गाय को बचाने गई मां की करंट से मौत, बचाने दौड़े अग्निवीर बेटे ने भी गंवाई जान

 अरवल: अरवल जिले के किंजर थाना क्षेत्र के झुनाठी गांव में बुधवार की सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। घर के पास स्थित ट्रांसफॉर्मर के समीप गाय को करंट से बचाने की कोशिश में मां की मौत हो गई। मां को बचाने के लिए दौड़े उसके 19 वर्षीय बेटे की भी करंट की चपेट में आने से जान चली गई। हादसे में गाय की जान बच गई, लेकिन परिवार ने अपने दो सदस्यों को खो दिया।

मृतकों की पहचान हरेराम शर्मा की 50 वर्षीय पत्नी सीमा देवी और उनके 19 वर्षीय पुत्र शुभम कुमार के रूप में हुई है। बताया गया है कि शुभम कुमार का चयन अग्निवीर के रूप में हो चुका था। बेटे के भविष्य को लेकर परिवार और ग्रामीणों में खुशी का माहौल था, लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

घटना के बाद गांव में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कथित लापरवाही को हादसे का कारण बताते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

गाय को बचाने पहुंची थी सीमा देवी

ग्रामीणों के अनुसार, हरेराम शर्मा की गाय बुधवार की सुबह घर के समीप घास चरते हुए ट्रांसफॉर्मर के पास चली गई थी। ट्रांसफॉर्मर के आसपास बिजली के तार और अन्य विद्युत उपकरण लगे हुए थे। इसी दौरान गाय बिजली के संपर्क में आने के खतरे में आ गई।

गाय को परेशानी में देखकर सीमा देवी उसे बचाने के लिए ट्रांसफॉर्मर के पास पहुंचीं। उन्होंने किसी तरह गाय को वहां से दूर भगाने की कोशिश की। इसी दौरान वह ट्रांसफॉर्मर के स्टेक के संपर्क में आ गईं, जिसमें कथित तौर पर बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा था।

करंट की चपेट में आते ही सीमा देवी वहीं छटपटाने लगीं। आसपास मौजूद लोगों ने घटना को देखा, लेकिन स्थिति इतनी गंभीर थी कि तत्काल उन्हें वहां से हटाना आसान नहीं था।

मां को बचाने दौड़ा अग्निवीर बेटा

मां को करंट की चपेट में देखकर उनका 19 वर्षीय बेटा शुभम कुमार उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़ा। शुभम को शायद अंदाजा नहीं था कि जिस जगह उसकी मां फंसी हुई हैं, वहां विद्युत प्रवाह मौजूद है।

मां को बचाने की कोशिश में शुभम भी करंट की चपेट में आ गया। देखते ही देखते मां और बेटे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए और अचेत हो गए।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने किसी तरह दोनों को विद्युत संपर्क से अलग किया और इलाज के लिए अरवल सदर अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की।

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने मृत घोषित किया

गंभीर हालत में सीमा देवी और शुभम कुमार को अरवल सदर अस्पताल ले जाया गया। परिजनों और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि समय रहते इलाज मिलने से दोनों की जान बचाई जा सकेगी।

हालांकि, अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की ओर से मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई।

एक ही परिवार में मां और बेटे की मौत की खबर से गांव में मातम पसर गया। ग्रामीणों के लिए भी यह घटना बेहद सदमे वाली रही, क्योंकि कुछ ही समय पहले तक शुभम के अग्निवीर के रूप में चयन की खबर परिवार के लिए गर्व और खुशी का कारण बनी हुई थी।

अग्निवीर में हुआ था शुभम का चयन

19 वर्षीय शुभम कुमार के अग्निवीर में चयन की जानकारी सामने आने के बाद इस हादसे ने घटना को और भी भावुक बना दिया है। परिवार और ग्रामीणों को शुभम से काफी उम्मीदें थीं। युवा उम्र में सेना से जुड़ने का अवसर मिलने के कारण परिवार भविष्य को लेकर उत्साहित था।

लेकिन बुधवार की सुबह हुए हादसे ने परिवार के सपनों को अचानक तोड़ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, शुभम अपनी मां को बचाने के लिए बिना अपनी सुरक्षा की चिंता किए करंट वाले स्थान की ओर दौड़ पड़ा।

ग्रामीणों ने उसकी इस कोशिश को मां के प्रति उसके प्रेम और साहस से जोड़कर देखा। हालांकि, विद्युत सुरक्षा की जानकारी के अभाव या अचानक पैदा हुई स्थिति के कारण वह भी हादसे का शिकार हो गया।

