बड़ी संख्या में पुरुष-महिलाएं पहुंचे, कई मामलों का निष्पादन, कुछ में सहमति तो कुछ में नहीं निकला समाधान

पीरपैंती: पीरपैंती अंचल कार्यालय परिसर में शनिवार को आयोजित शनिवासरीय जनता दरबार में जमीन संबंधी विवादों को लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। चार थाना क्षेत्रों से कुल 24 मामले जनता दरबार में रखे गए, जिनमें कई मामलों का निष्पादन किया गया। कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई, जबकि कई विवादों में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया।

जनता दरबार में सुबह से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। बड़ी संख्या में पुरुषों के साथ महिलाएं भी जमीन संबंधी शिकायतें लेकर अंचल कार्यालय पहुंचीं। किसी का विवाद जमीन की सीमा को लेकर था तो किसी का रास्ते, कब्जे और पारिवारिक बंटवारे को लेकर। कुछ लोग वर्षों से चले आ रहे भूमि विवादों के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे थे।

शनिवासरीय जनता दरबार में पीरपैंती, ईशीपुर बाराहाट, शिवनारायणपुर और प्यालापुर थाना क्षेत्रों से मामले आए। अधिकारियों ने बारी-बारी से दोनों पक्षों की बात सुनी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर विवाद के समाधान का प्रयास किया। कई मामलों में संबंधित पक्षों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने की सलाह दी गई।

24 मामलों में कई का निष्पादन

अंचल कार्यालय में आए कुल 24 मामलों में कई विवादों का मौके पर ही निष्पादन किया गया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद आपसी सहमति बनाने की कोशिश की। कुछ मामलों में पक्षकार अधिकारियों की पहल के बाद समाधान पर सहमत हो गए। ऐसे मामलों में लोगों ने राहत की सांस ली।

हालांकि कई विवाद इतने पुराने और जटिल थे कि उनका तत्काल समाधान नहीं हो सका। कुछ मामलों में भूमि संबंधी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, जबकि कुछ विवादों में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े रहे। ऐसे मामलों में अधिकारियों ने कागजात की जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही।

महिलाओं ने भी रखी अपनी समस्याएं

जनता दरबार में महिलाओं की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। कई महिलाएं परिवार के सदस्यों के साथ जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों की शिकायत लेकर पहुंचीं। कुछ मामलों में महिलाओं ने अपनी पैतृक संपत्ति और भूमि पर अधिकार से संबंधित शिकायतें रखीं, जबकि कुछ ने जमीन पर अवैध कब्जे और पारिवारिक विवाद की जानकारी दी।

अधिकारियों ने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। साथ ही बताया गया कि भूमि विवादों का समाधान कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा। लोगों से किसी भी प्रकार के विवाद को लेकर कानून अपने हाथ में नहीं लेने की भी अपील की गई।

थानाध्यक्ष और अंचल कर्मियों की मौजूदगी में हुई सुनवाई

शनिवासरीय जनता दरबार में चार थाना क्षेत्रों के संबंधित पुलिस पदाधिकारी और अंचल कर्मी मौजूद रहे। जमीन विवादों की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की गई। अधिकारियों ने विवादित भूमि से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी लेकर कई मामलों में समाधान का प्रयास किया।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनता दरबार का मुख्य उद्देश्य जमीन संबंधी विवादों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाना है, ताकि छोटे विवाद आगे चलकर बड़े विवाद या हिंसक घटनाओं का रूप न ले सकें। स्थानीय स्तर पर पुलिस और अंचल प्रशासन की संयुक्त मौजूदगी से भूमि विवादों के त्वरित और शांतिपूर्ण समाधान में मदद मिलती है।

पुराने विवादों के कारण बढ़ती है परेशानी

पीरपैंती क्षेत्र में जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए हैं। सीमांकन, बंटवारा, कब्जा और रास्ते को लेकर अक्सर विवाद सामने आते हैं। कई बार पारिवारिक स्तर पर शुरू हुआ विवाद वर्षों तक चलता रहता है और बाद में गंभीर रूप ले लेता है।

इसी को देखते हुए सरकार के निर्देश पर नियमित रूप से जनता दरबार आयोजित कर ऐसे मामलों की सुनवाई की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर बातचीत कराने से कई मामलों का समाधान हो जाता है।

लोगों को अगले जनता दरबार में बुलाया गया

जिन मामलों में शनिवार को समाधान नहीं निकल सका, उनमें संबंधित पक्षों को अगले जनता दरबार में जरूरी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। कुछ मामलों में भूमि अभिलेखों और सीमांकन से संबंधित अतिरिक्त जांच की भी जरूरत बताई गई।

अधिकारियों ने कहा कि सभी मामलों का समाधान कानून और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा। किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही विवादित पक्षों से अपील की गई कि वे आपसी तनाव बढ़ाने के बजाय प्रशासन की प्रक्रिया में सहयोग करें।

शनिवासरीय जनता दरबार से कई लोगों को अपने पुराने भूमि विवादों के समाधान की उम्मीद जगी है। हालांकि सभी मामलों का निष्पादन नहीं हो सका, लेकिन प्रशासनिक पहल से कई पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई और कुछ मामलों में सहमति भी बनी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जनता दरबार में नियमित और प्रभावी सुनवाई जारी रही, तो जमीन विवादों के कारण होने वाले तनाव और टकराव की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।