मुजफ्फरपुर जंक्शन पर मानसूनी आफत: सोमवार की झमाझम बारिश से उत्तरी सर्कुलेटिंग एरिया कीचड़ में तब्दील, रेललाइन संख्या 1 और 2 पर भरा पानी; ट्रेनों का परिचालन रहा सामान्य, लेकिन प्लेटफॉर्मों पर फिसलन से यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में मानसून की सक्रियता और झमाझम बारिश ने एक बार फिर शहर के महत्वपूर्ण सार्वजनिक और परिवहन स्थलों की पोल खोल दी है। सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश के चलते प्रमुख मुजफ्फरपुर जंक्शन (Muzaffarpur Junction) का हाल बेहाल हो गया। भारी बारिश के कारण जंक्शन का उत्तरी सर्कुलेटिंग एरिया पूरी तरह कीचड़ से पट गया, जिससे वहां से गुजरने वाले यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही, जंक्शन की रेललाइन संख्या एक और दो पर पानी जमा हो गया। हालांकि गनीमत यह रही कि पटरियों पर पानी भरने के बावजूद ट्रेनों का रेल यातायात बाधित नहीं हुआ और परिचालन सामान्य रूप से जारी रहा, लेकिन प्लेटफॉर्मों पर फैली कीचड़ और भारी फिसलन के कारण यात्रियों का चलना दूभर हो गया।

बारिश का कहर: उत्तरी सर्कुलेटिंग एरिया बना कीचड़ का दलदल

सोमवार को हुई तेज बारिश ने मुजफ्फरपुर जंक्शन के बाहरी और आंतरिक दोनों परिसरों को प्रभावित किया। सबसे बुरा हाल स्टेशन के उत्तरी हिस्से का देखने को मिला।

कीचड़ में डूबा उत्तरी सर्कुलेटिंग एरिया: जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी उत्तरी सर्कुलेटिंग क्षेत्र में भर गया, जो बाद में कीचड़ में बदल गया। इस रास्ते से ऑटो, टैक्सी और पैदल आने-जाने वाले यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कीचड़ भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ा। यात्रियों के कपड़े और सामान खराब हो गए, जिससे उनमें नाराजगी देखी गई।

यात्रियों की भारी फजीहत: स्टेशन परिसर में प्रवेश करने वाले वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को इस जलभराव और कीचड़ के बीच भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई जगहों पर फिसलन इतनी ज्यादा थी कि लोगों के संभलकर चलना पड़ा।

रेललाइन संख्या 1 और 2 पर जलभराव, प्लेटफॉर्मों पर फिसलन

झमाझम बारिश के कारण रेलवे ट्रैक और प्लेटफॉर्मों की स्थिति भी काफी दयनीय हो गई, जिससे यात्रियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गईं।

पटरियों पर पानी का जमाव: मूसलाधार बारिश की वजह से रेलवे ट्रैक संख्या एक और दो पर पानी भर गया। पटरियों के बीच जलभराव हो जाने से ट्रेन पकड़ने आने वाले यात्रियों को पटरियों को पार करते समय भारी सावधानी बरतनी पड़ी।

प्लेटफॉर्मों पर जानलेवा फिसलन: पानी और कीचड़ के कारण प्लेटफॉर्म संख्या एक से लेकर अन्य प्लेटफॉर्मों तक अत्यधिक फिसलन पैदा हो गई। स्थिति यह थी कि ट्रेन पकड़ने की जल्दी में कई यात्री फिसलकर गिरते-गिरते बचे, तो कुछ लोग मामूली रूप से चोटिल भी हुए। विशेषकर भारी-भरकम लगेج (सामान) लेकर चलने वाले यात्रियों को ट्रेन के डिब्बों तक पहुँचने में पसीने छूट गए।

यातायात रहा सामान्य, पर व्यवस्था पर उठे सवाल

राहत की बात यह रही कि इतनी पाबंदियों और जलभराव के बाद भी रेलवे प्रशासन की मुस्तैदी से ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह ठप नहीं हुआ।

परिचालन पर असर नहीं: रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पटरियों पर पानी जरूर जमा हुआ था, लेकिन सिगनलिंग और ट्रैक की स्थिति को देखते हुए ट्रेनों का परिचालन नियंत्रित गति से सुरक्षित रूप से जारी रखा गया ताकि यात्रियों को लंबे विलंब का सामना न करना पड़े।

प्रशासनिक दावों की पोल: यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान मुजफ्फरपुर जंक्शन पर जलभराव और कीचड़ की समस्या आम हो जाती है। करोड़ों रुपए के विकास और सौंदर्यीकरण के दावे करने वाला रेलवे प्रशासन और नगर निगम मिलकर भी जंक्शन परिसर में जल निकासी (Drainage System) की पुख्ता व्यवस्था नहीं कर पा रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।

मुजफ्फरपुर जंक्शन पर सोमवार को हुई बारिश के बाद उत्पन्न स्थिति यह दर्शाती है कि शहर की आधारभूत संरचना और ड्रेनेज सिस्टम में अभी भी भारी खामियां मौजूद हैं। उत्तरी सर्कुलेटिंग एरिया का कीचड़ में बदलना और रेललाइन संख्या एक-दो पर पानी जमा होना रेलवे के दावों की पोल खोलता है। हालांकि ट्रेनें समय पर चलती रहीं, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से रेलवे प्रशासन को जल्द से जल्द स्थायी जल निकासी के उपाय करने होंगे ताकि आगामी दिनों में इस तरह की परेशानियों से बचा जा सके।