ताड़र और बोडापाठकडीह पंचायत में आयोजित हुए भव्य जन-सहयोग शिविर; नल-जल, सड़क और पेंशन से जुड़ी समस्याओं पर ग्रामीणों ने दिए आवेदन, अधिकारियों ने दिया त्वरित निस्तारण का भरोसा

भागलपुर/सन्हौला (संवाद सूत्र): ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने और आम जनता की छोटी-छोटी समस्याओं का उनके घर के पास ही त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन का विशेष अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड के अंतर्गत आने वाली ताड़र एवं बोडापाठकडीह पंचायत में विशेष जन-सहयोग शिविर (जनता दरबार) का भव्य आयोजन किया गया। शिविर में प्रखंड और अंचल स्तर के तमाम प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति ने ग्रामीणों को अपनी समस्याएं खुलकर रखने का हौसला दिया। इन दोनों पंचायतों में लगे शिविरों के दौरान नल-जल योजना की बदहाली, टूटी सड़कों, जलजमाव, प्रधानमंत्री आवास योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़ी दर्जनों शिकायतें सामने आईं। अधिकारियों ने एक-एक आवेदन को गंभीरता से सुनते हुए कई मामलों का मौके पर ही निष्पादन किया और शेष बचे मामलों के लिए संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए।

क्यों पड़ी सन्हौला की इन पंचायतों में शिविर की जरूरत?

ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने और जनता की पहुंच सीधे अधिकारियों तक बनाने के लिए प्रशासन ने यह राह चुनी है:

दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति: सन्हौला के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अक्सर छोटे-छोटे कामों—जैसे राशन कार्ड में नाम जुड़वाना, जमीन का म्यूटेशन कराना या पेंशन चालू करवाना—के लिए प्रखंड मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य 'सरकार आपके द्वार' की तर्ज पर जनता को उनके ही क्षेत्र में राहत मुहैया कराना है।

विकास योजनाओं की जमीनी पोल: ताड़र और बोडापाठकडीह जैसी पंचायतों में पिछले कुछ समय से स्थानीय नागरिकों द्वारा विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायतें मिल रही थीं, जिनका मौके पर संज्ञान लेना प्रशासनिक रूप से बेहद जरूरी हो गया था।

ताड़र पंचायत शिविर: नल-जल और पेंशन के मामलों का अंबार

ताड़र पंचायत भवन या निर्धारित शिविर स्थल पर सुबह से ही ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी:

पेयजल संकट और नल-जल योजना: शिविर में सबसे अधिक शिकायतें हर घर नल का जल योजना के ठप पड़े होने को लेकर आईं। ग्रामीणों ने बताया कि महीनों से पाइपलाइन टूटी पड़ी है और उन्हें शुद्ध पेयजल के लिए निजी चापाकालों या दूरदराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

पेंशन और राशन कार्ड की फरियाद: बुजुर्ग महिलाओं और विधवाओं ने वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन न मिलने की शिकायत दर्ज कराई। अंचल और विकास मित्रों की टीम ने मौके पर ही कई मामलों के दस्तावेजों की जांच कर उन्हें प्रक्रिया में लिया।

बोडापाठकडीह पंचायत शिविर: सड़क, कीचड़ और आवास योजना पर चर्चा

बोडापाठकडीह पंचायत में आयोजित शिविर का माहौल भी कुछ ऐसा ही रहा, जहां ग्रामीण अपनी समस्याओं का पुलिंदा लेकर पहुंचे थे:

सड़क और जलजमाव की समस्या: स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया कि पंचायत के कई वार्डों में पक्की सड़कें न होने के कारण बारिश के दिनों में भारी कीचड़ हो जाता है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।

आवास योजना की किस्तें रुकी: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहली या दूसरी किस्त मिलने के बावजूद कई लाभुकों के मकान अधूरे पड़े हैं, जिसकी जांच कराने की मांग ग्रामीणों ने जोर-शोर से उठाई।

अधिकारियों का रुख: मौके पर सुनवाई और सख्त निर्देश

शिविर में मौजूद विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों की एक-एक बात को बहुत ही गौर से सुना:

ऑन-स्पॉट समाधान: जिन मामलों में छोटे-मोटे कागजी सुधार या सत्यापन की जरूरत थी, उन्हें शिविर में ही संबंधित कर्मियों को सौंपकर तुरंत हल कराया गया।

समय-सीमा तय: अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जो आवेदन बड़े तकनीकी या वित्तीय मामलों से जुड़े हैं, उनकी जांच के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और एक निश्चित समय-सीमा के भीतर उनका निपटारा कर दिया जाएगा।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और उम्मीदें

ताड़र और बोडापाठकडीह के ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारियों का खुद चलकर पंचायत तक आना एक सकारात्मक कदम है:

राहत की उम्मीद: ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इस बार केवल कागजी आश्वासन नहीं मिलेगा, बल्कि धरातल पर भी काम दिखाई देगा। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो वे आगे भी अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

सन्हौला प्रखंड के ताड़र और बोडापाठकडीह पंचायतों में आयोजित ये जन-सहयोग शिविर प्रशासन की सक्रियता और जनहित के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। नल-जल, सड़क, पेंशन और आवास जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदनों पर प्रशासनिक अमले की यह मुस्तैदी यदि इसी तरह जारी रही, तो ग्रामीण विकास की रफ्तार को नई गति मिलेगी और आम आदमी का जीवन अधिक सुगम हो सकेगा।