पुलिसकर्मियों की शूटिंग क्षमता का होगा सरप्राइज टेस्ट, हथियारों के रखरखाव और संचालन की भी होगी जांच
भागलपुर :अब पुलिसकर्मियों की शूटिंग क्षमता के साथ-साथ उनके द्वारा हथियार रखने, संभालने और उसके रखरखाव के तौर-तरीकों की भी सघन जांच होगी। बिहार पुलिस बल को अधिक पेशेवर, आधुनिक और हर परिस्थिति के लिए तैयार बनाने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत वरीय अधिकारी कभी भी किसी भी स्थान पर पहुंचकर पुलिसकर्मियों की तैयारी और हथियारों से जुड़ी जानकारी का औचक परीक्षण कर सकेंगे।
राज्य में पुलिस बल को लगातार आधुनिक असॉल्ट राइफलें और पिस्टल समेत अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लेकिन आंतरिक रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि कई पुलिसकर्मी इन आधुनिक हथियारों के संचालन में अपेक्षित दक्षता नहीं रखते। इसी कमी को दूर करने के लिए अब केवल फायरिंग कौशल ही नहीं, बल्कि हथियारों को सुरक्षित रखने, साफ-सफाई, रखरखाव और सही तरीके से कैरी करने के तरीकों की भी बारीकी से जांच की जाएगी।
कभी भी हो सकता है सरप्राइज टेस्ट
नई व्यवस्था के तहत पुलिसकर्मियों को पहले से सूचना दिए बिना शूटिंग क्षमता और हथियारों से संबंधित जानकारी की जांच की जा सकती है। इसका मकसद यह देखना है कि पुलिसकर्मी वास्तविक ड्यूटी और आपात परिस्थितियों में हथियारों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए कितने तैयार हैं। वरीय अधिकारी किसी भी समय पुलिसकर्मियों की तैयारी का आकलन कर सकेंगे।
निशानेबाजी को लेकर पुलिस बल के सामने कई चुनौतियां भी हैं। फील्ड ड्यूटी और तनावपूर्ण परिस्थितियों में जवानों की फायरिंग क्षमता तथा शूटिंग रेंज के कम अनुभव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब इन कमियों को दूर करने के लिए पुलिसकर्मियों के बीच अनुभव और तकनीकी कौशल साझा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
भागलपुर के पुलिसकर्मी जमालपुर में करते हैं अभ्यास
भागलपुर पुलिस लाइन के डीएसपी केशव कुमार के अनुसार, हथियारों की देखरेख और साफ-सफाई के लिए पुलिस लाइन में तीन पुलिसकर्मियों की तैनाती है। भागलपुर के पुलिसकर्मियों को शूटिंग अभ्यास के लिए मुंगेर जिले के जमालपुर भेजा जाता है। वहीं कोसी और सीमांचल क्षेत्र के पुलिसकर्मी सुपौल के वीरपुर में शूटिंग अभ्यास करते हैं।
पुलिस मुख्यालय का मानना है कि केवल हथियार उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। पुलिसकर्मी को उसके संचालन, रखरखाव और सुरक्षित उपयोग की पूरी जानकारी भी होनी चाहिए। किसी भी आपात स्थिति में सही निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई के लिए हथियारों पर बेहतर पकड़ जरूरी है।
आधुनिक हाइब्रिड फायरिंग रेंज पर काम
पुलिसकर्मियों की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य में आधुनिक हाइब्रिड फायरिंग रेंज विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम चल रहा है। इन रेंज में आधुनिक तकनीक आधारित वर्चुअल और लाइव फायरिंग प्रशिक्षण की सुविधा मिलने की संभावना है। इससे जवानों को विभिन्न परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर अभ्यास का अवसर मिलेगा।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि औचक जांच का उद्देश्य किसी पुलिसकर्मी को दंडित करना नहीं, बल्कि समय रहते उसकी कमियों को पहचानकर दूर करना है। इस संबंध में सभी जिलों के एसपी को व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
भागलपुर में नियमित प्रशिक्षण
भागलपुर में आर्म्स से संबंधित मामलों को लेकर मंगलवार और शुक्रवार को शिफ्टवार पुलिसकर्मियों से जानकारी ली और दी जा रही है। इसके अलावा महीने में एक बार पुलिस लाइन में हथियारों से संबंधित विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाता है। पुलिस लाइन में तीन आर्मोरर इंचार्ज तैनात हैं, जो हथियारों की देखरेख के साथ किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में पुलिसकर्मियों को आवश्यक जानकारी देते हैं। भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि हथियारों से संबंधित जानकारी और प्रशिक्षण को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सरप्राइज टेस्ट और नियमित प्रशिक्षण से पुलिस बल की वास्तविक तैयारियों का आकलन बेहतर ढंग से किया जा सकेगा। साथ ही कमजोरियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात या चुनौतीपूर्ण स्थिति में पुलिसकर्मी अधिक कुशलता और प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।