विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में स्वास्थ्य विभाग का हाई अलर्ट; कांवरियों के सुरक्षित और सुगम इलाज के लिए डॉक्टरों के साथ 42 एएनएम और 16 एंबुलेंस की होगी मुस्तैद तैनाती
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के सुल्तानगंज स्थित पावन उत्तरवाहिनी गंगा तट और झारखंड के देवघर जाने वाले प्रसिद्ध कांवरिया पथ पर शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सेहत और सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। लंबी पैदल यात्रा, उमस भरे मौसम और भारी भीड़ के बीच शिवभक्तों को किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या आपात स्थिति (Emergency) से तुरंत उबारने के लिए एक अत्यंत व्यापक और सुदृढ़ स्वास्थ्य कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत मेला क्षेत्र और कांवरिया मार्ग पर कुशल चिकित्सकों के साथ-साथ 42 प्रशिक्षित एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) और 16 उन्नत जीवनरक्षक एंबुलेंस की चाक-चौबंद तैनाती सुनिश्चित की गई है, जो चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं देंगी।
स्वास्थ्य सेवाओं का ताना-बाना: चप्पे-चप्पे पर रहेगी मेडिकल टीमों की नजर
श्रावणी मेले के दौरान देश के कोने-कोने से आने वाले करोड़ों कांवरिया सुल्तानगंज से पवित्र गंगा जल भरकर झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना होते हैं। इस दौरान थकावट, डिहाइड्रेशन, वायरल बुखार, पैरों में छाले, पेट की समस्याएं और उच्च रक्तचाप जैसी आम परेशानियों के साथ-साथ किसी भी आकस्मिक दुर्घटना से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है।
अस्थाई स्वास्थ्य शिविरों की स्थापना: भागलपुर से लेकर मुख्य कांवरिया पथ तक दर्जनों हाईटेक और सुसज्जित अस्थाई स्वास्थ्य शिविर (Health Camps) बनाए गए हैं। इन शिविरों में ओपीडी सेवा से लेकर प्राथमिक उपचार की सभी आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
शिफ्टवार ड्यूटियां: किसी भी समय कांवरियों को इलाज मिलने में कोई बाधा न आए, इसके लिए डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और चिकित्सा कर्मियों की ड्यूटियां तीन अलग-अलग पालियों (Shifts) में लगाई गई हैं ताकि कैंप दिन-रात अनवरत रूप से कार्य कर सकें।
42 एएनएम और मेडिकल स्टाफ की विशेष प्रतिनियुक्ति
चिकित्सीय व्यवस्था को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सिंग कर्मियों की बड़ी फौज उतारी है:
नर्सिंग सेवाओं का जिम्मा: मेला क्षेत्र और विभिन्न चिकित्सा शिविरों में कुल 42 प्रशिक्षित एएनएम की तैनाती की गई है। ये एएनएम डॉक्टरों के साथ कंधे से कंधا मिलाकर मरीजों की जांच, दवा वितरण, ड्रेसिंग (पैरों के छालों और घायलों के इलाज के लिए) तथा ग्लूकोज/लाइन चढ़ाने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।
विशेष प्रशिक्षण: ड्यूटी पर तैनात होने से पहले इन सभी चिकित्सा कर्मियों को भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन प्राथमिक उपचार और कांवरियों के साथ विनम्र व संवेदनशील व्यवहार करने के विशेष निर्देश दिए गए हैं।
16 आधुनिक एंबुलेंस और बोट एंबुलेंस की तैनाती
आपात स्थिति (Emergency) से तुरंत निपटने और गंभीर रूप से बीमार या दुर्घटनाग्रस्त श्रद्धालुओं को कम से कम समय में उच्च चिकित्सा केंद्र (Higher Center) तक पहुंचाने के लिए परिवहन और एंबुलेंस नेटवर्क को सुदृढ़ किया गया है:
16 लाइफ सेविंग एंबुलेंस: मेला क्षेत्र, सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल और प्रमुख कांवरिया मार्गों पर कुल 16 उन्नत एंबुलेंस को 24 घंटे ‘रेडी मोड’ में खड़ा किया गया है। इन एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर सपोर्ट के प्राथमिक उपकरण, स्ट्रेचर और जीवन रक्षक दवाएं हर समय उपलब्ध रहती हैं।
गंगा नदी में दो विशेष ‘बोट एंबुलेंस’: मेला क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस बार गंगा नदी के अंदर भी जल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से दो अत्याधुनिक बोट एंबुलेंस तैनात की गई हैं। नमामि गंगे घाट और पुरानी सीढ़ी घाट के पास पानी में तैरती ये बोट एंबुलेंस उन आपात स्थितियों से निपटने के लिए बनाई गई हैं यदि स्नान के दौरान कोई श्रद्धालु गहरे पानी में जाने से बेसुध होता है या डूबने की स्थिति बनती है। इन पर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ हर वक्त मौजूद रहते हैं।
कंट्रोल रूम और हायर सेंटर से कनेक्टिविटी
संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की मॉनिटरिंग के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सुल्तानगंज में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (Central Control Room) स्थापित किया गया है।
किसी भी शिविर से डॉक्टर या एएनएम द्वारा फोन पर सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम से संबंधित क्षेत्र की सबसे नजदीक वाली एंबुलेंस को तुरंत रवाना कर दिया जाता है।
गंभीर मरीजों को सुल्तानगंज अस्पताल से बेहतर इलाज के लिए तुरंत भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) या सदर अस्पताल के लिए ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्था के तहत रेफर करने का प्रावधान रखा गया है।
डाक्टरों की बड़ी टीम के साथ-साथ 42 एएनएम और 16 एंबुलेंस (बोट एंबुलेंस सहित) की यह पुख्ता तैनाती इस बात का स्पष्ट संदेश देती है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग श्रद्धालुओं की जीवन रक्षा के प्रति पूरी तरह गंभीर और सतर्क है। इन चाक-चौबंद चिकित्सा प्रबंधों के कारण इस वर्ष श्रावणी मेले में आने वाले शिवभक्तों को किसी भी चिकित्सीय आपातकाल में त्वरित और बेहतरीन सहायता मिल पा रही है, जिससे उनकी यह पावन कांवर यात्रा अधिक सुरक्षित और निर्बाध बन गई है।