श्रावणी मेले में आस्था का अनूठा उफान सामान्य कांवरियों के साथ तेजी से बढ़ रही 'डाक बम' और 'दांडी बम' की संख्या, युवाओं में दिख रहा विशेष क्रेज

भागलपुर: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के दौरान भागलपुर के ऐतिहासिक सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट पर हर साल शिव भक्तों का महासैलाब उमड़ता है। इस बार के मेले में एक बेहद खास और आध्यात्मिक रूप से अनूठी प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। पारंपरिक रूप से जल उठाने वाले सामान्य कांवरियों (बमों) की भारी भीड़ के साथ-साथ इस वर्ष डाक बमों और दांडी बमों की संख्या में भी रिकॉर्डतोड़ वृद्धि दर्ज की जा रही है। कठिन साधना और कठोर अनुशासन वाले इन विशेष मार्गों के प्रति श्रद्धालुओं, खासकर युवा वर्ग का बढ़ता आकर्षण इस बार के मेले का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

क्या है डाक बम और दांडी बम की यात्रा की विशेषता?

श्रावणी मेले में कांवर यात्रा के कई रूप हैं, जिनमें डाक बम और दांडी बम की यात्रा को सबसे कठिन और सर्वोच्च तपस्या माना जाता है:

कठिन और तेज डाक बम यात्रा: डाक बम कांवरिए सुल्तानगंज से गंगाजल उठाने के बाद बिना रुके, लगातार दौड़ते या तेज चाल से चलते हुए 24 से 30 घंटे के भीतर लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय कर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते हैं। इन्हें बीच मार्ग में रुकने की अनुमति नहीं होती है।

अद्भुत सहनशक्ति वाले दांडी बम: वहीं दूसरी ओर, दांडी बम सुल्तानगंज से बाबाधाम तक की पूरी यात्रा लेट-लेट कर यानी दंड-प्रणाम करते हुए पूरी करते हैं। शरीर को पूरी तरह समर्पित कर दी जाने वाली इस कठिन साधना में हर आयु वर्ग के श्रद्धालु शामिल होते हैं।

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है डाक बम बनने का क्रेज

इस वर्ष के मेलों के आंकड़ों और स्थानीय रुझानों पर गौर करें तो युवाओं के बीच डाक बम बनकर यात्रा करने की प्रवृत्ति में जबरदस्त इजाफा हुआ है:

कम समय में मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता: युवाओं का मानना है कि अत्यंत अल्प समय में कठिन शारीरिक श्रम और अनुशासन के साथ बाबा को जल अर्पित करने से महादेव अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं।

बढ़ता आत्मविश्वास और उत्साह: देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले युवा और युवतियां भारी उत्साह के साथ डाक पर्ची (प्रमाण पत्र) कटाकर इस कठिन चुनौती को स्वीकार कर रहे हैं। महिला डाक बमों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

प्रशासनिक तैयारियां और सेवा शिविरों की भूमिका

डाक बमों और दांडी बमों की संख्या में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं:

नियंत्रण कक्ष और सुरक्षा: सुल्तानगंज प्रशासन द्वारा हर1 घंटे और प्रतिदिन के आधार पर डाक बमों का पंजीकरण किया जा रहा है। कांवरिया पथ पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि इन विशेष कांवरियों को दौड़ने या आगे बढ़ने में कोई बाधा न आए।

स्वास्थ्य और विश्राम शिविर: चूंकि डाक और दांडी बम लगातार गतिमान रहते हैं, इसलिए रास्ते में जगह-जगह सामाजिक संगठनों द्वारा उनके पैरों की मालिश, ओआरएस, गर्म पानी और प्राथमिक उपचार के लिए विशेष सेवा शिविर चलाए जा रहे हैं।

सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले मार्ग पर सामान्य कांवरियों के साथ-साथ डाक बमों और दांडी बमों की संख्या में हो रही यह वृद्धि सनातन संस्कृति के प्रति अटूट विश्वास और अगाध आस्था का प्रतीक है। आधुनिक दौर की भागदौड़ के बीच युवा पीढ़ी का इस कठिन आध्यात्मिक मार्ग को चुनना यह साबित करता है कि आस्था की यह धारा समय के साथ और अधिक सशक्त और ऊर्जावान होती जा रही है।