मुजफ्फरपुर: डीएम कुमार गौरव ने की किसान रजिस्ट्री और ई-केवाईसी अभियान की उच्चस्तरीय समीक्षा; सभी 373 पंचायतों में विशेष शिविर लगाकर किसानों को जागरूक करने का सख्त निर्देश

मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से कृषि विकास, सरकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन और किसानों के सशक्तिकरण से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) कुमार गौरव ने कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान 'किसान रजिस्ट्री' और 'ई-केवाईसी' (e-KYC) अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले की सभी 373 पंचायतों में विशेष पहल की जाए। उन्होंने पंचायत स्तर पर विशेष शिविर (Camps) लगाने तथा किसानों को इस अभियान के प्रति जागरूक करने का कड़ा निर्देश दिया है, ताकि एक भी योग्य किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।

कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति और किसानों को सीधे तौर पर योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम से प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। आइए इस पूरे प्रशासनिक निर्देश और समीक्षा बैठक के विभिन्न पहलुओं का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण समझते हैं।

किसान रजिस्ट्री और ई-केवाईसी अभियान की आवश्यकता क्यों?

सरकार द्वारा किसानों के डेटाबेस को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए किसान रजिस्ट्री और ई-केवाईसी को अनिवार्य किया गया है।

योजनाओं का सीधा लाभ: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) सहित केंद्र और राज्य सरकार की अन्य कृषि अनुदान योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक किसानों के बैंक खातों तक पहुंचाने के लिए यह डिजिटल सत्यापन अत्यंत आवश्यक है।

फर्जीवाड़े पर लगाम: अक्सर बिचौलियों या फर्जीवाड़े के कारण वास्तविक किसानों को उनका हक मिलने में दिक्कतें आती हैं। किसान रजिस्ट्री होने से हर किसान का एक यूनिक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

डेटाबेस को दुरुस्त करना: डीएम कुमार गौरव ने समीक्षा के दौरान पाया कि कई पंचायतों में अभी भी ई-केवाईसी और रजिस्ट्रेशन का कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है, जिसके बाद उन्होंने इसमें तेजी लाने के लिए यह सख्त रुख अपनाया है।

 सभी 373 पंचायतों में विशेष शिविर लगाने के निर्देश

मुजफ्फरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों की सुगमता को ध्यान में रखते हुए पंचायत स्तर पर अभियान चलाने पर विशेष बल दिया गया है।

पंचायत स्तर पर प्रशासनिक पहुंच: डीएम ने निर्देश दिया है कि जिले की सभी 373 ग्राम पंचायतों में विशेष प्रशासनिक शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि किसानों को अपने कागजात लेकर दूर प्रखंड कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

रोस्टर तैयार करने का आदेश: कृषि विभाग, राजस्व कर्मचारी और पंचायत सचिवों की संयुक्त टीम बनाकर एक निश्चित रोस्टर के तहत इन शिविरों का संचालन करने को कहा गया है।

प्रचार-प्रसार और मुनादी: शिविरों की जानकारी समय से पहले किसानों तक पहुंचाने के लिए गांवों में मुनादी कराने और पंपलेट वितरित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक संख्या में किसान इसका लाभ उठा सकें।

अधिकारियों को दिए गए कड़े निर्देश और जवाबदेही तय

समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की बात कही है।

लक्ष्य आधारित कार्य: सभी कृषि समन्वयकों, किसान सलाहकारों और हल्का कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के प्रत्येक किसान का शत-प्रतिशत ई-केवाईसी और निबंधन कार्य समय सीमा के भीतर पूरा करें।

सप्ताह-वार प्रगति की रिपोर्ट: डीएम ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक सप्ताह इस अभियान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि खराब प्रदर्शन वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा सके।

समन्वय स्थापित करने पर जोर: कृषि विभाग के अधिकारियों को अंचल और पंचायत प्रतिनिधियों (मुखिया, वार्ड सदस्यों) के साथ समन्वय स्थापित कर इस महाअभियान को सफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।

 किसानों से अपील और अभियान का दीर्घकालिक प्रभाव

इस विशेष पहल का उद्देश्य न केवल कागजी खानापूर्ति करना है, बल्कि किसानों के जीवन को सरल और उनकी कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान करना है।

किसानों से सहयोग की अपील: जिला प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन के कागजात और मोबाइल नंबर के साथ शिविरों में पहुंचें और अपना ई-केवाईसी तथा किसान रजिस्ट्री का काम अवश्य पूरा करवाएं।

भविष्य में मिलने वाली सुविधाएं: एक बार डिजिटल रजिस्ट्री पूरी हो जाने पर किसानों को खाद, बीज, डीजल अनुदान और फसल बीमा जैसी तमाम योजनाएं बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के मिलने लगेंगी।

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव द्वारा किसान रजिस्ट्री और ई-केवाईसी अभियान को लेकर की गई यह समीक्षा बैठक और सभी 373 पंचायतों में शिविर लगाने का निर्देश प्रशासनिक मुस्तैदी का एक बेहतरीन उदाहरण है। यदि इस अभियान को पूरी ईमानदारी और जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाया गया, तो मुजफ्फरपुर जिले के लाखों किसानों को इसका सीधा और दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। सरकार की मंशा के अनुरूप डिजिटल भारत के इस दौर में किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।