घंटों हांफती रही सिल्क सिटी सुबह नौ से शाम चार बजे तक मुख्य मार्गों पर लगा महाजाम, चिलचिलाती धूप में वाहनों के पहिए थमे; लोग पैदल गंतव्य तक पहुंचने को हुए विवश

भागलपुर : बिहार के प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक शहर भागलपुर में यातायात व्यवस्था की पोल एक बार फिर उस वक्त खुल गई जब शहर के मुख्य मार्ग भीषण जाम की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों के लिए यह दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा, क्योंकि सुबह के ठीक नौ बजे से शुरू हुआ जाम का यह सिलसिला बिना किसी राहत के शाम के चार बजे तक यानी लगातार सात घंटे तक जारी रहा। शहर के व्यस्त चौराहों से लेकर बाइपास और मुख्य बाजारों की सड़कों तक वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हालात इतने बेकाबू हो गए कि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियां भी सायरन बजाती हुई घंटों जाम में फंसी रहीं। मजबूरन, दफ्तर जाने वाले कर्मियों, स्कूली बच्चों और मरीजों को अपनी गाड़ियां छोड़कर चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ा।

क्या था महाजाम का मुख्य केंद्र और विकराल रूप?

भागलपुर के कचहरी चौक, स्टेशन चौक, कोतवाली चौक, खलीफाबाग, मनाली चौक और घंटाघर जैसे अति-व्यस्त इलाकों में सुबह से ही वाहनों का भारी दबाव देखने को मिला।

अचानक वाहनों की भारी तादाद: सुबह के वक्त जब लोग अपने दफ्तरों, स्कूलों और जरूरी कामों के लिए निकले, तो सड़कों पर पहले से ही गाड़ियों की संख्या अधिक थी। इसी दौरान कुछ भारी वाहनों के प्रवेश और सड़क किनारे बेतरतीब खड़े ऑटो व ई-रिक्शा ने स्थिति को बिगाड़ना शुरू कर दिया।

ट्रैफिक व्यवस्था हुई धड़ाम: एक बार जब जाम लगना शुरू हुआ, तो वाहन चालकों ने अपनी लेन छोड़कर आगे निकलने की होड़ मचा दी, जिससे चारों तरफ से गाड़ियां आमने-सामने आ गईं और देखते ही देखते यह एक विशालकाय 'ग्रिड-लॉक' (Grid-lock) में तब्दील हो गया।

आम जनता का दर्द: सात घंटे तक फंसे रहे लोग

इस भीषण जाम के कारण आम नागरिकों को जिस मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा, उसने प्रशासनिक दावों की हवा निकाल दी:

पैदल चलने को मजबूर हुए लोग: कई ऐसे लोग थे जिन्हें ट्रेन पकड़नी थी या जरूरी बैठकों में शामिल होना था, वे घंटों एक ही जगह पर फंसे रहने के बाद अपनी कार या ऑटो से उतर पड़े और तपती धूप में पैदल ही रेलवे स्टेशन या अपने दफ्तरों की ओर दौड़ लगाते दिखे।

स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की फजीहत: दोपहर के वक्त धूप और उमस के बीच स्कूल की बसें और वैन जब घंटों जाम में फंसी रहीं, तो छोटे-छोटे बच्चे भूख और प्यास से बेहाल होकर रोते नजर आए। बुजुर्गों और मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो रही थी।

एम्बुलेंस भी फंसी रही: सबसे दर्दनाक दृश्य तब देखने को मिला जब एक गंभीर मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस बीच चौराहे पर जाम के समंदर में फंस गई। ड्राइवर लगातार सायरन बजाता रहा, लेकिन आगे खिसकने के लिए एक इंच की भी जगह नहीं थी।

क्यों लगती है बार-बार ऐसी स्थिति? (जाम के प्रमुख कारण)

भागलपुर में यह कोई पहली बार नहीं है जब शहर घंटों जाम की चपेट में आया हो, लेकिन सात घंटे तक शहर का थम जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

अनियंत्रित ऑटो और ई-रिक्शा: शहर की सड़कों पर बिना किसी रूट चार्ट के दौड़ रहे हजारों ई-रिक्शा और ऑटो कहीं भी बीच सड़क पर अचानक ब्रेक लगा देते हैं या सवारी बैठाने लगते हैं, जो मुख्य जाम का सबसे बड़ा कारण है।

सड़क किनारे अवैध पार्किंग और अतिक्रमण: दुकानदारों द्वारा दुकानों का सामान सड़क तक फैला देना और खरीदारों द्वारा अपनी गाड़ियां सीधे मुख्य सड़क पर पार्क कर देना यातायात को पूरी तरह बाधित कर देता है।

याट्रिक पुलिस बल की कमी और निष्क्रियता: कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी या तो नदारद दिखे या फिर मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे। जब तक अधिकारी मौके पर पहुंचे, तब तक स्थिति हाथ से निकल चुकी थी।

प्रशासनिक अमले की नींद टूटी, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी

जैसे-जैसे दिन ढलता गया और जाम की यह खबर सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया के जरिए प्रशासन तक पहुंची, वैसे ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया:

दलबल के साथ उतरे अधिकारी: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ट्रैफिक डीएसपी और कई थानों की पुलिस फोर्स सड़कों पर उतरी। भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई और बेतरतीब खड़े वाहनों को क्रेन की मदद से हटाया गया।

शाम चार बजे के बाद मिली राहत: लगातार सात घंटे के कड़े संघर्ष के बाद शाम करीब चार से साढ़े चार बजे के आसपास जाकर यातायात धीरे-धीरे सामान्य होना शुरू हुआ, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।

भागलपुर में सुबह नौ से शाम चार बजे तक लगे इस महाजाम ने यह साबित कर दिया है कि शहर का ट्रैफिक प्रबंधन और बुनियादी ढांचा बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव को झेलने में पूरी तरह असमर्थ है। जब तक प्रशासन अवैध पार्किंग, बेकाबू ई-रिक्शा और सड़क किनारे के अतिक्रमण पर स्थायी और कठोर कार्रवाई नहीं करता, तब तक शहर की जनता यूं ही सड़कों पर पसीना बहाती और जाम के आंसुओं से जूझती रहेगी। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी घटना के बाद प्रशासन कोई ठोस कार्ययोजना बनाता है या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद फाइलों में दफ्तर बनकर रह जाता है।