पीरपैंती में नागपंचमी पर आस्था की बहार मां शामनी मंदिर में बरई समाज के दो दिवसीय अनुष्ठान से गूंजा क्षेत्र; नाग देवता को अर्पित किया गया दूध और लावा

भागलपुर : प्रकृति, जीव-संरक्षण और लोक आस्था के अद्वितीय पर्व नागपंचमी का पावन त्योहार भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड क्षेत्र में पूरी श्रद्धा, परंपरा और भक्तिभाव के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। सावन मास की इस पवित्र तिथि पर पीरपैंती के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों में सुबह से ही भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। श्रद्धालुओं ने स्थानीय शिवालयों और नाग मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर विशेष रूप से प्रसिद्ध मां शामनी मंदिर में दो दिवसीय भव्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जहाँ बरई समाज के लोगों ने पूरी निष्ठा के साथ पारंपरिक पूजा-पाठ संपन्न किया। नाग देवता को दूध, धान के लावे और मौसमी फलों का भोग लगाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई।

अहले सुबह से शुरू हुआ पूजा-अर्चना का दौर

नागपंचमी के पावन अवसर पर पीरपैंती क्षेत्र के कोने-कोने में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही:

स्नान-ध्यान और शुद्धिकरण: पर्व को लेकर अहले सुबह से ही महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध मन से पूजा की तैयारियां शुरू कर दी थीं। घरों की साफ-सफाई के बाद घरों के द्वारों पर नाग देवता के प्रतीक चिन्ह बनाए गए।

दूध और धान के लावे का प्रसाद: सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने नाग मंदिरों, पारंपरिक स्थानों और खेतों के समीप जाकर नाग देवता को कच्चा दूध, धान का लावा, खील, बतासे और पूजा सामग्री अर्पित की।

विषमुक्त जीवन की कामना: ऐसी अटूट मान्यता है कि नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्पदंश का भय समाप्त होता है और परिवार पर आने वाली सभी विपत्तियाँ टल जाती हैं। इसी विश्वास के साथ हर घर और मंदिर में भक्तों ने श्रद्धा के फूल चढ़ाए।

मां शामनी मंदिर में बरई समाज का दो दिवसीय विशेष आयोजन

पीरपैंती क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक मां शामनी मंदिर में नागपंचमी का यह पर्व विशेष आकर्षण का केंद्र रहा:

बरई समाज की सक्रिय सहभागिता: मां शामनी मंदिर परिसर में बरई समाज द्वारा पिछले दो दिनों से लगातार विधिवत धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का आयोजन किया जा रहा था। समाज के गणमान्य लोगों और युवाओं ने मिलकर इस आयोजन को पूरी भव्यता के साथ संपन्न कराया।

विशाल हवन और पूजन: दो दिवसीय इस विशेष उत्सव के दौरान आचार्य और पुजारियों के मंत्रोच्चार के बीच माँ शामनी और नाग देवता का भव्य शृंगार एवं पूजन किया गया। मंदिर परिसर में हवन और विशेष आरती का आयोजन हुआ, जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

फल, मिठाई और पारंपरिक भोग: श्रद्धालुओं ने माँ शामनी के दरबार में नारियल, फल, मिठाइयां, और विशेष प्रसाद अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दो दिनों तक चले इस अनुष्ठान के कारण पूरा मंदिर परिसर और आसपास का इलाका पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।

मेल जैसा माहौल और बच्चों में उत्साह

नागपंचमी के मौके पर पीरपैंती के विभिन्न मंदिरों और विशेषकर मां शामनी मंदिर के आसपास एक छोटे से मेले जैसा दृश्य देखने को मिला:

दुकानों की सजी रौनक: मंदिर के बाहर पूजा सामग्री, खिलौनों, बच्चों की पसंदीदा वस्तुओं और मिठाइयों की दुकानें सजी हुई थीं। बच्चों और युवाओं में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।

पारंपरिक लोक गीतों की गूंज: बुजुर्ग महिलाओं द्वारा नागपंचमी से जुड़े पारंपरिक लोक गीत और कथाएं गाई गईं, जिससे नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला।

पर्यावरण और जीव संरक्षण का संदेश देता यह पर्व

पीरपैंती में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया नागपंचमी का यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ हमारे गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है:

किसानों के मित्र नाग देवता: बुजुर्गों का मानना है कि नाग देवता किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले चूहों और कीटों का भक्षण कर खेतों की रक्षा करते हैं। इस पर्व के माध्यम से प्रकृति और वन्य जीवों के प्रति सह-अस्तित्व और करुणा का संदेश समाज में प्रसारित होता है।

सामाजिक समरसता की मिसाल: बरई समाज द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय उत्सव ने आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की एक बेहतरीन मिसाल पेश की, जहाँ सभी वर्गों के लोगों ने मिलकर उत्सव को सफल बनाया।

पीरपैंती में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ नागपंचमी का यह महापर्व एक बार फिर यह साबित करता है कि हमारी लोकसंस्कृति अपनी जड़ों से कितनी मजबूती से जुड़ी हुई है। मां शामनी मंदिर में बरई समाज द्वारा आयोजित दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान और घर-घर में नाग देवता को दूध-लावा चढ़ाने की परंपरा ने पूरे क्षेत्र को अध्यात्म के रंग में रंग दिया। शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में संपन्न हुए इस आयोजन ने पीरपैंती के सांस्कृतिक वैभव को एक नई ऊँचाई प्रदान की है।