गंगाधाम से कच्ची सड़क तक की राह बनी जी का जंजाल; पक्की सड़क के इस बदहाल हिस्से पर चलना हुआ मुहाल, धूल फांकते और हिचकोले खाते सफर करने को मजबूर हैं आमजन और कांवरिया
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण और आस्था से जुड़े मार्गों में शुमार गंगाधाम से कच्ची सड़क की ओर जाने वाले मार्ग पर इन दिनों स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और आवागमन करने वाले राहगीरों की मुश्किलें चरम पर पहुंच चुकी हैं। गंगाधाम क्षेत्र से जब कोई यात्री कच्ची सड़क की तरफ बढ़ता है, तो उससे ठीक पहले आने वाली मुख्य पक्की सड़क का यह हिस्सा पूरी तरह से जर्जर और बदहाल स्थिति में है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई पिचिंग और जगह-जगह जलभराव व उड़ती धूल ने इस मार्ग को वाहन चालकों के लिए किसी मौत के कुएं से कम नहीं बना दिया है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले या आम दिनों में भी इस रास्ते से गुजरने वाले शिवभक्तों और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आम जनमानस में पथ निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है।
क्या है मुख्य समस्या? सड़क की बदहाली का कच्चा चिट्ठा
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों से मिली जानकारी के अनुसार, गंगाधाम से कच्ची सड़क की ओर मुड़ने वाले इस जंक्शन या मुख्य पक्की सड़क के टुकड़े की स्थिति पिछले लंबे समय से नारकीय बनी हुई है:
गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़क: सड़क पर डामर और गिट्टी का नामोनिशान मिट चुका है। वाहनों के आवागमन से यहां इतने बड़े-बड़े गड्ढे (Potholes) बन गए हैं कि जरा सी चूक होने पर वाहन पलट सकते हैं या चालक गंभीर रूप से चोटिल हो सकते हैं।
उड़ती धूल और कीचड़ का साम्राज्य: धूप के दिनों में इस टूटी हुई सड़क से गुजरने वाले वाहनों के टायरों से इतनी अधिक धूल उड़ती है कि आसपास के घरों में रहना और दुकानों को चलाना दूभर हो गया है। वहीं, हल्की बारिश होते ही इन गड्ढों में गंदा पानी भर जाता है, जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए यह पहचान पाना भी मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां।
हजारों की आबादी और कांवरियों की आवाजाही पर असर
यह मार्ग केवल स्थानीय निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है:
कांवरियों की मुख्य वैकल्पिक राह: श्रावणी मेले के दौरान या अन्य दिनों में भी सुल्तानगंज आने-जाने वाले कई श्रद्धालु और स्थानीय लोग बाईपास या वैकल्पिक रास्तों के रूप में इस मार्ग का उपयोग करते हैं। लेकिन पक्की सड़क के इस बदहाल हिस्से के कारण कांवरियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है। सिर पर काँवर लेकर चलने वाले शिवभक्तों के लिए इन पथरीले और गड्ढों भरे रास्तों पर चलना शारीरिक पीड़ा का सबब बन जाता है।
व्यापारियों और स्कूली बच्चों की मुसीबत: इस क्षेत्र में कई दुकानें और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जो सड़क पर उड़ने वाली धूल के कारण भारी नुकसान झेल रहे हैं। इसके अलावा, रोजाना स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
प्रशासनिक उदासीनता और स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा
क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित सड़क निर्माण विभागों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति: स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा कभी-कभार इन गड्ढों में केवल खानापूर्ति के लिए मिट्टी या ईंट के टुकड़े भर दिए जाते हैं, जो पहली ही बारिश या भारी वाहनों के गुजरने के बाद दोबारा उड़ जाते हैं या धंस जाते हैं। इससे समस्या जस की तस बनी रहती है।
दुर्घटनाओं का अंदेशा: रात के समय जब इस मार्ग पर स्ट्रीट लाइट्स की स्थिति ठीक नहीं होती, तो अनजान वाहन चालकों (विशेषकर बाइक और ऑटो चालकों) के लिए यह गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं। आए दिन यहां लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
तत्काल समाधान की पुरजोर मांग
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, दुकानदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग से जोरदार मांग की है कि:
शीघ्र हो डामरीकरण और पुनर्निर्माण: गंगाधाम से कच्ची सड़क तक जाने से पहले की इस मुख्य पक्की सड़क का तत्काल सर्वे कराकर उच्च गुणवत्ता के साथ री-कार्पेटिंग (पक्की सड़क का निर्माण) कराई जाए।
ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था: सड़क के दोनों किनारों पर पानी की निकासी के लिए पक्के नालों का निर्माण हो ताकि जलभराव के कारण सड़क दोबारा न टूटे।
गंगाधाम से कच्ची सड़क तक जाने से ठीक पहले पक्की सड़क पर बनी यह दुर्दशा केवल एक भौगोलिक समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुस्ती और विकास के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। समय रहते यदि इस जर्जर मार्ग का जीर्णोद्धार नहीं कराया गया, तो कभी भी यहां कोई बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा ताकि उनकी रोजमर्रा की इस बड़ी पीड़ा का स्थाई समाधान निकल सके।