सक्रिय मोड में नीतीश कुमार, संजय झा के आवास पहुंचकर कार्यकर्ताओं से मिले; जिलों के दौरे को लेकर भी बढ़ी हलचल

पटना। बिहार की राजनीति में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार इन दिनों लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लेने के बाद पटना लौटे नीतीश कुमार लगातार विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार सुबह वह जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा के आवास पहुंचे। उनके पहुंचते ही वहां समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई।

नीतीश कुमार के संजय झा के आवास पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार और संजय कुमार झा के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने ‘सुपर सीएम जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए। नीतीश कुमार ने मुस्कुराते हुए हाथ के इशारे से समर्थकों को शांत रहने का संकेत दिया, लेकिन कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। वे लगातार नारे लगाते रहे और अपने नेता के समर्थन में आवाज बुलंद करते रहे।

नीतीश कुमार की हालिया सक्रियता को बिहार की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी संगठन के स्तर पर भी उनकी सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। खासकर जिलों में संभावित दौरे को लेकर हुई बातचीत ने जदयू के कार्यकर्ताओं के बीच नई चर्चा को जन्म दिया है।

संजय झा के आवास पर लोगों से की मुलाकात

संजय कुमार झा के आवास पर पहुंचने के बाद नीतीश कुमार ने वहां मौजूद लोगों से मुलाकात की। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत की और उनकी बातों को सुना। इस दौरान उन्होंने संजय झा से भी बातचीत की।

बताया गया कि नीतीश कुमार ने संजय झा से कहा कि अब आप आ गए हैं, सब लोगों को देख रहे हैं। सभी लोगों से मिलिए, कागज लीजिए और मेरे पास आइए। उनके इस संवाद से यह संकेत मिला कि पार्टी से जुड़े लोगों और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

संजय झा के आवास पर मौजूद लोगों के बीच नीतीश कुमार की मौजूदगी को लेकर काफी उत्साह नजर आया। लंबे समय से मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की राजनीति के केंद्र में रहने वाले नीतीश कुमार जब पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया।

अक्टूबर से जिलों के दौरे की चर्चा

इसी बातचीत के दौरान संजय कुमार झा ने नीतीश कुमार को बताया कि लोगों की मांग है कि अक्टूबर से जिलों में दौरा शुरू किया जाए। इस पर नीतीश कुमार ने कहा, ‘पहले सब कर लीजिए।’

नीतीश कुमार और संजय झा के बीच हुई इस बातचीत को पार्टी संगठन की आगामी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। जिलों का दौरा शुरू होने की स्थिति में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद बढ़ सकता है।

जदयू के लिए जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात, स्थानीय स्तर की समस्याओं को सुनना और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है।

ऐसे में यदि आने वाले समय में नीतीश कुमार जिलों का दौरा करते हैं तो इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ने की संभावना है।

कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह

संजय झा के आवास के बाहर जुटे कार्यकर्ताओं में नीतीश कुमार को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। उनके पहुंचते ही समर्थकों ने नारे लगाना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने जदयू नेताओं के समर्थन में नारे लगाए और अपने नेता का स्वागत किया।

नीतीश कुमार ने कार्यकर्ताओं की ओर देखकर मुस्कुराते हुए हाथ के इशारे से उन्हें शांत रहने को कहा। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का जोश कम नहीं हुआ।

राजनीतिक दलों के लिए कार्यकर्ताओं की सक्रियता महत्वपूर्ण होती है। खासकर जब शीर्ष नेता लंबे समय बाद कार्यकर्ताओं के बीच सीधे पहुंचते हैं तो संगठन के निचले स्तर तक उसका असर देखने को मिलता है।

मेदांता अस्पताल भी पहुंचे थे नीतीश कुमार

नीतीश कुमार की सक्रियता का सिलसिला मंगलवार से ही नहीं बल्कि पिछले कुछ दिनों से दिखाई दे रहा है। एक दिन पहले वह मेदांता अस्पताल भी पहुंचे थे। वहां मौजूद लोगों ने उनसे कहा था कि ‘बिहार आपको बहुत मिस कर रहा है।’

इसके बाद नीतीश कुमार लगातार सार्वजनिक रूप से सक्रिय नजर आ रहे हैं। विभिन्न लोगों से मुलाकात और पार्टी नेताओं के साथ संवाद के कारण राजनीतिक गलियारों में उनकी गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज है।

