बक्सर में NEET पेपर लीक और लाठीचार्ज के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन, किला मैदान से अंबेडकर चौक तक निकाला जुलूस; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
बक्सर: कथित NEET पेपर लीक मामले और छात्र आंदोलन के दौरान पटना तथा दिल्ली में हुए लाठीचार्ज के विरोध में शनिवार को बक्सर में छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शहर के ऐतिहासिक किला मैदान से अंबेडकर चौक तक विशाल जुलूस निकालकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखता रहा।
शनिवार सुबह से ही किला मैदान में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न छात्र संगठनों के सदस्य जुटने लगे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर परीक्षा में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लिखी गई थी। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
निर्धारित समय पर किला मैदान से जुलूस शुरू हुआ, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए अंबेडकर चौक पहुंचा। रास्ते भर प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च किया और सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई। जुलूस के कारण कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ, हालांकि पुलिस और यातायात विभाग के अधिकारियों ने वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था कर स्थिति को सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया।
अंबेडकर चौक पर आयोजित सभा में विभिन्न छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुशवाहा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा कमजोर होता है, तो इसका सीधा असर देश के शिक्षा तंत्र और युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
सभा के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों को मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी सफलता केवल उनकी योग्यता और मेहनत के आधार पर तय होगी। इसी उद्देश्य से उन्होंने परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार, प्रश्नपत्रों की बेहतर सुरक्षा और जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रदर्शन के दौरान कई छात्र नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि यदि किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को लेकर इतने गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो जवाबदेही तय होना आवश्यक है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था के लिए है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए किला मैदान, जुलूस मार्ग और अंबेडकर चौक सहित संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्वयं सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और लगातार स्थिति की निगरानी करते रहे। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने का अनुरोध किया।
हालांकि प्रदर्शन के कारण शहर के कुछ हिस्सों में यातायात की रफ्तार धीमी रही, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन के समन्वय से किसी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनी। कई स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस ने वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला, जिससे आम लोगों को अपेक्षाकृत कम परेशानी हुई।
बक्सर के व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने छात्रों की मांगों को उचित बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि अन्य ने कहा कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए ताकि आम जनजीवन प्रभावित न हो। कई अभिभावकों ने भी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही और साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध जांच और पारदर्शी कार्रवाई से ही छात्रों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, NEET विवाद अब केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। विभिन्न राज्यों में हो रहे छात्र आंदोलन इस बात का संकेत हैं कि युवाओं के बीच परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं मौजूद हैं।
फिलहाल बक्सर में प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया और प्रशासन ने राहत की सांस ली। हालांकि छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।