कहलगांव में भक्ति और आस्था का सैलाब भव्य रथयात्रा के साथ गूंजे 'जय जगन्नाथ' के जयघोष

कहलगांव: आस्था के महापर्व रथयात्रा के अवसर पर कहलगांव की गलियां गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर हो गईं। श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली गई। जैसे ही भगवान का रथ मंदिर परिसर से बाहर निकला, पूरा नगर 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के जयघोष से गूंज उठा।

श्रद्धा का अनूठा संगम

सांयकाल छह बजे जैसे ही रथ मंदिर से निकला, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस रथयात्रा में शामिल होने के लिए दूर-दराज से आए भक्त सुबह से ही उत्साहित थे। रथयात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी था, जिसमें भगवान के भक्त पारंपरिक परिधानों में कीर्तन-भजन करते हुए चल रहे थे। कहलगांव के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए यह रथयात्रा एक आध्यात्मिक उत्सव में तब्दील हो गई।

रथयात्रा का पारंपरिक मार्ग

रथयात्रा का यह सफर भक्ति और समर्पण का प्रतीक रहा। रथ मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर महावीर पिंडा और थाना रोड जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए पूरे नगर का भ्रमण किया। इस दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने रथ पर विराजमान देव विग्रहों की पूजा-अर्चना की और पुष्प वर्षा कर अपना आशीर्वाद मांगा। रथ की रस्सियों को खींचने के लिए भक्तों में होड़ मची थी, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि रथ को खींचने से जीवन के कष्ट मिट जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

भक्तिमय माहौल के बीच थाना रोड से गुजरती हुई यह यात्रा अपने गंतव्य धर्मशाला पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। इस दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह जलपान और प्रसाद की व्यवस्था की गई थी।

भक्ति और लोक आस्था का प्रतीक

रथयात्रा के दौरान स्थानीय लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि ने वातावरण को पूरी तरह से धर्ममय बना दिया था। स्थानीय मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर के प्रतीक स्वरूप) की यात्रा पर निकलते हैं, जो समाज में भाईचारे और भक्ति के प्रसार का संदेश देती है।

प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा

इस भव्य आयोजन को शांतिपूर्ण और सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों ने विशेष इंतजाम किए थे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच स्वयंसेवकों की टीम लगातार श्रद्धालुओं की मदद कर रही थी। रथयात्रा के समापन के बाद धर्मशाला परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण हुआ।

कहलगांव की इस रथयात्रा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आस्था की डोर कितनी मजबूत होती है। भगवान जगन्नाथ की यह यात्रा भक्तों के लिए न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आपसी सौहार्द और अटूट विश्वास का महापर्व भी है। आने वाले कुछ दिनों तक भगवान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ धर्मशाला (मौसी घर) में विराजमान रहेंगे, जहां प्रतिदिन महाआरती और भक्तों का तांता लगा रहेगा।