सड़कों की सुध लेने के लिए पथ निर्माण विभाग ने कसी कमर; संवेदकों के 'ओपीएमआरसी' अनुबंधों की हो रही है समीक्षा, बरसात के बाद शुरू होगा मरम्मत का विशेष अभियान
भागलपुर, मुख्य संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर समेत पूरे राज्य में सड़कों की स्थिति को दुरुस्त रखने और रखरखाव में लापरवाही बरतने वाले संवेदकों पर शिकंजा कसने के लिए पथ निर्माण विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। विभाग द्वारा शहर और ग्रामीण इलाकों की तमाम सड़कों के मेंटेनेंस के लिए फाइलों को खंगाला जा रहा है। इसके तहत मुख्य रूप से संवेदकों के 'आउटपुट एंड परफॉर्मेंस-बेस्ड रोड एसेट्स मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट' (OPMRC) की समीक्षा की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सी सड़क इस योजना के दायरे में आती है और किस सड़क पर रखरखाव की क्या स्थिति है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बरसात का मौसम समाप्त होते ही ओपीएमआरसी पीरियड के तहत सड़कों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
क्या है ओपीएमआरसी (OPMRC) योजना और इसकी जरूरत?
बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग द्वारा सड़कों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए ओपीएमआरसी नीति लागू की गई थी:
सड़कों का तय अवधि तक संधारण: इस अनुबंध के तहत सड़क बनाने वाली या संबंधित निर्माण एजेंसी (संवेदक) को ही एक निश्चित अवधि तक उस सड़क के रखरखाव, पैच वर्क, और छोटे-मोटे गड्ढों को भरने की जिम्मेदारी उठानी होती है।
जवाबदेही तय करना: इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ठेकेदार केवल सड़क बनाकर न छूटे, बल्कि अनुबंध की समयावधि तक सड़क की गुणवत्ता और उसकी सेहत बरकरार रखे। विभाग अब इसी बात की जांच कर रहा है कि वर्तमान में जिन सड़कों पर गड्ढे या क्षति है, वे ओपीएमआरसी के अंतर्गत आती हैं या नहीं।
फाइलों की तलाश: किस सड़क का क्या है हाल?
विभाग द्वारा निकाली जा रही फाइलों और रिपोर्टों से यह पता लगाया जा रहा है कि किस संवेदक ने अपनी समयावधि के दौरान सड़क के रखरखाव का कार्य कब-कब किया है:
योजना में शामिल सड़कों की पहचान: जिन सड़कों के अनुबंध अभी ओपीएमआरसी पीरियड के अंतर्गत सक्रिय हैं, उन पर मरम्मत कराने की जिम्मेदारी संबंधित संवेदक की ही होगी। संवेदकों को यह निर्देश दिया जाएगा कि वे अनुबंध के नियमों के तहत सड़कों को तुरंत चकाचक करें।
जिन सड़कों का ओपीएमआरसी नहीं, उनका विकल्प: विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन सड़कों का ओपीएमआरसी अनुबंध समाप्त हो चुका है या जो इस योजना के दायरे में नहीं आती हैं, उनकी विशेष मरम्मत और देखरेख सीधे तौर पर पथ निर्माण विभाग अपने स्तर से करवाएगा। इसके लिए भी अनुमानित प्राक्कलन और प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
बरसात के बाद धरातल पर उतरेगा काम
मानसून और भारी बरसात के मौसम को देखते हुए फिलहाल सड़कों पर डामर या गिट्टी का काम करना तकनीकी रूप से संभव नहीं होता है, क्योंकि बारिश में सड़कें और अधिक क्षतिग्रस्त हो जाती हैं:
मानसून के बाद विशेष अभियान: कार्यपालक अभियंता विमलेश कुमार ने जानकारी दी है कि ओपीएमआरसी की पूरी रिपोर्ट और समीक्षा आने के बाद, बरसात का मौसम खत्म होते ही नियमानुसार सड़कों की मरम्मत का काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा।
यात्रियों को मिलेगी राहत: बरसात के दिनों में शहर की कई सड़कों पर जलभराव और गड्ढों के कारण आम जनता व वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विभाग की इस कवायद से यह उम्मीद बंध गई है कि बरसात के तुरंत बाद शहर की प्रमुख सड़कों की तस्वीर बदल जाएगी और आवागमन सुगम हो सकेगा।
पथ निर्माण विभाग द्वारा संवेदकों के ओपीएमआरसी अनुबंधों को खंगालने का यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अहम पहल है। इससे न केवल लापरवाह संवेदकों पर नकेल कसेगी, बल्कि शहरवासियों को गड्ढामुक्त और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कें मिल सकेंगी। विभाग की यह सख्ती आने वाले दिनों में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मददगार साबित होगी।