बालिकाओं को सबल और आत्मरक्षार्थ सक्षम बनाने वाले 'मुक्का मार' आत्मरक्षा शिविर का हुआ भव्य समापन; उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राएं हुईं सम्मानित

भागलपुर, विशेष संवाददाता: आज के दौर में बेटियों का केवल शिक्षित होना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही आवश्यक है। सिल्क सिटी भागलपुर में बालिकाओं और युवतियों को विपरीत परिस्थितियों से निपटने और अपनी सुरक्षा स्वयं करने के हुनर से लैस करने के उद्देश्य से चलाए गए विशेष 'मुक्का मार' आत्मरक्षा शिविर का बुधवार को अत्यंत उत्साहपूर्ण और प्रेरणादायक माहौल में समापन हो गया। इस पांच दिवसीय या विशेष प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन मुख्य आयोजन के दौरान विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों की छात्राओं ने अपनी सीखे गए आत्मरक्षा के गुरों का ऐसा शानदार और आक्रामक प्रदर्शन किया कि उपस्थित सभी लोग दंग रह गए। शिविर के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली होनहार छात्राओं को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया।

क्यों पड़ी 'मुक्का मार' जैसे आत्मरक्षा शिविर की आवश्यकता?

आज के समय में समाज में महिलाओं और बालिकाओं के प्रति बढ़ती छेड़खानी, आपराधिक घटनाओं और असामाजिक तत्वों की हरकतों को रोकने के लिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य हो गया है:

आत्मविश्वास की अलख: इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के मन से डर को पूरी तरह से निकाल बाहर करना और उन्हें मानसिक रूप से इतना दृढ़ बनाना था कि वे किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय आक्रामक होकर मुकाबला कर सकें।

शारीरिक और मानसिक सशक्तिकरण: पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ युवतियों को तायक्वोंडो, जूडो-कराटे और अन्य मार्शल आर्ट्स की बुनियादी तकनीकों से परिचित कराना इस कैंप का मुख्य लक्ष्य था ताकि वे बिना किसी हथियार के अपनी रक्षा कर सकें।

शिविर के दौरान क्या-क्या सिखाया गया? (प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु)

विभिन्न विशेषज्ञों और मार्शल आर्ट प्रशिक्षकों की देखरेख में आयोजित इस शिविर में छात्राओं को बेहद व्यावहारिक और उपयोगी दांव-पेच सिखाए गए:

बेसिक डिफेंस मूव्स (बुनियादी बचाव तकनीकें): यदि कोई अचानक पीछे या आगे से पकड़ ले, कलाई पकड़ ले या बाल खींच ले, तो उस गिरफ्त से सेकंडों में खुद को कैसे छुड़ाया जाए, इसका गहन अभ्यास कराया गया।

'मुक्का मार' और काउंटर अटैक: शिविर के नाम के अनुरूप ही छात्राओं को पंजों और कोहनी से सटीक प्रहार करने, यानी 'मुक्का मार' और किक (लात) के जरिए हमलावर के संवेदनशील अंगों पर प्रहार कर उसे चित करने के गुर सिखाए गए।

रोजमर्रा की वस्तुओं का हथियार के रूप में उपयोग: आपात स्थिति में यदि हाथ खाली हों, तो पेन, दुपट्टा, स्कूल बैग या पानी की बोतल जैसी सामान्य चीजों का उपयोग करके अपनी सुरक्षा कैसे की जा सकती है, इसकी लाइव ट्रेनिंग दी गई।

समापन समारोह और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का सम्मान

शिविर के समापन अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में शहर के कई गणमान्य लोग, शिक्षाविद और पुलिस-प्रशासन से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान छात्राओं ने अपनी कला का प्रदर्शन कर सभी को अचंभित कर दिया:

मंच पर अद्भुत प्रदर्शन: छात्राओं ने वन-टू-वन कॉम्बैट (आपसी भिड़ंत) और सेल्फ-डिफेंस के विभिन्न मूव्स का ऐसा जीवंत प्रदर्शन किया कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी फुर्ती और आत्मविश्वास को देखकर हर कोई उनकी प्रशंसा कर रहा था।

सम्मान समारोह: शिविर के दौरान निरंतर अनुशासन, लगन और बेहतरीन प्रदर्शन दिखाने वाली मेधावी छात्राओं को मुख्य अतिथियों के हाथों मेडल, शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।

अतिथियों और प्रशिक्षकों के प्रेरणादायक विचार

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार के आत्मरक्षा शिविर प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाने चाहिए:

नारी सशक्तिकरण की मिसाल: वक्ताओं ने कहा कि 'मुक्का मार' जैसे अभियान बालिकाओं कोलाचार और कमजोर समझने वाली मानसिकता पर एक करारा प्रहार हैं। जब बेटियां खुद अपनी रक्षक बन जाएंगी, तो समाज में अपराधियों के हौसले अपने आप पस्त हो जाएंगे।

प्रशिक्षकों की मेहनत की सराहना: कैंप को सफल बनाने वाले मास्टर ट्रेनर्स की सराहना करते हुए कहा गया कि उन्होंने पूरी तन्मयता के साथ बालिकाओं को प्रशिक्षित किया है, जिसका सुखद परिणाम आज मंच पर देखने को मिला है।

भागलपुर में संपन्न हुआ यह 'मुक्का मार' आत्मरक्षा शिविर केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह बालिकाओं में स्वावलंबन और साहस की एक नई अलख जगाने वाला अभियान था। समापन के बाद जब ये छात्राएं अपने घरों और विद्यालयों की ओर लौटीं, तो उनके अंदर एक नया आत्मविश्वास और अजेय ऊर्जा साफ झलक रही थी। यह आयोजन सिल्क सिटी की बेटियों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है, जो आने वाले समय में उन्हें हर चुनौती का डटकर मुकाबला करने की शक्ति देगा।