पांच माह से प्रक्रिया और फाइलों में उलझा नाथनगर वृद्धाश्रम नगर प्रशासन की पहल के बाद भी नहीं हो सका काम पूरा, बुजुर्गों को अब भी सुविधाओं का इंतजार

भागलपुर : नाथनगर में बुजुर्गों के लिए प्रस्तावित वृद्धाश्रम का मामला पिछले पांच माह से प्रक्रिया और विभागीय फाइलों में उलझा हुआ है। करीब पांच माह पहले नगर प्रशासन स्तर पर वृद्धाश्रम की स्थापना को लेकर पहल शुरू की गई थी, लेकिन अब तक आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। इसके कारण वृद्धाश्रम शुरू करने की योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है और जरूरतमंद बुजुर्गों को अब भी सुरक्षित आश्रय और बेहतर सुविधाओं का इंतजार है।

वृद्धाश्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी उम्मीदें थीं। समाज के ऐसे बुजुर्ग, जो पारिवारिक सहयोग से वंचित हैं या जिन्हें रहने के लिए सुरक्षित स्थान की जरूरत है, उनके लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। लेकिन प्रस्ताव के आगे बढ़ने के बावजूद प्रशासनिक और विभागीय प्रक्रिया में देरी के कारण योजना की प्रगति धीमी पड़ गई है।

पांच माह बाद भी स्पष्ट नहीं हो सकी व्यवस्था

बताया जा रहा है कि नगर प्रशासन की ओर से वृद्धाश्रम की स्थापना के लिए जरूरी प्रस्ताव तैयार कर संबंधित स्तर पर भेजा गया था। इसके बाद स्थान, भवन, संचालन और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि पांच माह बीतने के बाद भी फाइलों का निष्पादन पूरा नहीं हो सका।

योजना से जुड़े आवश्यक अनुमोदन और विभागीय प्रक्रिया में देरी के कारण वृद्धाश्रम का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिरकार योजना को पूरा करने में इतना समय क्यों लग रहा है।

बुजुर्गों को सुरक्षित आश्रय की जरूरत

नाथनगर और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे बुजुर्ग हैं, जिन्हें सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण सहायता की आवश्यकता है। कई बुजुर्गों को रहने, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और नियमित देखरेख जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत होती है।

वृद्धाश्रम शुरू होने से जरूरतमंद बुजुर्गों को सुरक्षित आवास के साथ बेहतर वातावरण मिल सकता है। यहां उनके लिए भोजन, स्वास्थ्य संबंधी सहायता, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना हो सकती है। साथ ही उन्हें सामाजिक रूप से जुड़े रहने और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी मिल सकेगा।

विभागीय प्रक्रिया में हो रही देरी

वृद्धाश्रम परियोजना के लंबित रहने का मुख्य कारण विभागीय प्रक्रिया और फाइलों का एक स्तर से दूसरे स्तर तक जाना बताया जा रहा है। किसी भी नई सामाजिक परियोजना के लिए विभिन्न प्रशासनिक स्वीकृतियां और तकनीकी प्रक्रियाएं आवश्यक होती हैं।

हालांकि सामाजिक महत्व की इस योजना में लंबे समय से हो रही देरी को लेकर लोगों में निराशा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रक्रिया में तेजी लाकर वृद्धाश्रम को जल्द शुरू किया जाना चाहिए।

पांच माह पहले नगर प्रशासन ने की थी पहल

करीब पांच माह पहले नगर प्रशासन की ओर से नाथनगर में वृद्धाश्रम की स्थापना के लिए पहल की गई थी। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी।

लेकिन समय बीतने के बावजूद योजना अभी भी विभिन्न स्तरों पर लंबित है। इसके कारण प्रस्तावित वृद्धाश्रम की शुरुआत को लेकर स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आ सकी है।

सामाजिक संगठनों ने भी जताई चिंता

वृद्धाश्रम की जरूरत को देखते हुए सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी योजना को जल्द पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि बुजुर्गों के लिए सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

समाज के कमजोर और असहाय बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। इसलिए इस योजना को प्राथमिकता देकर जल्द निर्णय लेने की जरूरत है।

जल्द निर्णय की उम्मीद

अब नाथनगर के लोगों की नजर नगर प्रशासन और संबंधित विभागों के अगले कदम पर टिकी है। यदि लंबित फाइलों और प्रक्रियाओं का जल्द निष्पादन होता है, तो वृद्धाश्रम परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।