मुजफ्फरपुर के तीन प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों का शानदार उद्घाटन लेकिन शिक्षकों की गैर-मौजूदगी पर उठे गंभीर सवाल, बीआरएबीयू का आश्वासन- दो दिनों में होगी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से उच्च शिक्षा के प्रसार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जिले के तीन अलग-अलग प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों का भव्य उद्घाटन किया गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा अपने ही नजदीक मिल सकेगी। हालांकि, उद्घाटन के इस जश्न के बीच एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है—जब कॉलेज में शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं, तो कक्षाएं कैसे संचालित होंगी? उद्घाटन के दौरान शिक्षकों की अनुपस्थिति ने स्थानीय शिक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालय प्रशासन की तैयारियों पर कई बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद अब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) हरकत में आया है।

क्या है पूरा मामला? ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहल

यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के उन तीन ग्रामीण प्रखंडों से जुड़ा है, जहां लंबे समय से डिग्री कॉलेज न होने के कारण छात्र-छात्राओं को ग्रेजुएशन या आगे की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता था।

नए कॉलेजों का उद्घाटन: क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए इन तीन प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों के भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद इनका आधिकारिक उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, शिक्षा प्रेमी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

छात्रों में उत्साह: अपने ही प्रखंड में कॉलेज खुल जाने से स्थानीय छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा था। उन्हें उम्मीद थी कि अब बिना किसी परेशानी के उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी।

उद्घाटन के दिन सन्नाटा: शिक्षकों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

उद्घाटन का उत्साह तो अपनी जगह था, लेकिन जब जमीनी हकीकत पर नजर डाली गई तो एक बड़ी प्रशासनिक खामी सामने आई। इन नए कॉलेजों में उद्घाटन के समय भी एक भी नियमित शिक्षक की पदस्थापना या उपस्थिति नहीं दिखाई दी।

कैसे चलेंगी कक्षाएं?: उद्घाटन के मौके पर मौजूद लोगों और बुद्धिजीवियों के मन में यह सवाल सबसे पहले आया कि जब कॉलेज में पढ़ाने के लिए प्रोफेसर या शिक्षक ही नहीं हैं, तो छात्र कक्षाओं में क्या करेंगे और उनकी पढ़ाई कैसे आगे बढ़ेगी?

भवन तैयार, पर पढ़ाई अधूरी: कई जानकारों का कहना है कि सिर्फ भवनों का उद्घाटन कर देने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधर सकता। जब तक वहां बुनियादी शैक्षणिक अमला यानी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी तैनात नहीं किए जाते, तब तक इन कॉलेजों का खुलना सिर्फ कागजी साबित होगा।

BRABU प्रशासन की सफाई और दो दिनों में प्रतिनियुक्ति का वादा

इन नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की गैर-मौजूदगी और बढ़ते सवालों के बाद भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया।

विश्वविद्यालय का आश्वासन: बीआरएबीयू के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि कॉलेजों के विधिवत संचालन को लेकर विश्वविद्यालय पूरी तरह गंभीर है।

दो दिनों का अल्टीमेटम: विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह बयान आया है कि प्रक्रियागत औपचारिकताओं को पूरा करते हुए अगले दो दिनों के भीतर इन नए कॉलेजों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) कर दी जाएगी, ताकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए।

निष्कर्ष और छात्रों की उम्मीदें

मुजफ्फरपुर के इन तीन नए डिग्री कॉलेजों का खुलना ग्रामीण उच्च शिक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते प्रशासनिक अमला अपनी जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करे। फिलहाल छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय के उस आश्वासन पर टकटकी लगाए बैठे हैं, जिसमें दो दिनों के भीतर शिक्षकों की तैनाती की बात कही गई है। यदि समय रहते इन कॉलेजों में प्रोफेसरों की बहाली या प्रतिनियुक्ति नहीं होती है, तो यह उद्घाटन केवल एक राजनीतिक या औपचारिकता बनकर रह जाएगा, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है।