झिटकाही मधुबन पंचायत के गोपालपुर गांव में तड़के टूटा तिरहुत नहर का तटबंध: सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल डूबी, ग्रामीणों में गहरी चिंता और जल निकासी की गंभीर समस्या

बिहार के ग्रामीण और कृषि प्रधान इलाकों में इन दिनों जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की पोल खोलती एक बड़ी घटना सामने आई है। मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत आने वाली झिटकाही मधुबन पंचायत के गोपालपुर गांव में अहले सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक तिरहुत नहर का तटबंध (Embankment) टूट गया। तटबंध टूटने से नहर का तेज और अनियंत्रित पानी सीधे गोपालपुर गांव के खेतों में सैलाब की तरह फैल गया। इस अचानक आई आपदा के कारण इलाके के सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि पर लहलहाती धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। इस भारी तबाही से किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी चिंता और आक्रोश का माहौल है। इसके साथ ही इलाके में जल निकासी (Water Drainage) की एक विकट समस्या भी खड़ी हो गई है।

तड़के चार बजे हुआ हादसा, सोते रहे ग्रामीण और खेतों में फैल गया पानी

यह घटना अहले सुबह लगभग चार बजे की है, जब चारों तरफ घना सन्नाटा था और ग्रामीण अपनी नींद में थे।

अचानक टूटा तटबंध: तिरहुत नहर का पानी अचानक अत्यधिक दबाव या कमजोर संरचना के कारण गोपालपुर गांव के पास अचानक टूट गया। तटबंध टूटने के साथ ही पानी के बहाव की तेज आवाज गूंज उठी।

फसलों का जलमग्न होना: देखते ही देखते नहर का सारा पानी खेतों की ओर मुड़ गया। गोपालपुर गांव के किसानों ने कुछ ही घंटों पहले जिन खेतों में अपनी उम्मीदों के साथ धान की फसल लहलहाती देखी थी, वे खेत अब पानी के विशाल जलाशय में तब्दील हो चुके हैं। पानी का स्तर इतना अधिक था कि धान की बालियां तक डूब गईं।

सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

गोपालपुर गांव मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है और यहां के किसानों की आजीविका का मुख्य साधन धान की खेती ही है। इस दुर्घटना ने किसानों की कमर तोड़ दी है:

खून-पसीने की कमाई पर संकट: किसानों ने कर्ज लेकर और अपनी जमा-पूंजी लगाकर खाद, बीज और सिंचाई का प्रबंध कर धान की फसल तैयार की थी। फसल कटाई के मुहाने पर थी या बढ़ने की अवस्था में थी, लेकिन पानी में लंबे समय तक डूबे रहने से उसके सड़ने का खतरा पैदा हो गया है।

आर्थिक तंगी का अंदेशा: फसल के इस तरह अचानक बर्बाद हो जाने से किसानों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते पानी नहीं निकला, तो बची-कुची फसल भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी और उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी।

जल निकासी की गंभीर समस्या और जनजीवन प्रभावित

इस जलप्रलय के कारण केवल खेत ही नहीं डूबे, बल्कि स्थानीय स्तर पर जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है:

जल निकासी का संकट: तटबंध टूटने से गांवों के निचले इलाकों और रास्तों पर भी पानी जमा हो गया है। खेतों से पानी की निकासी के लिए कोई उचित या त्वरित प्राकृतिक निकास नहीं होने के कारण जल जमाव की स्थिति विकट हो गई है।

संक्रामक बीमारियों का डर: पानी रुकने से अब धीरे-धीरे कीचड़ और दुर्गंध फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां फैलने का डर भी सताने लगा है। लोग अपने घरों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासनिक सहायता की मांग

घटना की सूचना मिलते ही गोपालपुर गांव और झिटकाही मधुबन पंचायत के लोग आक्रोशित हो उठे।

लापरवाही का आरोप: ग्रामीणों और किसानों ने जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) और स्थानीय प्रशासन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नहर के कमजोर तटबंधों की मरम्मत और रखरखाव का कार्य किया गया होता, तो आज यह दिन देखना नहीं पड़ता।

प्रशासन से मुआवजे की गुहार: पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से तुरंत मौके का मुआयना करने और बर्बाद हुई धान की फसलों का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही, टूटे हुए तटबंध को युद्ध स्तर पर मरम्मती कराने तथा खेतों से पानी की निकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की पुरजोर मांग की जा रही है ताकि आगे और अधिक नुकसान से बचा जा सके।