मुजफ्फरपुर पुलिस की बड़ी लापरवाही और तत्परता: थाने की हाजत से फरार हुआ 666 लीटर विदेशी शराब का तस्कर दीपक कुमार, पुलिस ने अस्पताल के पास से दोबारा दबोचा
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से पुलिस महकमे को हिला देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां कानून की गिरफ्त से बचने के लिए एक शातिर अपराधी ने पुलिस को चकमा दे दिया। जिले के एक थाने की हाजत (Lockup) से भारी मात्रा में विदेशी शराब के साथ गिरफ्तार तस्कर दीपक कुमार मौका पाकर फरार हो गया। इस घटना से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस अधिकारियों ने विशेष टीमों का गठन कर उसकी तलाश शुरू की। हालांकि, मुजफ्फरपुर पुलिस की मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई के चलते फरार होने के कुछ ही घंटों के भीतर तस्कर को शहर के एक अस्पताल के पास से दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना ने एक तरफ जहां पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने उसकी साख को बचाने का भी काम किया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई थी गिरफ्तारी?
यह पूरा घटनाक्रम मुजफ्फरपुर जिले के एक स्थानीय थाने का है, जहाँ पुलिस ने कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश या अन्य राज्यों से लाई जा रही अवैध शराब के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था।
666 लीटर विदेशी शराब के साथ पकड़ा गया था दीपक: पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर शराब तस्कर दीपक कुमार को भारी मात्रा में प्रतिबंधित विदेशी शराब के साथ दबोचा था। पुलिस द्वारा की गई जब्ती में कुल 666 लीटर अवैध विदेशी शराब बरामद की गई थी, जिसकी बाजार में कीमत लाखों रुपए आंकी गई थी।
उत्पाद अधिनियम के तहत कार्रवाई: इतनी भारी मात्रा में शराब पकड़े जाने के बाद पुलिस ने आरोपी दीपक कुमार के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम (Prohibition and Excise Act) के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था और उसे थाने की हाजत में बंद कर दिया गया था। पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई पूरी कर रही थी, तभी आरोपी ने पुलिस की आँखों में धूल झोंकने की साजिश रची।
थाने की हाजत से फरार होने की सनसनीखेज घटना
पुलिस कस्टडी में होने के बावजूद शराब तस्कर दीपक कुमार की नीयत में खोट था और वह किसी भी तरह पुलिस की गिरफ्त से भागने की फिराक में था।
सुरक्षा में सेंध और मौका: हाजत में बंद रहने के दौरान आरोपी ने पुलिसकर्मियों की मामूली सी लापरवाही या सुरक्षा चूक का फायदा उठाया। जैसे ही उसे थोड़ा मौका मिला, वह थाने के संतरी और ड्यूट पर तैनात पुलिसकर्मियों को चकमा देकर हाजत से फरार हो गया।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप: जैसे ही यह बात थाना प्रभारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पता चली, पूरे पुलिस प्रशासन में भूचाल आ गया। एक बड़े शराब तस्कर का थाने की हाजत से फरार हो जाना सीधे तौर पर पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल था। आनन-फानन में जिले के आला अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और तुरंत जिलेभर की सीमाओं और संदिग्ध ठिकानों पर नाकेबंदी कर दी गई।
अस्पताल के पास से दोबारा धर-दबोचा गया शातिर तस्कर
फरार होने के बाद आरोपी दीपक कुमार ने छिपने की कोशिश की और शहर के ही एक अस्पताल के आसपास शरण लेने की फिराक में था, ताकि वह अपनी किसी जरूरत को पूरा कर सके या वहां से आसानी से निकल भागे।
विशेष पुलिस टीम की दबिश: मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर गठित विशेष पुलिस टीम ने टेक्निकल सर्विलांस और स्थानीय मुखबिरों की मदद से फरार तस्कर के भागने के रूट को ट्रैक करना शुरू किया। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
सफल री-अरेस्ट ऑपरेशन: पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि आरोपी दीपक कुमार शहर के एक अस्पताल के पास छिपा हुआ है या वहां से भागने की योजना बना रहा है। बिना समय गंवाए पुलिस बल ने उस इलाके को चारों तरफ से घेर लिया और घेराबंदी करते हुए आखिरकार उस शातिर तस्कर को अस्पताल के पास से दोबारा धर-दबोचा।
इस घटना से खड़े हुए सबक और आगे की कार्रवाई
दुबारा गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस ने चैन की सांस ली है, लेकिन इस पूरी घटना ने कई गंभीर पहलुओं को उजागर किया है:
सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा: थाने की हाजत से कैदी के फरार होने की इस घटना के बाद पुलिस विभाग के भीतर आंतरिक जांच के आदेश दिए जा सकते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्यूटी में तैनात किन पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण आरोपी भागा था। उन पर विभागीय कार्रवाई भी संभव है।
सख्त कानूनी शिकंजा: अब पुलिस ने फरार होने की नई धारा जोड़ते हुए आरोपी दीपक कुमार के खिलाफ कानूनी शिकंजा और अधिक कस दिया है। उसे दोबारा गिरफ्तार करने के बाद अब कोर्ट में पेश कर कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायिक हिरासत (Jail) में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
मुजफ्फरपुर में हुई इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी भले ही पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश करें, लेकिन यदि पुलिस सक्रिय हो जाए तो उन्हें दोबारा कानून के शिकंजे में कसने में देर नहीं लगती।