क्रेडिट कार्ड के स्वास्थ्य बीमा के नाम पर व्यक्ति के खाते से उड़ाए 3.43 लाख रुपये, अनजान कॉल के झांसे में आकर गंवाए गाढ़ी कमाई

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से साइबर अपराध का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो डिजिटल युग में हमारी थोड़ी सी लापरवाही और तकनीकी अनजानपन के गंभीर परिणामों को उजागर करता है। मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों ने एक व्यक्ति को अपना शिकार बनाते हुए उसके क्रेडिट कार्ड से जुड़े स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) के बहाने 3,43,000 रुपये (3.43 लाख रुपये) की भारी-भरकम रकम धोखाधड़ी कर उड़ा ली। पीड़ित के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था, जिसमें शातिर ठग ने उसे यह झांसा दिया कि उसके खाते से चार हजार रुपये कटने वाले हैं या कट चुके हैं। इसी जालसाजी और डर के माहौल में पीड़ित ठगों के झांसे में आ गया और अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई एक झटके में गंवा बैठा।

क्या है पूरा मामला? कैसे रची गई ठगी की साजिश?

यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के किसी स्थानीय निवासी से जुड़ा है, जिसे हाल ही में एक साइबर अपराधी ने अपना निशाना बनाया।

अनजान कॉल और स्वास्थ्य बीमा का झांसा: पीड़ित के मोबाइल पर एक अज्ञात (अनजान) नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को बैंक या बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उसने बातचीत के दौरान पीड़ित को क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) या उससे जुड़े नवीनीकरण का लालच या डर दिखाया।

चार हजार रुपये कटने का डर: ठगों ने पीड़ित का मानसिक संतुलन बिगाड़ने और उन्हें घबराने के लिए यह झूठ बोला कि उनके खाते से चार हजार रुपये की राशि कटने वाली है या कट रही है। इस बात से अनजान पीड़ित जब असमंजस में पड़ गया, तो ठगों ने समस्या के समाधान के नाम पर उससे गोपनीय जानकारियां मांगनी शुरू कर दीं।

झांसे में फंसे पीड़ित और पलक झपकते ही खाते से उड़े 3.43 लाख रुपये

साइबर ठग इतने शातिर होते हैं कि वे लोगों को सोचने का मौका तक नहीं देते। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

ओटीपी (OTP) और रिमोट ऐप का खेल: कॉल करने वाले शातिर ठग ने पीड़ित को विश्वास में लेते हुए मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) या किसी अन्य तकनीकी प्रक्रिया के जरिए बैंक खाते तक अपनी पहुंच बना ली।

बड़ी चपत: जैसे ही ठगों को बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड का एक्सेस मिला, उन्होंने चंद मिनटों के भीतर पीड़ित के खाते से 3 लाख 43 हजार रुपए की बड़ी रकम ट्रांसफर कर ली। जब पीड़ित के मोबाइल पर पैसे कटने का मैसेज आया, तब उसे अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

पुलिस में शिकायत और साइबर सेल की कार्रवाई

घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने स्थानीय थाना और मुजफ्फरपुर के साइबर थाने में पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत दर्ज: पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। बैंक खातों के ट्रांजैक्शन ट्रेल (Transaction Trail) को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी गई रकम किस बैंक खाते या वॉलेट में ट्रांसफर की गई है।

तकनीकी जांच: साइबर सेल की टीम उन फोन नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल ठगों ने पीड़ित को कॉल करने के लिए किया था।

साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां और जागरूकता

मुजफ्फरपुर की यह घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन के इस दौर में हमें अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

क्रेडिट/डेबिट कार्ड की जानकारी साझा न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते के विवरण, पासवर्ड, पिन या ओटीपी (OTP) को कभी भी शेयर न करें। बैंक कभी भी फोन पर इस तरह की संवेदनशील जानकारियां नहीं मांगते।

शक होने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें: यदि किसी अनजान कॉल पर आपको जरा भी शक हो, तो कॉल तुरंत काट दें और अपने संबंधित बैंक की आधिकारिक शाखा या ग्राहक सेवा केंद्र (Customer Care) से संपर्क करें।