मुजफ्फरपुर एमआईटी का गर्ल्स हॉस्टल रहने के योग्य नहीं: जांच रिपोर्ट में खुलासे से मचा हड़कंप, जर्जर भवन और खराब खानपान की पुष्टि

बिहार के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में शुमार मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) एक बार फिर गंभीर व्यवस्थागत लापरवाही को लेकर चर्चा में है। संस्थान के गर्ल्स हॉस्टल को लेकर हाल ही में एक उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसने कॉलेज प्रशासन और विभाग के दावों की पोल खोल दी है। इस जांच रिपोर्ट में एमआईटी के गर्ल्स हॉस्टल को रहने के लिए पूरी तरह अयोग्य (Unfit for Living) करार दिया गया है। रिपोर्ट में हॉस्टल के भीतर खराब रहने की स्थिति, जर्जर और खस्ताहाल इमारत, तथा खान-पान की बेहद अनुचित एवं अस्वच्छ व्यवस्था की पुष्टि की गई है। इस खुलासे के बाद से छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश है।

जांच रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए? (बदहाली की दास्तान)

सामने आई जांच रिपोर्ट के अनुसार, एमआईटी के गर्ल्स हॉस्टल का हाल बद से बदतर हो चुका है। तकनीकी शिक्षा के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाले संस्थान के भीतर छात्राओं की आवासीय स्थिति बेहद दयनीय है:

जर्जर और खतरनाक इमारत: हॉस्टल की इमारतें इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं कि उनकी दीवारों और छतों से प्लास्टर उखड़ रहा है। बरसात के दिनों में छतों से पानी टपकता है, जिससे हमेशा किसी अनहोनी या हादसे की आशंका बनी रहती है।

अस्वच्छ और खराब खान-पान: मेस में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद घटिया पाई गई है। छात्राओं को तय मेनू के अनुसार और पौष्टिक भोजन मिलने के बजाय अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किया गया भोजन परोसा जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव: हॉस्टल परिसरों में पीने के साफ पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा शौचालय और बाथरूम की हालत इतनी खराब है कि वहां स्वच्छता का नामोनिशान तक नहीं बचा है। गंदे परिवेश और रख-रखाव के अभाव में छात्राओं का वहां एक दिन गुजारना भी दूभर हो गया है।

छात्राओं की समस्याएं और प्रशासनिक उदासीनता

दूर-दराज के जिलों और अन्य राज्यों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने आई छात्राएं इस जर्जर हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखने को विवश हैं। छात्राओं का आरोप है कि उन्होंने कई बार कॉलेज प्रशासन और संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष अपनी इन समस्याओं को रखा, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।

सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा: खराब स्वच्छता और गंदे परिवेश के कारण हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। जर्जर छतें कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं, इसके बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

अभिभावकों की चिंता: जब से यह जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है, तब से छात्राओं के माता-पिता और अभिभावक अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।

अब आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

जांच रिपोर्ट में एमआईटी गर्ल्स हॉस्टल के अयोग्य घोषित होने के बाद अब दबाव पूरी तरह से कॉलेज प्रशासन और विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग (Department of Science and Technology) पर आ गया है।

वैकल्पिक व्यवस्था की मांग: शिक्षाविदों और छात्र संगठनों द्वारा यह मांग की जा रही है कि जब तक नए हॉस्टल का निर्माण नहीं होता या पुराने भवन की पूरी तरह से मरम्मती नहीं कराई जाती, तब तक छात्राओं के रहने के लिए किसी सुरक्षित और वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की जाए।

कार्रवाई की सुगबुगाहट: रिपोर्ट सामने आने के बाद उच्च स्तर पर यह मंथन शुरू हो गया है कि आखिर इतने लंबे समय तक इस बदहाली को क्यों नजरअंदाज किया गया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए।

मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित एमआईटी संस्थान के गर्ल्स हॉस्टल की यह जांच रिपोर्ट यह साबित करती है कि कागजों पर विकास के दावे चाहे जितने भी बड़े हों, धरातल पर व्यवस्थाएं कितनी खोखली हैं। 33 से अधिक छात्राओं के गंदे और जर्जर माहौल में रहने की पुष्टि होना एक गंभीर प्रशासनिक विफलता है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस रिपोर्ट के आधार पर कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से सुधारात्मक कदम उठाता है।