कॉलेज परिसर की स्वच्छता को नई गति, डॉ. सरोज बने स्वच्छता प्रभारी

सबौर (भागलपुर): सबौर स्थित सबौर कॉलेज में बुधवार को एक महत्वपूर्ण 'विकास संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कॉलेज के शैक्षणिक वातावरण, आधारभूत संरचना के विकास और परिसर की साफ-सफाई को एक नई दिशा प्रदान करना था। इस आयोजन में कॉलेज प्रबंधन, शिक्षकों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ।

विकास संवाद: शिक्षा और स्वच्छता पर मंथन

विकास संवाद के दौरान प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ने कॉलेज के सर्वांगीण विकास के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया। प्राचार्य ने कहा कि, "एक उत्तम शैक्षणिक संस्थान तभी बन सकता है जब उसका परिसर न केवल ज्ञान का केंद्र हो, बल्कि वह स्वच्छ और अनुशासित भी हो।" कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेज प्रशासन छात्रों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए छात्र-शिक्षक समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

संवाद में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्णय लिए गए:

शैक्षणिक गुणवत्ता: कक्षाएं समय पर संचालित करने और विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई।

आधारभूत संरचना: कॉलेज पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया, ताकि विद्यार्थियों को शोध और अध्ययन के लिए बेहतर संसाधन मिल सकें।

डॉ. सरोज बने स्वच्छता प्रभारी

कार्यक्रम की सबसे बड़ी घोषणा परिसर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर थी। प्राचार्य ने कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. सरोज को 'स्वच्छता प्रभारी' (In-charge of Sanitation) के रूप में नामित किया है। इस नई जिम्मेदारी को सौंपते हुए प्राचार्य ने कहा कि डॉ. सरोज के नेतृत्व में अब कॉलेज परिसर में स्वच्छता का एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।

डॉ. सरोज की नई भूमिका और कार्ययोजना: प्रभारी के रूप में डॉ. सरोज अब निम्नलिखित क्षेत्रों में सीधे तौर पर निगरानी और कार्यान्वयन करेंगे:

स्वच्छता अभियान: परिसर के बगीचों, कक्षाओं और शौचालय क्षेत्रों की प्रतिदिन सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना।

पर्यावरण जागरूकता: 'ग्रीन कैंपस-क्लीन कैंपस' के तहत वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त परिसर के लिए विशेष ड्राइव चलाना।

छात्र भागीदारी: छात्रों की एक 'स्वच्छता समिति' का गठन करना, ताकि वे स्वयं परिसर को साफ रखने में भागीदार बनें।

डॉ. सरोज ने अपनी नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे। उन्होंने आह्वान किया कि, "कॉलेज हमारा दूसरा घर है और इसे स्वच्छ रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है।"

छात्रों की सक्रिय भागीदारी

विकास संवाद कार्यक्रम में छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने परिसर में पीने के पानी की उचित व्यवस्था और खेल के मैदान के विस्तार की मांग की। प्राचार्य ने आश्वासन दिया कि बजट की उपलब्धता के साथ ही इन मांगों पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा।

एक स्वच्छ और विकसित सबौर कॉलेज का संकल्प

यह विकास संवाद कार्यक्रम सबौर कॉलेज के लिए एक सकारात्मक कदम है। प्राचार्य द्वारा स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के पीछे का उद्देश्य यह है कि छात्र एक स्वच्छ वातावरण में रहकर बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकें। डॉ. सरोज के रूप में एक समर्पित स्वच्छता प्रभारी का मिलना कॉलेज प्रबंधन की गंभीरता को दर्शाता है।

आने वाले दिनों में अब कॉलेज परिसर में स्वच्छता के प्रति न केवल नियम कड़े होंगे, बल्कि इसे एक संस्कृति के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। सबौर कॉलेज का यह 'विकास संवाद' आने वाले समय में अन्य संस्थानों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है, जहाँ प्रशासन और शिक्षक मिलकर परिसर को बदलने का प्रयास कर रहे हैं।