सहायक नदियां भी उफान पर, चार झोपड़ियां डूबीं जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में बढ़ी चिंता, फसलों को नुकसान की आशंका

भागलपुर : जिले के ग्रामीण इलाकों में गंगा के साथ-साथ उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में भी लगातार बढ़ोतरी से लोगों की चिंता बढ़ गई है। सहायक नदियों के उफान पर आने के कारण निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। कई जगहों पर खेतों और ग्रामीण रास्तों में पानी प्रवेश कर गया है। नदी किनारे बसे लोगों को अब बाढ़ की आशंका सताने लगी है। इसी क्रम में निचले क्षेत्र में बनी चार झोपड़ियां पानी में डूब गईं, जिसके बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर जाने की चिंता सताने लगी है।

जलस्तर बढ़ने का सबसे अधिक असर नदी किनारे और दियारा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। खेतों में पानी घुसने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। धान समेत अन्य फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में बढ़ोतरी इसी तरह जारी रही तो आने वाले दिनों में और अधिक खेत पानी में डूब सकते हैं।

चार झोपड़ियां पानी में डूबीं

सहायक नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के बाद निचले हिस्से में स्थित चार झोपड़ियां पानी से घिर गईं और देखते ही देखते उनमें पानी प्रवेश कर गया। झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों को अपने सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में परेशानी हुई। स्थानीय लोगों ने प्रभावित परिवारों की मदद की और उन्हें ऊंचे स्थान पर जाने की सलाह दी।

ग्रामीणों के अनुसार, नदी का पानी धीरे-धीरे आसपास के इलाकों में फैल रहा है। फिलहाल कई स्थानों पर पानी घरों के आसपास तक पहुंच चुका है। यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो अन्य घरों और ग्रामीण बस्तियों पर भी खतरा मंडरा सकता है।

प्रभावित लोगों ने प्रशासन से स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति गंभीर होने से पहले ही सुरक्षित स्थानों की पहचान और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कर ली जानी चाहिए।

खेतों में घुसा पानी, किसानों की चिंता बढ़ी

नदियों के जलस्तर में वृद्धि का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। कई खेतों में पानी भर गया है। धान और अन्य खरीफ फसलों के प्रभावित होने की आशंका है। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।

किसानों के अनुसार, इस समय फसल के लिए पानी की जरूरत तो है, लेकिन बाढ़ का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहना नुकसानदायक साबित हो सकता है। पानी की अधिकता से पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं और उत्पादन में भारी कमी आने की संभावना है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से खेतों में जलजमाव की स्थिति का सर्वे कराने और फसल क्षति का आकलन करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि फसल को नुकसान होता है तो प्रभावित किसानों को सरकारी प्रावधान के अनुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

ग्रामीण रास्तों पर भी असर

सहायक नदियों का पानी बढ़ने से कई ग्रामीण रास्तों पर भी आवागमन प्रभावित हुआ है। कच्चे रास्तों पर पानी भरने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने और बच्चों को स्कूल भेजने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

कुछ इलाकों में लोग ऊंचे रास्तों का सहारा ले रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ग्रामीण संपर्क मार्गों की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर नाव या अन्य वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रशासन की नजर जलस्तर पर

नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे बच्चों और बुजुर्गों को नदी और जलमग्न क्षेत्रों के पास न जाने दें।

प्रशासनिक स्तर पर संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। प्रभावित इलाकों में आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत सामग्री और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की तैयारी रखने की बात कही गई है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो पानी और अधिक ग्रामीण इलाकों में फैल सकता है। इससे आवासीय क्षेत्रों के साथ-साथ खेती को भी भारी नुकसान हो सकता है।