जिले में अब तक 27 हजार बालिकाओं को लग चुका है एचपीवी टीका, स्वास्थ्य विभाग ने लक्ष्य को पूरा करने के लिए तेज की रफ्तार

भागलपुर: महिलाओं में होने वाले जानलेवा सर्वाइकल कैंसर (बच्चदानी के मुंह का कैंसर) जैसी गंभीर बीमारी से बेटियों को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी टीकाकरण अभियान को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री बालिका कैंसर प्रतिरक्षण योजना (MBCPY) के तहत जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत अब तक 27 हजार से अधिक बालिकाओं को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का टीका लगाया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के इस संयुक्त प्रयास से किशोरियों में इस घातक बीमारी के प्रति सुरक्षा कवच मजबूत हो रहा है, हालांकि अभी इस आयु वर्ग के एक बड़े लक्ष्य को आच्छादित किया जाना बाकी है, जिसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं।

क्या है एचपीवी टीकाकरण अभियान और इसका महत्व?

महिलाओं में बढ़ते कैंसर के मामलों, खासकर सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए सरकार ने किशोरावस्था में ही बालिकाओं के टीकाकरण पर जोर दिया है:

सर्वाइकल कैंसर से बचाव: मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, वयस्क महिलाओं में होने वाली कैंसर से जुड़ी मौतों में लगभग 17 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले सर्वाइकल कैंसर की होती है। किशोरावस्था (विशेषकर 9 से 15 वर्ष की आयु) में यह टीका लग जाने से भविष्य में इस बीमारी के विकसित होने का खतरा 80 से 85 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

संक्रमण से सुरक्षा: यह टीका महिलाओं को एचपीवी संक्रमण (मुख्य रूप से टाइप 16, 18, 6 और 11) से बचाता है, जो आगे चलकर गर्भाशय ग्रीवा और अन्य अंगों के कैंसर का कारण बनते हैं।

जिले में अब तक की प्रगति और टीकाकरण के आंकड़े

स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण स्तर तक के स्वास्थ्य केंद्रों पर बालिकाओं को टीका लगाने का सिलसिला तेजी से चल रहा है:

27 हजार का आंकड़ा पार: सदर अस्पताल, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (JLNMCH), विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष सत्र आयोजित कर अब तक लगभग 27 हजार किशोरियों को यह जीवनरक्षक टीका दिया जा चुका है।

लक्षित आयु वर्ग: इस अभियान के तहत मुख्य रूप से 9 वर्ष से लेकर 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को शामिल किया गया है। इस आयु वर्ग की किशोरियों को स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से चिन्हित किया जा रहा है।

अभिभावकों और स्कूलों की सहभागिता से मिल रही सफलता

इस टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने मिलकर रणनीति तैयार की है:

स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान: स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार विभिन्न उच्च विद्यालयों और मध्य विद्यालयों का दौरा कर रही हैं। शिक्षकों, अभिभावकों और छात्राओं के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें इस टीके के फायदों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

आयु सत्यापन की प्रक्रिया: छात्राओं के टीकाकरण के लिए स्कूलों के पहचान पत्र (School ID) या आधार कार्ड का उपयोग किया जा रहा है, ताकि सही आयु वर्ग की बालिकाओं को ही प्राथमिकता के आधार पर यह टीका मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग की अगली रणनीति और चुनौतियां

जिले में 27 हजार बालिकाओं के टीकाकरण का आंकड़ा सराहनीय जरूर है, लेकिन कुल लक्षित आबादी (लगभग डेढ़ लाख किशोरियों) को देखते हुए अभी एक लंबा सफर तय करना बाकी है:

सिंगल डोज (Single Dose) पर जोर: पहले इस टीके की दो खुराकें दी जाती थीं, जिसके अंतराल (6 महीने) के कारण कई बार दूसरी खुराक छूटने का जोखिम रहता था। अब नवीनतम दिशा-निर्देशों के तहत 'गार्डासिल' जैसी सिंगल-डोज वैक्सीन के माध्यम से प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है, जिससे शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित हो सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष फोकस: दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई अभिभावकों में जागरूकता की कमी है। इसे दूर करने के लिए एएनएम (ANM) और सहिया/आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिले में 27 हजार बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण होना इस बात का प्रमाण है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी इस महती योजना को लेकर गंभीर है और जनता का सहयोग भी मिल रहा है। सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारी से अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए यह टीका एक अचूक उपाय है। आवश्यकता इस बात की है कि अभियान की गति को और तेज किया जाए ताकि निर्धारित लक्ष्य को समय रहते पूरा किया जा सके और जिले की हर पात्र बालिका इस सुरक्षा चक्र के दायरे में आ सके।