डीएम अंशुल कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक; अग्निशमन, एंबुलेंस और बर्ड चेजर की उपलब्धता पर चर्चा

बिहार के सीमांचल क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित पूर्णिया हवाई अड्डे (Purnia Airport) के निर्माण और संचालन की प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में पूर्णिया हवाई अड्डे पर अग्निशमन (Fire Safety), एंबुलेंस (Ambulance) और बर्ड चेजर (Bird Chaser) जैसी अनिवार्य एवं सुरक्षात्मक सुविधाओं की उपलब्धता और पुख्ता तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। यह महत्वपूर्ण बैठक पूर्णिया के जिला पदाधिकारी (DM) अंशुल कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

इस बैठक में भारतीय वायु सेना (Air Force), भू-अर्जन विभाग, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), सिविल सर्जन (Civil Surgeon) और अन्य संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य हवाई अड्डा परिसर की सुरक्षा, विमानों के सुरक्षित परिचालन और आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारना था। आइए इस उच्चस्तरीय बैठक, इसके प्रमुख बिंदुओं, पूर्णिया एयरपोर्ट की वर्तमान स्थिति और इसके दूरगामी प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

बैठक का मुख्य एजेंडा: सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएं

किसी भी नए हवाई अड्डे के संचालन से पहले नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं का होना अनिवार्य होता है।

अग्निशमन सेवा (Fire Fighting System): हवाई अड्डा क्षेत्र में विमानों की आवाजाही के दौरान किसी भी आकस्मिक दुर्घटना से निपटने के लिए उच्च क्षमता वाले फायर टेंडर और प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मियों की तैनाती सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। बैठक में इसके सुचारू इंतजामों पर विस्तार से समीक्षा की गई।

एंबुलेंस की उपलब्धता (Medical Emergency / Ambulance): यात्रियों और हवाई अड्डा कर्मियों के स्वास्थ्य आपातकाल को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस एंबुलेंस और चिकित्सा दल की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बर्ड चेजर की व्यवस्था (Bird Chaser): हवाई अड्डे के आसपास पक्षियों के झुंड का मंडराना विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय सबसे बड़ा खतरा माना जाता है। विमानों को पक्षियों की टक्कर (Bird Hit) से बचाने के लिए प्रभावी 'बर्ड चेजर' उपकरणों और तकनीकों की तैनाती पर विशेष जोर दिया गया।

जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक सक्रियता

पूर्णिया के जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने इस बैठक के दौरान सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हवाई अड्डा परियोजना से जुड़े सभी कार्यों को आपसी समन्वय के साथ त्वरित गति से पूरा किया जाए।

विभिन्न विभागों का समन्वय: बैठक में एयर फोर्स के अधिकारियों के साथ-साथ भू-अर्जन (Land Acquisition) और स्वास्थ्य विभाग के नुमाइंदों ने भी हिस्सा लिया। डीएम ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक सुस्ती या समन्वय की कमी न रहे।

त्वरित कार्रवाई के निर्देश: जिन बिंदुओं पर कार्य लंबित हैं या जिन्हें अंतिम रूप दिया जाना है, उनके लिए संबंधित अधिकारियों को समयसीमा के भीतर ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया गया, ताकि विमान सेवा शुरू होने की राह में कोई तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए।

पूर्णिया एयरपोर्ट परियोजना का महत्व और सीमांचल क्षेत्र का विकास

पूर्णिया से विमान सेवा शुरू होना केवल इस जिले के लिए नहीं, बल्कि पूरे कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक सौगात साबित होने जा रहा है।

बेहतर कनेक्टिविटी: इस हवाई अड्डे के चालू हो जाने से पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा और सुपौल के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल के नागरिकों को भी हवाई यात्रा की सुगम सुविधा मिलेगी।

व्यापार और आर्थिक विकास: व्यापारिक गतिविधियों, निवेश और रोजगार के नए अवसरों के सृजन के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस यह हवाई अड्डा उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा।

पूर्णिया हवाई अड्डे पर अग्निशमन, एंबुलेंस और बर्ड चेजर जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार की अध्यक्षता में हुई यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित कार्रवाई के निर्देशों से यह उम्मीद बंध गई है कि पूर्णिया से विमान सेवा शुरू होने का सपना जल्द ही वास्तविक रूप लेगा, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास को पंख लगेंगे