदला हुआ और किसी बड़े धार्मिक पर्व जैसा प्रतीत होने लगा:
दीयों की रोशनी से जगमगा उठा तट: नई सीढ़ी घाट और नमामि गंगे घाट पर हजारों की संख्या में प्रज्वलित किए गए दीपों की टिमटिमाती रोशनी ने गंगा के शांत जल को एक स्वर्णमयी आमाप प्रदान किया। घाट की सीढ़ियों पर कतारबद्ध बैठे श्रद्धालुओं के चेहरों पर अद्भुत शांति और आस्था का भाव स्पष्ट झलक रहा था।
कांवरियों की विशेष उपस्थिति: श्रावणी मेला हो या सामान्य दिन, सुल्तानगंज हमेशा से कांवरियों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र रहा है। बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले या यात्रा पूर्ण कर लौटे कांवरियों ने भी इस महाआरती में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मां गंगा के चरणों में शीश नवाया।
हर-हर गंगे के जयकारे: जैसे ही आरती की लौ प्रज्वलित हुई, पूरा घाट "हर-हर गंगे", "माता गंगा की जय" और "बम-बम भोले" के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। इस अद्भुत दृश्य ने वहां मौजूद हर शख्स को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पंडित संजीव झा के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार और अनुष्ठान
महाआरती के इस पवित्र अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण प्रख्यात पुरोहित पंडित संजीव झा द्वारा कराया गया वैदिक और शास्त्रीय विधान रहा:
शास्त्रीय विधि से मां की वंदना: पंडित संजीव झा ने विधिवत रूप से शंखनाद, डमरू की गूंज और घंटी-घड़ियालों की थाप के बीच मां गंगा की षोडशोपचार पूजा संपन्न कराई।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश: अपने संबोधन में आचार्य संजीव झा ने कहा कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन चेतना की प्राणवायु हैं। गंगा तट पर होने वाली यह महाआरती समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आपसी प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। उन्होंने कांवरियों और स्थानीय लोगों से गंगा को निर्मल और अविरल बनाए रखने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया।
समाज के सभी वर्गों की सहभागिता और सामाजिक समरसता
इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग और तबके के लोगों ने एक मंच पर आकर हिस्सा लिया:
व्यापारी से लेकर आम नागरिक तक: स्थानीय व्यापार मंडल, बुद्धिजीवी वर्ग, युवा संगठनों और महिला श्रद्धालुओं ने कंधे से कंधा मिलाकर इस महाआरती को सफल बनाया।
अतिथि सत्कार और सुरक्षा व्यवस्था: स्थानीय स्वयंसेवकों और प्रशासन के सहयोग से घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बैठने और पूजन की विशेष व्यवस्था की गई थी, जिससे किसी को भी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
सुल्तानगंज के नई सीढ़ी घाट और नमामि गंगे घाट पर आयोजित मां गंगा की यह महाआरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं थी, बल्कि यह भागलपुर की सांस्कृतिक समृद्धि और अटूट आस्था का एक जीवंत दस्तावेज है। पंडित संजीव झा के नेतृत्व में संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने देश-विदेश से आने वाले कांवरियों और पर्यटकों के मन पर अमिट छाप छोड़ी है। इस प्रकार के आयोजन न केवल हमारी प्राचीन विरासत को संरक्षित करते हैं, बल्कि समाज को एक आध्यात्मिक सूत्र में पिरोने का भी कार्य करते हैं।