बनगांव के ऐतिहासिक गोसाईजी कुटी परिसर स्थित लक्ष्मेश्वर नाथ महादेव मंदिर में सावन मास पर विशेष श्रावणी श्रृंगार और रुद्राभिषेक का भव्य शुभारंभ; पहले दिन भगवान शिव के अलौकिक स्वरूप के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

हिंदू धर्म में आस्था और आराधना के सबसे पवित्र माह 'सावन' की शुरुआत के साथ ही पूरा इलाका हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा है। इसी कड़ी में सहरसा जिले के प्रसिद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनगांव के गोसाईजी कुटी परिसर में स्थित प्राचीन लक्ष्मेश्वर नाथ महादेव मंदिर में सावन माह के पावन अवसर पर विशेष श्रावणी श्रृंगार पूजा और रुद्राभिषेक का भव्य एवं धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गया है।

सावन के पहले दिन से ही मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। आयोजन के पहले दिन भगवान शिव का अत्यंत मनमोहक और भव्य श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुँचे। विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुए इस अनुष्ठान से पूरे क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है।

क्या है पूरा मामला? (धार्मिक अनुष्ठान और मंदिर की महत्ता)

बनगांव का गोसाईजी कुटी परिसर क्षेत्र की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक अहम हिस्सा माना जाता है। यहाँ स्थित लक्ष्मेश्वर नाथ महादेव मंदिर में सावन मास के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की पुरानी परंपरा रही है।

सावन के पहले दिन विशेष अनुष्ठान: सावन के पहले दिन सुबह से ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। पुरोहितों और आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ का दुग्ध अभिषेक, गंगाजल अभिषेक और विधि-विधान से पूजन किया गया।

भव्य और आकर्षक श्रृंगार: पहले दिन भगवान शिव का बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भस्म और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों के साथ-साथ विशेष आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। भगवान शिव का यह रूप इतना आकर्षक था कि दर्शन करने वाले हर भक्त की आँखें श्रद्धा से नम हो गईं।

रुद्राभिषेक का महात्म्य: मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि सावन माह के पूरे एक महीने तक यहाँ प्रतिदिन अलग-अलग यम और नियमों के तहत भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा, जिसमें स्थानीय श्रद्धालु बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

भक्तों का उमड़ा जनसैलाब और व्यवस्थाएँ

लक्ष्मेश्वर नाथ महादेव मंदिर में श्रावणी श्रृंगार और रुद्राभिषेक के पहले दिन की पूजा देखने और भाग लेने के लिए आसपास के दर्जनों गाँवों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँचे।

भक्ति में सराबोर वातावरण: सुबह से ही मंदिर परिसर में 'बम-बम भोले' और 'ॐ नमः शिवाय' के जयकारे गूंजने लगे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सभी में भगवान शिव के दर्शन को लेकर गजब का उत्साह देखा गया।

कतारबद्ध होकर दर्शन: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और स्थानीय स्वयंसेवकों ने महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की, ताकि सभी लोग सुगमता से बाबा के दर्शन और जलाभिषेक कर सकें।

प्रसाद वितरण और भजन-कीर्तन: पूजा-अर्चना के उपरांत मंदिर परिसर में भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। शाम के वक्त मंदिर परिसर में आयोजित भजन-कीर्तन और शिव महिमा गान ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक

बनगांव के गोसाईजी कुटी परिसर में आयोजित होने वाला यह श्रावणी महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का भी एक बड़ा केंद्र है।

पीढ़ियों पुरानी परंपरा: बुजुर्गों का मानना है कि गोसाईजी कुटी परिसर में स्थित लक्ष्मेश्वर नाथ महादेव मंदिर में सावन के महीने में पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और क्षेत्र में सुख-शांति बनी रहती है।

युवाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी: इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं की टीम विशेष रूप से सक्रिय नजर आ रही है। साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में युवा स्वयंसेवक पूरी निष्ठा से अपनी सेवा दे रहे हैं।

बनगांव के गोसाईजी कुटी परिसर स्थित लक्ष्मेश्वर नाथ महादेव मंदिर में सावन माह के अवसर पर शुरू हुआ विशेष श्रावणी श्रृंगार और रुद्राभिषेक का यह पावन आयोजन क्षेत्र के आध्यात्मिक परिवेश को नई ऊर्जा दे रहा है। पहले दिन भगवान शिव के भव्य श्रृंगार और रुद्राभिषेक के साथ हुए इस श्रीगणेश से यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी पूरा महीना भक्ति, आराधना और उत्सव के रंग में रंगा रहेगा। दूर-दराज से आ रहे शिवभक्त इस पावन अनुष्ठान का हिस्सा बनकर धन्य महसूस कर रहे हैं।