ट्रांसफॉर्मर के स्टेक में करंट आने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ट्रांसफॉर्मर के आसपास पहले से ही विद्युत सुरक्षा से जुड़ी समस्या थी। उनके अनुसार, ट्रांसफॉर्मर के पास बिजली का तार लटक रहा था और स्टेक में भी करंट आने की स्थिति बनी हुई थी।

ग्रामीणों का दावा है कि इस समस्या की जानकारी बिजली विभाग के संबंधित कर्मियों को पहले भी दी गई थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया जाता और ट्रांसफॉर्मर के आसपास सुरक्षा सुनिश्चित की जाती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

हालांकि, बिजली विभाग की ओर से घटना और कथित लापरवाही को लेकर आधिकारिक रूप से क्या कहा गया है, यह संबंधित विभाग की जांच या बयान के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल ग्रामीणों के आरोप जांच का विषय हैं।

बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

हादसे के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि विद्युत उपकरणों के आसपास सुरक्षा मानकों का पालन होना बेहद जरूरी है। यदि किसी ट्रांसफॉर्मर, पोल या तार में खराबी है तो उसे तत्काल ठीक किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफॉर्मर के आसपास बिजली का तार लटकने और स्टेक में करंट आने जैसी स्थिति गंभीर खतरा पैदा कर रही थी। ऐसे स्थानों पर बच्चों, पशुओं और ग्रामीणों के दुर्घटना का शिकार होने की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि घटना की जांच कर यह पता लगाया जाए कि ट्रांसफॉर्मर के स्टेक में करंट क्यों आ रहा था और यदि पहले शिकायत की गई थी तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

सीमा देवी और शुभम कुमार की मौत के बाद हरेराम शर्मा के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के लिए सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि एक ही घटना में मां और बेटे दोनों की मौत हो गई।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शुभम की मौत ने परिवार के भविष्य को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। जिस बेटे के अग्निवीर बनने से परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ने की उम्मीद थी, वही बेटा अब उनके बीच नहीं है।

ग्रामीण बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार के घर और अस्पताल पहुंचे तथा परिजनों को ढांढस बंधाया। गांव में हर तरफ इस हादसे को लेकर चर्चा और शोक का माहौल बना हुआ है।

बिजली सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल

यह हादसा ग्रामीण इलाकों में बिजली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े करता है। ट्रांसफॉर्मर और विद्युत तारों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। खुले या क्षतिग्रस्त तार, करंट प्रवाहित होने वाले धातु के हिस्से और जमीन के पास स्थित विद्युत उपकरण लोगों तथा पशुओं के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह होती है कि किसी व्यक्ति या पशु के करंट की चपेट में आने पर बिना बिजली आपूर्ति बंद किए उसे सीधे छूने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पहले मुख्य विद्युत आपूर्ति बंद करना और सुरक्षित तरीके से सहायता पहुंचाना जरूरी होता है।

इस घटना में मां को बचाने के प्रयास में बेटे का भी करंट की चपेट में आना यह बताता है कि ऐसी आपात स्थिति में बिजली सुरक्षा संबंधी जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है।

ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग से ट्रांसफॉर्मर और आसपास की विद्युत व्यवस्था की तत्काल जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल झुनाठी गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य इलाकों में भी ऐसे विद्युत उपकरणों की जांच होनी चाहिए, जहां तार खुले या लटक रहे हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ट्रांसफॉर्मर और बिजली के तारों की नियमित जांच की व्यवस्था हो।

घटना ने पूरे गांव को किया स्तब्ध

झुनाठी गांव में सुबह हुई यह घटना कुछ ही समय में पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। एक मां अपने पशु को बचाने गई और उसकी जान चली गई। मां को बचाने की कोशिश में बेटे ने भी अपनी जान गंवा दी।

सबसे मार्मिक पहलू यह है कि शुभम कुमार का अग्निवीर के रूप में चयन हुआ था और परिवार उसके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद कर रहा था। लेकिन बिजली के करंट से हुए इस हादसे ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और बिजली विभाग घटना की जांच को लेकर क्या कदम उठाते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ट्रांसफॉर्मर और बिजली व्यवस्था की सुरक्षा में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

कुल मिलाकर, अरवल के झुनाठी गांव की यह घटना बिजली सुरक्षा के प्रति सतर्कता की गंभीर आवश्यकता को सामने लाती है। गाय को बचाने की कोशिश में सीमा देवी और उन्हें बचाने पहुंचे उनके बेटे शुभम कुमार की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। ग्रामीणों द्वारा बिजली विभाग पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि घटना के वास्तविक कारण सामने आ सकें और भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।