राजनीति में किसी बड़े नेता की सार्वजनिक सक्रियता को अक्सर संगठन और राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में देखा जाता है। हालांकि किसी भी संभावित कार्यक्रम या रणनीति को लेकर अंतिम तस्वीर पार्टी की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

राज्यसभा की कार्यवाही में भी लिया हिस्सा

राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लेने के बाद नीतीश कुमार पटना लौटे हैं। इसके बाद उनकी सार्वजनिक गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। राज्यसभा में उनकी भूमिका के साथ-साथ बिहार की राजनीति में भी उनकी सक्रियता पर पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर बनी हुई है।

पटना लौटने के बाद लगातार लोगों से मिलना और पार्टी नेताओं के साथ बातचीत करना जदयू संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। उनके राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों का असर जदयू के संगठन पर भी दिखाई देता है। इसलिए उनके किसी भी बड़े राजनीतिक या संगठनात्मक कार्यक्रम को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

जदयू संगठन को लेकर बढ़ सकती है गतिविधि

संजय कुमार झा के साथ हुई बातचीत से यह संकेत जरूर मिलता है कि पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर आने वाले समय में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। जिलों में दौरे की मांग को लेकर चर्चा और नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया ने कार्यकर्ताओं के बीच उत्सुकता पैदा कर दी है।

यदि जिलों में दौरे का कार्यक्रम तैयार होता है तो पार्टी के स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ नीतीश कुमार की सीधी बातचीत हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर की समस्याओं और संगठन की स्थिति की जानकारी भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकती है।

जदयू के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि राज्य के अलग-अलग जिलों में राजनीतिक परिस्थितियां और स्थानीय मुद्दे अलग-अलग होते हैं। शीर्ष नेतृत्व का सीधा संवाद पार्टी को जमीनी स्तर पर अपनी गतिविधियों को समझने में मदद कर सकता है।

‘सुपर सीएम’ नारे से चर्चा

मंगलवार को संजय झा के आवास पर कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए ‘सुपर सीएम जिंदाबाद’ के नारे ने भी राजनीतिक चर्चा को हवा दी। हालांकि नीतीश कुमार ने हाथ के इशारे से समर्थकों को शांत रहने का संकेत दिया।

कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए ऐसे नारों को उनके समर्थकों के उत्साह के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं, नीतीश कुमार की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया के बजाय मुस्कुराते हुए शांत रहने का संकेत देना चर्चा का विषय बना रहा।

कार्यकर्ताओं से संवाद पर जोर

नीतीश कुमार का संजय झा के आवास पर पहुंचना और वहां मौजूद लोगों से मिलना यह बताता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने संजय झा से भी लोगों से मिलने, उनकी बात सुनने और कागज लेने की बात कही। इससे यह संकेत मिलता है कि लोगों की समस्याओं और मांगों को व्यवस्थित तरीके से नेतृत्व तक पहुंचाने की प्रक्रिया को महत्व दिया जा रहा है।

राजनीतिक संगठनों में जनता और कार्यकर्ताओं से मिलने वाली प्रतिक्रिया नीति और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस तरह की मुलाकातों की संख्या बढ़ सकती है।

आगे क्या होगा, इस पर नजर

फिलहाल नीतीश कुमार की लगातार सक्रियता के बीच जदयू के भीतर और राजनीतिक गलियारों में आने वाले दिनों की गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खासकर अक्टूबर से जिलों के दौरे की मांग का मुद्दा सामने आने के बाद कार्यकर्ताओं की नजर पार्टी के अगले कार्यक्रम पर है।

यदि जिलों के दौरे का कार्यक्रम तय होता है तो इससे जदयू के संगठनात्मक अभियान को गति मिल सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, स्थानीय नेताओं से मुलाकात और लोगों की समस्याओं को सुनने के जरिए जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।

फिलहाल मंगलवार की सुबह संजय कुमार झा के आवास पर नीतीश कुमार की मौजूदगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया है। राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लेने के बाद पटना लौटकर लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे नीतीश कुमार की सक्रियता पर अब राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

मेदांता अस्पताल की यात्रा से लेकर संजय झा के आवास पर कार्यकर्ताओं से मुलाकात तक उनकी गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि वह फिलहाल सार्वजनिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जिलों के दौरे को लेकर आगे क्या कार्यक्रम बनता है और जदयू संगठन की गतिविधियां किस दिशा में बढ़ती हैं, इस पर आने वाले दिनों में तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।