'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा; ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर मुख्य बाजारों तक गूंजे 'भारत माता की जय' के नारे
अकबरनगर/भागलपुर (विशेष संवाददाता): देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व के ठीक पहले पूरे देश में राष्ट्रप्रेम की जो लहर दौड़ रही है, उसका जीवंत और प्रेरणादायी नजारा बिहार के भागलपुर जिले के अकबरनगर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला। केंद्र सरकार और जिला प्रशासन के आह्वान पर चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत बुधवार को अकबरनगर में एक विशाल, भव्य और ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में अकबरनगर मुख्य बाजार से लेकर दर्जनों ग्रामीण इलाकों के महिला-पुरुषों, युवाओं, स्कूली बच्चों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हाथों में विशाल तिरंगा झंडा थामे और देशप्रेम के तराने गाते हुए जब यह कारवां आगे बढ़ा, तो पूरा इलाका तिरंगे के रंगों और देशभक्ति की धुनों से सराबोर हो गया।
अकबरनगर बाजार से शुरू हुआ यात्रा का कारवां और रूट
बुधवार की सुबह से ही अकबरनगर के मुख्य बाजार और रेलवे स्टेशन परिसर के आसपास का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा था। चारों तरफ भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे गूंज रहे थे:
विशाल तिरंगे के साथ युवाओं का जोश: यात्रा की शुरुआत अकबरनगर के मुख्य चौक-चौराहों से की गई, जहां युवाओं की टोली हाथों में कई फीट लंबा राष्ट्रीय ध्वज लेकर सबसे आगे चल रही थी। उनके चेहरों पर देश के प्रति अटूट सम्मान और गर्व का भाव साफ झलक रहा था।
ग्रामीण अंचलों तक गूंज: यह तिरंगा यात्रा सिर्फ मुख्य बाजार तक सीमित नहीं रही, बल्कि अकबरनगर से होते हुए महेंद्रीपुर, भवनाथपुर, पैन और आसपास के कई अन्य गांवों के अंदरूनी हिस्सों से भी गुजरी। ग्रामीण सड़कों पर जब हाथों में तिरंगा थामे लोगों का हुजूम निकला, तो ग्रामीण इलाकों के लोगों ने भी अपने घरों की छतों और दरवाजों पर आकर इस यात्रा का जोरदार स्वागत किया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य: "हर घर पर फहराए राष्ट्रीय ध्वज"
इस तिरंगा यात्रा का मुख्य संदेश हर नागरिक के दिल में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भाव जगाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'हर घर तिरंगा' के सपने को धरातल पर उतारना था:
घर-घर जाकर जागरूकता: यात्रा में शामिल स्वयंसेवकों और युवाओं ने केवल नारे ही नहीं लगाए, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले हर गांव, हर टोले और हर घर के पास रुककर लोगों को इस बात के लिए जागरूक किया कि वे आगामी 15 अगस्त को अपने घरों की छतों पर ससम्मान तिरंगा जरूर फहराएं।
तिरंगे के प्रति सम्मान का संदेश: वक्ताओं और यात्रा का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोगों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियमों और उसके प्रति बरते जाने वाले सम्मान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। ग्रामीणों को समझाया गया कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है, इसलिए इसका रखरखाव पूरी गरिमा के साथ किया जाना चाहिए।
स्कूली बच्चों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
इस भव्य तिरंगा यात्रा की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की:
नन्हे बच्चों में दिखा गजब का उत्साह: स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं हाथों में छोटे-छोटे तिरंगे झंडे लेकर इस पदयात्रा में शामिल हुए। उनके चेहरों पर देशभक्ति का जो उल्लास था, वह देखने लायक था। बच्चे पूरे रास्ते देश भक्ति के गीत गाते हुए चल रहे थे।
महिलाओं और बुजुर्गों की उपस्थिति: बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने भी इस यात्रा में हिस्सा लिया। माताओं और बहनों ने घरों की खिड़कियों और छतों से इस यात्रा पर पुष्प वर्षा कर तिरंगे का अभिवादन किया। बुजुर्गों ने युवाओं के इस जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी में देश के प्रति समर्पण की भावना मजबूत होती है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की मुस्तैदी
इस विशाल जनसैलाब और यात्रा के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर स्थानीय प्रशासन और अकबरनगर थाना की पुलिस पूरी तरह मुस्तैद नजर आई:
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: यात्रा के रूट पर किसी भी प्रकार की असुविधा या ट्रैफिक जाम से बचने के लिए पुलिस बल के जवानों को जगह-जगह तैनात किया गया था। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस की टीम लगातार यात्रा के साथ-साथ चल रही थी ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रहे।
अनुशासन की मिसाल: यात्रा में शामिल सभी लोगों ने उच्च स्तर का अनुशासन बनाए रखा। किसी भी अप्रिय घटना के बिना यह यात्रा बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से अपने तय पड़ाव पर संपन्न हुई।
ग्रामीणों और स्थानीय बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रिया
तिरंगा यात्रा के समापन के बाद अकबरनगर बाजार में एक छोटी सी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय बुद्धिजीवियों और गणमान्य लोगों ने अपने विचार रखे:
एकता का संदेश: वक्ताओं ने कहा कि तिरंगा किसी एक जाति, धर्म या वर्ग का नहीं, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की एकता और अखंडता का प्रतीक है। अकबरनगर जैसे ग्रामीण-शहरी परिवेश में इस तरह का आयोजन समाज में आपसी भाईचारे और देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करता है।
संकल्प लिया गया: सभा के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे इस स्वतंत्रता दिवस पर अपने-अपने घरों पर तिरंगा फहराएंगे और देश की प्रगति में अपना योगदान देंगे।
अकबरनगर और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत निकाली गई यह भव्य तिरंगा यात्रा यह साबित करने के लिए काफी है कि देशप्रेम की भावना महानगरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के छोटे-छोटे गांवों और कस्बों के कोने-कोने में भी उतनी ही शिद्दत के साथ धड़कती है। इस यात्रा ने अकबरनगर के हर बाशिंदे के दिल में स्वतंत्रता दिवस के जश्न को और अधिक भव्य, गौरवशाली और यादगार बना दिया है।