टेटियाबंबर प्रखंड के बनहरा और बनगामा पंचायतों में चलेगा विशेष टीबी स्क्रीनिंग अभियान: चलंत एक्स-रे वाहन के जरिए गाँव-गाँव संभावित मरीजों की होगी पहचान, स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से उन्मूलन की जगी उम्मीद

देश और राज्य से क्षय रोग (टीबी) जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत मुंगेर जिले के टेटियाबंबर प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक विशेष और व्यापक अभियान की शुरुआत की जा रही है। इसके तहत प्रखंड की बनहरा और बनगामा पंचायत में विशेष टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें चलंत एक्स-रे वाहन (Mobile X-ray Van) के माध्यम से सीधे गाँव-गाँव और टोले-टोले तक पहुँचकर संभावित मरीजों की पहचान करेंगी और मौके पर ही उनकी जांच सुनिश्चित करेंगी।

टीबी जैसी बीमारी के खात्मे की दिशा में स्वास्थ्य विभाग का यह कदम बेहद सराहनीय माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर जानकारी के अभाव में लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। इस चलंत वाहन के माध्यम से अब लोगों को अपने ही गाँव में आधुनिक जाँच की सुविधा मिल सकेगी।

क्या है पूरा मामला? (अभियान की रूपरेखा और कार्यप्रणाली)

टीबी मुक्त भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति और प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी के नेतृत्व में यह विशेष अभियान तैयार किया गया है।

चलंत एक्स-रे वाहन की सुविधा: पारंपरिक रूप से टीबी की जाँच के लिए मरीजों को सदर अस्पताल या दूरदराज के स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता था, जिससे कई लोग कतराते थे। इस समस्या के समाधान के लिए अब अत्याधुनिक मशीनों से लैस चलंत एक्स-रे वाहन सीधे बनहरा और बनगामा पंचायतों के विभिन्न गाँवों में पहुँचेगा।

लक्षण आधारित पहचान और बलगम जाँच: मेडिकल टीम द्वारा घर-घर जाकर या शिविर लगाकर उन लोगों की पहचान की जाएगी जिन्हें लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन कम होना या सीने में दर्द जैसी शिकायतें हैं। ऐसे संदिग्ध मरीजों के एक्स-रे और बलगम के नमूने मौके पर ही लिए जाएंगे।

निःशुल्क इलाज और दवाइयों का वितरण: यदि जाँच में किसी व्यक्ति में टीबी की पुष्टि होती है, तो सरकार के नियमानुसार उन्हें तत्काल निःशुल्क दवाइयों का कोर्स शुरू किया जाएगा। साथ ही, पोषण योजना के तहत उनके बैंक खाते में सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और स्वास्थ्य टीमों की सक्रियता

इस अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका है।

आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका: अभियान से पहले आशा कार्यकर्ताओं और सेविकाओं को घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने और संभावित मरीजों की सूची तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। वे ग्रामीणों को बताएंगी कि किस दिन चलंत एक्स-रे वाहन उनके गाँव में आने वाला है।

टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों का दूर होना: आज भी समाज में टीबी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और सामाजिक डर मौजूद है, जिसके कारण लोग खुलकर सामने नहीं आते। स्वास्थ्य कर्मी चौपाल लगाकर लोगों को यह समझाएंगे कि टीबी एक पूरी तरह से ला इलाज बीमारी नहीं है, बल्कि समय पर सही दवा खाने से यह जड़ से खत्म हो जाती है।

ग्रामीणों में उत्साह और संतोष: बनहरा और बनगामा पंचायतों के ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि गाँव के दरवाजे पर आकर इस तरह की उच्चस्तरीय मेडिकल जाँच होने से गरीबों का समय और पैसा दोनों बचेगा।

स्वास्थ्य प्रशासन की प्रतिबद्धता और लक्ष्य

भारत सरकार के वर्ष 2025-2026 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।

माइक्रोप्लान के तहत संचालन: प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी की देखरेख में एक सुव्यवस्थित माइक्रोप्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत तय तिथियों पर दोनों पंचायतों के हर एक वार्ड और टोले को कवर किया जाएगा।

सफलता के पैमाने: स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के सक्रिय खोज अभियान (Active Case Finding) से छुपे हुए मरीजों का समय पर पता चल जाएगा, जिससे समुदाय में संक्रमण फैलने की चेन को तोड़ा जा सकेगा।

टेटियाबंबर प्रखंड के बनहरा और बनगामा पंचायतों में चलंत एक्स-रे वाहन के जरिए शुरू होने जा रहा यह विशेष टीबी स्क्रीनिंग अभियान ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। समय पर जाँच, मुफ्त इलाज और जनता के द्वार तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच टीबी जैसी बीमारी के खात्मे की राह को बेहद आसान बना देगी। इस महाअभियान की सफलता से न केवल प्रभावित मरीजों को नया जीवन मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में हमारा समाज पूरी तरह टीबी मुक्त होने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ा सकेगा।