पूर्णिया: डगरूआ प्रखंड सभागार में पंचायत समिति की बैठक रही भारी हंगामेदार; बिजली, शिक्षा और जीविका के मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को घेरा, विकास कार्यों पर हुई तीखी बहस
पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के सीमांचल क्षेत्र से स्थानीय प्रशासन, जनप्रनिधियों और ग्रामीण विकास से जुड़ी एक बेहद तीखी और हंगामेदार खबर सामने आ रही है। डगरूआ प्रखंड सभागार में मंगलवार को पंचायत समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जो शुरू से लेकर अंत तक भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक की शुरुआत होते ही क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से आए मुखिया, पंचायत समिति सदस्यों (पंसस) और जनप्रतिनिधियों ने बिजली की लचर व्यवस्था, सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता, जीविका दीदियों के संचालन में आ रही परेशानियों और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर अधिकारियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। सदन के भीतर जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोक देखने को मिली। कई मामलों में संतोषजनक जवाब न मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने तक की चेतावनी दे डाली, जिससे प्रखंड प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
सीमांचल के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय निकायों की बैठकों की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच चल रहे शीतयुद्ध, बुनियादी समस्याओं के जाल और विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण आइए समझते हैं।
बैठक की पृष्ठभूमि: डगरूआ प्रखंड सभागार में क्यों गरमाया माहौल?
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत पंचायत समिति की बैठकें क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए सबसे बड़ा मंच होती हैं, लेकिन जब प्रशासनिक उदासीनता हद पार कर जाती है, तो ऐसे मंच संघर्ष का मैदान बन जाते हैं।
जनप्रतिनिधियों का संचित आक्रोश: डगरूआ प्रखंड के विभिन्न गांवों से चुनकर आए प्रतिनिधियों का कहना था कि वे पिछले कई महीनों से अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कागजी आश्वासनों के अलावा जमीन पर कुछ नहीं होता।
बिजली और पानी का संकट: मंगलवार को जब बैठक शुरू हुई, तो सबसे पहले ग्रामीण इलाकों में बिजली की आंख-मिचौली और ट्रांसफॉर्मर जलने की समस्याओं को लेकर सदस्यों ने अधिकारियों को घेरना शुरू कर दिया।
अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल: कई विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों के बैठक से नदारद रहने पर जनप्रतिनिधियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जिसे लेकर सदन में हंगामा और तेज हो गया।
बैठक में उठे प्रमुख मुद्दे और तीखी बहस के बिंदु
डगरूआ प्रखंड सभागार में आयोजित इस हंगामेदार बैठक के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर सदन गरमाया रहा:
बिजली विभाग की मनमानी और लचर व्यवस्था: सदस्यों ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में घोषित रोस्टर के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर महीनों बिजली नहीं सुधारी जाती, जिससे किसानों की सिंचाई और छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) में धांधली: सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब होने और कई विद्यालयों में मेनू के अनुसार खाना न दिए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया। जांच के नाम पर खानापूर्ति करने का ठीकरा शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर फोड़ा गया।
जीविका और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: जीविका समूहों के संचालन में आ रही तकनीकी अड़चनों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर डॉक्टरों की नियमित अनुपस्थिति पर भी सदन में तीखे सवाल पूछे गए। ग्रामीण अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाइयों के अभाव को लेकर जनता का दर्द जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों के सामने रखा।
नल-जल योजना और भ्रष्टाचार: हर घर नल का जल योजना के तहत कई वार्डों में पाइपलाइन टूटने और पानी की आपूर्ति ठप होने के बावजूद कागजों पर राशि निकासी का सनसनीखेज मामला उठाया गया।
जनप्रतिनिधियों के तेवर और प्रशासनिक सफाई
सदन के भीतर बढ़ते दबाव को देखकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचल अधिकारी (CO) सहित अन्य वरीय अधिकारियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
अधिकारियों का आश्वासन: अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को शांत कराते हुए कहा कि उनके द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को नोट कर लिया गया है। एक सप्ताह के भीतर संबंधित विभागों के साथ समीक्षा कर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
कार्रवाई का भरोसा: मध्याह्न भोजन और बिजली से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए विशेष प्रशासनिक टीमों के गठन की घोषणा की गई, जिसके बाद जाकर कुछ हद तक माहौल शांत हुआ।
पंचायती राज व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की चुनौतियां
डगरूआ की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक प्रशासनिक अमला जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बनेगा, तब तक जमीनी विकास योजनाओं का लाभ धरातल पर नहीं उतर सकेगा।
अधिकार और समन्वय की कमी: जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि अधिकारी उन्हें महत्व नहीं देते, जिसके कारण जनता के काम अटक जाते हैं। दूसरी ओर, प्रशासन अपने सीमित संसाधनों और नियमों का हवाला देता है।
डगरूआ प्रखंड सभागार में मंगलवार को आयोजित पंचायत समिति की यह हंगामेदार बैठक इस बात का जीवंत उदाहरण है कि ग्रामीण भारत में बुनियादी विकास को लेकर जनता का धीरज अब जवाब दे रहा है। बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों पर जनप्रतिनिधियों का यह मुखर होना इस बात का संकेत है कि अब सिस्टम को पारदर्शी बनना ही होगा। यदि प्रशासन ने इस बैठक में उठे मुद्दों पर गंभीरता से अमल नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह असंतोष और बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।