18 बेड वाले यूनिट में मिले 16 नवजात; उपचार व्यवस्था और डॉक्टरों की कार्यशैली से संतुष्ट नजर आए अधिकारी, डॉ. जयकिशन के कार्यों की हुई विशेष सराहना
बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सकीय सेवाओं और नवजात शिशुओं की देखरेख को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुजफ्फरपुर जिले से स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने वाली एक बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल परिसर में स्थित विशेष नवजात देखभाल इकाई (Special Newborn Care Unit - SNCU) का जायजा लेने के लिए यूनिसेफ (UNICEF) की एक विशेष उच्चस्तरीय टीम ने औचक निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण के दौरान टीम ने यूनिट में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, उपकरणों की स्थिति और नवजात शिशुओं को मिल रहे उपचार की बारीकी से जांच की। कुल 18 बेड वाले इस एसएनसीयू में उस वक्त 16 नवजात शिशु भर्ती पाए गए, जिनका डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ द्वारा बेहतरीन तरीके से इलाज किया जा रहा था। निरीक्षण के बाद यूनिसेफ की टीम ने अस्पताल की उपचार सुविधाओं पर गहरी संतुष्टि जताई और वहां तैनात चिकित्सकों की पीठ थपथपाई। विशेष रूप से डॉ. जयकिशन द्वारा नवजात शिशुओं के इलाज में निभाए जा रहे उत्कृष्ट और समर्पित भूमिका की टीम ने खुले कंठ से सराहना की। आइए मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के एसएनसीयू के इस निरीक्षण, यूनिसेफ की टीम के फीडबैक और बाल स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
निरीक्षण का उद्देश्य: नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करना और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करना
यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष) दुनिया भर में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और अधिकारों के लिए कार्य करने वाली एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था है। भारत में भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से यूनिसेफ विभिन्न जिलों में स्वास्थ्य इकाइयों का मूल्यांकन करता रहता है।
एसएनसीयू की कार्यप्रणाली की जांच: मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के एसएनसीयू में जन्म लेने वाले कमजोर, बीमार या समय से पहले जन्मे (Premature) नवजातों को जीवन रक्षक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। यूनिसेफ की टीम का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली ये सुविधाएं धरातल पर कितनी प्रभावी हैं।
संसाधनों का आकलन: टीम ने यूनिट में मौजूद जीवन रक्षक उपकरणों जैसे कि रेडिएंट वार्मर, फोटोथेरेपी मशीन, ऑक्सीजन सपोर्ट और इंफ्यूजन पंप आदि की कार्यशीलता का बारीकी से निरीक्षण किया।
18 बेड वाले यूनिट में 16 नवजात भर्ती: हाई ऑक्यूपेंसी और बेहतर प्रबंधन
निरीक्षण के दौरान यूनिसेफ की टीम ने पाया कि एसएनसीयू की क्षमता का भरपूर उपयोग हो रहा है और जरूरतमंद बच्चों को तुरंत बेड उपलब्ध कराया जा रहा है।
क्षमता और उपयोगिता: सदर अस्पताल का यह एसएनसीयू 18 बेड की क्षमता वाला सुसज्जित वार्ड है। निरीक्षण के समय यहाँ 16 नवजात शिशु विभिन्न गंभीर बीमारियों या कम वजन के चलते भर्ती थे।
संक्रमण नियंत्रण और साफ-सफाई: नवजात शिशुओं के वार्ड में संक्रमण (Infection Control) का खतरा सबसे बड़ा होता है। टीम ने वार्ड के भीतर रखी जाने वाली साफ-सफाई, हैंड सैनिटाइजेशन प्रोटोकॉल और डॉक्टरों व नर्सों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों का जायजा लिया, जिस पर टीम ने पूर्ण संतोष व्यक्त किया।
यूनिसेफ टीम द्वारा चिकित्सकों की सराहना और डॉ. जयकिशन का योगदान
किसी भी स्वास्थ्य संस्थान की सफलता के पीछे वहां के डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की निष्ठा और मेहनत सबसे महत्वपूर्ण होती है। यूनिसेफ की टीम ने मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के मेडिकल स्टाफ के समर्पण भाव की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
डॉ. जयकिशन के कार्यों की विशेष सराहना: निरीक्षण दल ने विशेष रूप से एसएनसीयू में अपनी सेवाएं दे रहे डॉ. जयकिशन के कार्य करने के तौर-तरीकों, उनकी क्लिनिकल स्किल्स और नवजात बच्चों के प्रति उनके संवेदनशील रवैये की भूरी-भूरी प्रशंसा की। टीम ने कहा कि जिस प्रकार डॉ. जयकिशन और उनकी टीम गंभीर स्थिति में आने वाले नवजातों की जान बचा रही है, वह अन्य अस्पतालों के लिए भी एक मिसाल है।
नर्सिंग स्टाफ की मुस्तैदी: डॉक्टरों के साथ-साथ वहां तैनात स्टाफ नर्सों और पैरा मेडिकल कर्मियों की कार्यशैली को भी यूनिसेफ के अधिकारियों ने सराहा, जो चौबीसों घंटे पूरी तल्लीनता से छोटे बच्चों की देखभाल में जुटे रहते हैं।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुजफ्फरपुर एक कदम आगे
मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के एसएनसीयू को इस प्रकार की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं द्वारा सराहना मिलना जिले के स्वास्थ्य प्रशासन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: पिछले कुछ वर्षों में बिहार सरकार द्वारा सदर अस्पतालों के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उनके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं।
मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी: इस तरह की आधुनिक इकाइयों के सुचारू रूप से संचालन से मुजफ्फरपुर जिले में नवजात शिशु मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा तेजी से बढ़ रहा है।
मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू का यूनिसेफ की टीम द्वारा किया गया निरीक्षण और वहां की व्यवस्थाओं पर संतोष जताना यह साबित करता है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाएं सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। 18 बेड के इस यूनिट में 16 नवजातों का बेहतर उपचार इस बात का प्रमाण है कि अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। विशेष रूप से डॉ. जयकिशन और उनकी पूरी चिकित्सा टीम द्वारा दी जा रही उत्कृष्ट सेवाएं न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय हैं। यह सफलता यह दर्शाती है कि यदि सच्ची निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य किया जाए, तो सरकारी अस्पतालों में भी विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।