समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संकल्प जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन

भागलपुर/बिहार: जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बिहार और भागलपुर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय 'डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग वर्कशॉप' (प्रशिक्षण कार्यशाला) का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संगठन के कार्यकर्ताओं को सामाजिक सुधार, शिक्षा के प्रति जागरूकता, आपदा प्रबंधन और देश की एकता व अखंडता को बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय करना था। कार्यशाला में भागलपुर जिले के विभिन्न हिस्सों से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य: संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक दायित्व

इस प्रशिक्षण सत्र का आयोजन भागलपुर के स्थानीय कार्यालय में किया गया, जिसमें जमीयत के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संगठन की नीतियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला के दौरान मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जोर दिया गया:

शिक्षा और कौशल विकास: समाज में बढ़ रही निरक्षरता को दूर करना और नई पीढ़ी को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना।

सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन: दहेज प्रथा, नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जन-जागरण अभियान चलाना।

आपदा प्रबंधन और सेवा: किसी भी आपातकालीन स्थिति या आपदा के समय पीड़ितों की बिना भेदभाव सहायता करना।

विचारकों और विशेषज्ञों का संबोधन

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा बिहार के प्रदेश सचिव ने कहा, "जमीयत का इतिहास हमेशा देश की सेवा और शांति का रहा है। हमारे कार्यकर्ताओं का काम केवल अपनी जिम्मेदारी निभाना नहीं, बल्कि समाज के हर वंचित वर्ग तक मदद पहुंचाना है।"

उन्होंने कहा कि आज के दौर में गलत सूचनाओं (misinformation) और नफरत के माहौल को दूर करने के लिए जमीयत के कार्यकर्ताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कार्यकर्ताओं को सिखाया गया कि वे स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच कैसे सामंजस्य स्थापित करें और कानून के दायरे में रहकर न्याय के लिए आवाज कैसे उठाएं।

प्रशिक्षण के प्रमुख सत्र

एक दिवसीय कार्यशाला को विभिन्न सत्रों में विभाजित किया गया था:

पहला सत्र - 'जमीयत का लक्ष्य': इसमें संगठन के संस्थापक सिद्धांतों और आजादी के आंदोलन में जमीयत की भूमिका पर चर्चा की गई।

दूसरा सत्र - 'सोशल वर्क और कानूनी जागरूकता': इस सत्र में कार्यकर्ताओं को बताया गया कि कैसे सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुँचाया जा सकता है और कानूनी सहायता के माध्यम से पीड़ितों को न्याय कैसे दिलाया जा सकता है।

तीसरा सत्र - 'डिजिटल युग में जन-संपर्क': आधुनिक युग को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं को डिजिटल मीडिया के सुरक्षित और सकारात्मक उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे संगठन की गतिविधियों को सही ढंग से लोगों तक पहुँचा सकें।

कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह

प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लेने वाले कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को साझा किया और जमीयत के नेतृत्व से मार्गदर्शन मांगा। एक प्रतिभागी ने कहा, "यह प्रशिक्षण हमारे लिए बहुत प्रेरणादायक रहा। अब हम अधिक आत्मविश्वास और संगठित तरीके से समाज की सेवा कर सकेंगे।"

सर्वधर्म सद्भाव और शांति का संदेश

कार्यशाला के अंत में एक सर्वधर्म सद्भाव बैठक भी हुई, जिसमें भागलपुर के शांतिप्रिय माहौल को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया। जमीयत के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य मानवता की सेवा है और इसमें धर्म या समुदाय का कोई भेदभाव नहीं होता। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने मोहल्लों और गांवों में भाईचारा कायम रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

भविष्य की कार्ययोजना

जमीयत उलेमा भागलपुर के जिला अध्यक्ष ने अंत में कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं केवल एक दिवसीय आयोजन नहीं हैं, बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले महीनों में प्रखंड स्तर पर भी इसी तरह के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि जमीयत की विचारधारा का विस्तार हो सके और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मदद मिल सके।

यह कार्यशाला न केवल जमीयत के कार्यकर्ताओं के लिए एक शिक्षाप्रद अनुभव साबित हुई, बल्कि इसने भागलपुर के सामाजिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव लाने का एक मजबूत संदेश भी दिया।