दस करोड़ लोगों को जोड़ने का संकल्प; प्रधानाचार्य ममता कुमारी ने योग और ध्यान को बताया व्यसनों से मुक्ति की अचूक कुंजी

नाथनगर/भागलपुर : आज के आधुनिक और तनावपूर्ण दौर में जहां युवा पीढ़ी और समाज का एक बड़ा वर्ग नशे की दलदल में फंसता जा रहा है, वहीं इस सामाजिक अभिशाप के खिलाफ आध्यात्मिक और नैतिक जनजागरूकता का शंखनाद हो चुका है। इसी कड़ी में भागलपुर के ऐतिहासिक और पौराणिक क्षेत्र नाथनगर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से 'नशामुक्त भारत अभियान' के तहत एक भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में शिरकत की। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं संस्था की प्रधानाचार्य ममता कुमारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्तिगत आदत नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा दीमक है जो हंसते-खेलते परिवारों और स्वस्थ समाज को अंदर से खोखला कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य लक्ष्य आने वाले समय में देश के कम से कम दस करोड़ लोगों को नशामुक्ति से जोड़ना और उन्हें एक स्वस्थ, सकारात्मक जीवनशैली की ओर अग्रसर करना है।

क्या है इस अभियान का मूल उद्देश्य और पृष्ठभूमि?

ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा देशहित और समाज सुधार के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न आध्यात्मिक और सामाजिक अभियान चलाए जाते हैं। नशामुक्त भारत अभियान उन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है:

युवाओं को बचाने की मुहिम: वर्तमान समय में ड्रग्स, शराब, गुटखा और तंबाकू जैसी चीजों का सेवन करने वालों की उम्र लगातार घटती जा रही है। स्कूल और कॉलेज के छात्र भी इसके चंगुल में फंस रहे हैं। इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए ब्रह्माकुमारी संस्थान ने जमीनी स्तर पर जाकर लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण: संस्थान का मानना है कि नशा केवल शारीरिक कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक अशांति का परिणाम है। जब तक व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत नहीं होगी, तब तक वह नशे के जाल से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकता।

प्रधानाचार्य ममता कुमारी का प्रेरक संबोधन: "नशे से मुक्ति का आधार है मानसिक दृढ़ता"

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रधानाचार्य ममता कुमारी का सारगर्भित और ऊर्जावान संबोधन रहा:

नशे के दुष्परिणामों पर चर्चा: उन्होंने उपस्थित लोगों को विस्तार से समझाया कि कैसे नशे की एक छोटी सी लत इंसान के पूरे जीवन, उसके परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा को मलबे में बदल देती है।

दस करोड़ लोगों तक पहुंचने का संकल्प: अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब तक समाज का हर वर्ग इस अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक पूर्ण परिवर्तन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि संस्था ने देश भर में दस करोड़ नागरिकों को नशामुक्ति से जोड़ने का वृहद लक्ष्य रखा है, जिसके तहत घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

योग और ध्यान (Meditation): व्यसनों से मुक्ति का अचूक मार्ग

कार्यक्रम के दौरान योग और राजयोग ध्यान के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया कि कैसे आंतरिक शांति और मानसिक नियंत्रण के जरिए किसी भी बुरी आदत को छोड़ा जा सकता है:

मन की एकाग्रता: ममता कुमारी ने बताया कि अधिकांश लोग तनाव, अवसाद (Depression) याPeer Pressure के कारण नशे की ओर कदम बढ़ाते हैं। नियमित रूप से योग और ध्यान करने से मन शांत रहता है और नकारात्मक विचार स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

इच्छाशक्ति का विकास: राजयोग ध्यान व्यक्ति के भीतर छिपी आत्मिक शक्ति को जागृत करता है, जिससे उसकी आत्म-अनुशासन (Self-discipline) और इच्छाशक्ति इतनी मजबूत हो जाती है कि वह किसी भी प्रकार के व्यसन को आसानी से त्याग सकता है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की सहभागिता और संकल्प

नाथनगर में आयोजित इस कार्यक्रम का प्रभाव स्थानीय लोगों और युवाओं पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला:

शपथ ग्रहण समारोह: कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य ने सभी उपस्थित लोगों, युवाओं और छात्र-छात्राओं को अपने जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की सामूहिक शपथ दिलाई।

महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी: कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने हिस्सा लिया। महिलाओं ने विशेष रूप से चिंता व्यक्त की कि उनके घरों के युवा नशे की वजह से बर्बाद हो रहे हैं, और उन्होंने इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

नाथनगर में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत है। जब तक समाज में प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ नैतिक और आध्यात्मिक चेतना का संचार नहीं होगा, तब तक नशामुक्त समाज की कल्पना को साकार नहीं किया जा सकता। प्रधानाचार्य ममता कुमारी के मार्गदर्शन में योग, ध्यान और आत्मबल के जरिए दस करोड़ लोगों को नशामुक्ति से जोड़ने का यह संकल्प निश्चित रूप से रंग लाएगा और भागलपुर सहित पूरे देश को एक स्वस्थ, उज्ज्वल और व्यसन-मुक्त भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।