गोराडीह और जगदीशपुर प्रखंड में रविवार का दिन 'अंधेरे' में बीता; पेड़ों की कटाई के कारण बिजली गुल, लोग रहे बेहाल

भागलपुर: बिजली विभाग की मनमानी और लचर प्रबंधन का खामियाजा रविवार को गोराडीह और जगदीशपुर प्रखंड के दर्जनों गांवों के निवासियों को भुगतना पड़ा। रविवार के दिन, जब लोग छुट्टी के कारण घरों में थे और कई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे थे, तभी सुबह से ही बिजली की आपूर्ति ठप कर दी गई। बिजली विभाग द्वारा क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और छंटाई (Trimming) के नाम पर की गई इस लंबी बिजली कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया।

छुट्टी के दिन बिजली कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें

रविवार का दिन घर के कार्यों और आराम के लिए माना जाता है, लेकिन बिजली की आंख-मिचौनी ने ग्रामीणों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। गोराडीह और जगदीशपुर के कई गांव सुबह से ही अंधेरे की आगोश में थे। क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि विभाग द्वारा बिजली कटौती की सूचना पहले से नहीं दी गई थी। जैसे ही सुबह हुई, बिजली गायब हो गई और देर शाम तक बहाल नहीं हुई, जिससे लोगों के दैनिक क्रियाकलाप बुरी तरह प्रभावित हुए।

पानी और भोजन की किल्लत

बिजली कटने का सबसे बुरा असर घरों में पानी की आपूर्ति पर पड़ा। अधिकांश घरों में मोटर पंप (Submersible) से ही पानी की टंकी भरी जाती है। बिजली न रहने के कारण पानी की टंकियां खाली हो गईं, जिससे लोगों को पीने और नहाने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। कई लोग दूर के चापाकलों (Hand pumps) से पानी ढोने को मजबूर हुए।

यही हाल भोजन की व्यवस्था का भी था। कई घरों में फ्रिज में रखी खाद्य सामग्री खराब होने के कगार पर पहुंच गई। ग्रामीण इलाकों में, जहां लोग दोपहर के भोजन के लिए बिजली के उपकरणों (जैसे इंडक्शन, मिक्सर या वॉटर फिल्टर) पर निर्भर हैं, उन्हें बहुत परेशानी हुई। गृहिणियों ने बताया कि पानी की कमी के कारण रसोई के काम भी समय पर पूरे नहीं हो पाए।

पेड़ों की कटाई का विवाद: योजना का अभाव

बिजली विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि मानसून से पहले और तारों के पास बढ़ रही शाखाओं को काटने के लिए बिजली बंद करना आवश्यक था ताकि शॉर्ट सर्किट या दुर्घटना न हो। हालांकि, ग्रामीणों का सवाल है कि क्या इस तरह का काम सुनियोजित तरीके से नहीं हो सकता था?

अघोषित कटौती: ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने काम के समय की सही जानकारी नहीं दी थी।

प्रबंधन पर सवाल: लोगों ने पूछा कि क्या यह काम रात के समय या किसी कार्यदिवस (Working day) पर नहीं किया जा सकता था, जब प्रभाव कम हो? पूरे रविवार का दिन बिजली काट देना विभाग की कार्यकुशलता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

छात्रों और व्यापारियों पर मार

गर्मी का मौसम होने के कारण बिजली के बिना घरों में दम घुटने जैसी स्थिति हो गई थी। बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका असर पड़ा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र, जो रविवार को अतिरिक्त पढ़ाई करते हैं, वे बिना पंखे और रोशनी के काफी परेशान रहे। वहीं, क्षेत्र के छोटे व्यापारी, जो अपनी दुकानों में इलेक्ट्रानिक उपकरणों का उपयोग करते हैं, उनका काम पूरी तरह ठप रहा।

ग्रामीणों में आक्रोश

जगदीशपुर प्रखंड के एक स्थानीय नागरिक ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, "बिजली विभाग को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। पेड़ काटना जरूरी है, लेकिन जनता को प्यासा और परेशान रखकर नहीं। अगर उन्हें काम करना था, तो वे अलग-अलग फीडर में बारी-बारी से कटौती कर सकते थे, ताकि पूरा इलाका एक साथ अंधेरे में न डूबे।"

बिजली विभाग की चुप्पी

क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति केंद्र (सब-स्टेशन) के अधिकारियों से जब इस बारे में संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों के तहत काम जरूरी था। लेकिन, ग्रामीणों के आक्रोश और असुविधा पर उन्होंने कोई स्पष्ट माफी नहीं मांगी, केवल काम पूरा होने का आश्वासन दिया।

 सुधरे व्यवस्था का इंतजार

रविवार को गोराडीह और जगदीशपुर में बिजली की जो स्थिति रही, वह विभाग और उपभोक्ता के बीच के बढ़ते फासले को दर्शाती है। एक ओर विभाग सुरक्षा का हवाला देता है, तो दूसरी ओर आम जनता को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझना पड़ता है। ग्रामीण अब मांग कर रहे हैं कि भविष्य में जब भी इस तरह का मेंटेनेंस कार्य हो, तो उसकी सूचना कम से कम 24 घंटे पहले सार्वजनिक की जाए ताकि वे अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें।

यह घटना सीख है कि विकास और रखरखाव के कार्य जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही किए जाने चाहिए। तब तक के लिए, ग्रामीण अपने अगले रविवार के बेहतर होने की उम्मीद कर रहे हैं।