पूर्णिया/केनगर: नौ महीने से मानदेय नहीं मिलने पर ग्रामीण आवास कर्मियों का फूटा गुस्सा; केनगर प्रखंड इकाई ने खोला मोर्चा, कार्य बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे कर्मी
पूर्णिया/केनगर (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड से प्रशासनिक और ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी एक बहुत ही बड़ी, गंभीर और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। बिहार में ग्रामीण विकास योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले ग्रामीण आवास कर्मियों को पिछले नौ लंबे महीनों से मानदेय (वेतन) का भुगतान नहीं किया गया है। इस लगातार वित्तीय लापरवाही और आर्थिक तंगी से त्रस्त होकर राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ, बिहार की केनगर प्रखंड इकाई के सभी ग्रामीण आवास कर्मी आक्रोशित हो उठे हैं। कर्मियों ने काम का पूर्ण रूप से बहिष्कार (Work Boycott) कर दिया है और प्रखंड मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन हड़ताल और प्रदर्शन शुरू कर दिया है।तब्बू और भूखों मरने की कगार पर पहुंचे इन कर्मियों के आंदोलन से प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।
विकास कार्यों के धरातल पर क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाने वाले कर्मियों के इस तरह सड़क पर उतरने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आइए इस पूरे आंदोलन, मानदेय भुगतान में हो रही भारी देरी और इसके प्रभावों का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण समझते हैं।
नौ महीने से मानदेय बंद: भुखमरी और आर्थिक संकट के कगार पर कर्मी
किसी भी कर्मचारी के लिए लगातार नौ महीनों तक वेतन या मानदेय न मिलना एक बहुत बड़ी त्रासदी है, खासकर तब जब उनके कंधों पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी हो।
लंबे समय से भुगतान लंबित: केनगर प्रखंड के ग्रामीण आवास कर्मियों ने बताया कि उन्हें पिछले 9 महीने से विभाग की तरफ से एक भी रुपया मानदेय के रूप में नहीं मिला है।
कर्ज लेकर गुजर-बसर: महीने दर महीने बिना वेतन के काम चलाने के कारण इन कर्मियों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। बच्चों की फीस, घर का किराया और दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें साहूकारों से उधार लेना पड़ रहा है।
पारिवारिक तंगी: दीपावली, छठ और अन्य त्योहारों के वक्त भी मानदेय न मिलने के कारण इन कर्मियों के परिवारों को भारी आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है।
राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ का आक्रोश और कार्य बहिष्कार
जब बार-बार गुहार लगाने के बाद भी विभाग और प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी, तब संघ ने कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत: राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ, बिहार के आह्वान पर केनगर प्रखंड इकाई के सभी आवास सहायकों और आवास प्रवेक्षकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
कार्यालयों में तालाबंदी और प्रदर्शन: कर्मियों ने केनगर प्रखंड विकास कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके पिछले 9 महीनों के बकाए मानदेय का एकमुश्त भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
नारेबाजी और रोष: प्रदर्शन के दौरान कर्मियों ने सरकार और विभागीय उच्च अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा रोष व्यक्त किया।
ग्रामीण विकास कार्य और प्रधानमंत्री आवास योजना पूरी तरह ठप
ग्रामीण आवास कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर सीधा और विपरीत प्रभाव पड़ा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर ब्रेक: ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को मिलने वाले पक्के मकानों के निर्माण की निगरानी, जियो-टैगिंग और किस्तों का सत्यापन करने की मुख्य जिम्मेदारी इन्हीं आवास कर्मियों की होती है। हड़ताल के कारण अब इन तमाम कार्यों पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है।
लाभार्थियों को हो रही परेशानी: जिन गरीब लाभुकों को आवास निर्माण के लिए अगली किस्त का इंतजार है, उनके कागजात का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, जिससे वे दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सरकारी लक्ष्य प्रभावित: चालू वित्तीय वर्ष के ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में इस हड़ताल के कारण भारी बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे जिला प्रशासन की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की सुगबुगाहट
इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस आंदोलन के बाद अब जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारी हरकत में आने लगे हैं।
विभाग को रिपोर्ट: केनगर प्रखंड प्रशासन द्वारा इन कर्मियों के मानदेय भुगतान से संबंधित फाइल और रिपोर्ट जिला मुख्यालय तथा पटना स्थित राज्य निदेशालय को भेज दी गई है, ताकि फंड आवंटन की प्रक्रिया तेज की जा सके।
वार्ता के प्रयास: प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संघ के प्रतिनिधियों से बातचीत कर हड़ताल समाप्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कर्मी लिखित आश्वासन और भुगतान की पक्की गारंटी से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।
पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड में राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ द्वारा नौ महीने से मानदेय न मिलने के विरोध में शुरू किया गया कार्य बहिष्कार और अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी नाकामी को उजागर करती है। जिन कर्मियों के कंधों पर ग्रामीण भारत के गरीबों को आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, वे खुद आर्थिक तंगी और बदहाली का शिकार हैं। यदि सरकार और विभाग ने जल्द से जल्द संज्ञान लेकर इन नौ महीनों के बकाए मानदेय का भुगतान नहीं किया, तो यह आंदोलन न केवल पूरे पूर्णिया जिले बल्कि पूरे बिहार राज्य में विकराल रूप ले सकता है, जिससे ग्रामीण विकास की गति पूरी तरह थम जाएगी।